AI Impact summit (Source. AI) 
टेक्नॉलजी

क्या भारत अब तय करेगा दुनिया की टेक्नोलॉजी का भविष्य? जानिए क्यों ऐतिहासिक है AI Impact Summit 2026

AI Action Summit: AI के दीवाने हैं, तो यह खबर आपके लिए बेहद खास है। राजधानी दिल्ली एक बार फिर ग्लोबल टेक हब बनने जा रही है। आज से भारत मंडपम में 'AI Impact Summit 2026' की शुरुआत हो गई है।

सिमरन सिंह

AI For All: अगर आप नई टेक्नोलॉजी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के दीवाने हैं, तो यह खबर आपके लिए बेहद खास है। राजधानी दिल्ली एक बार फिर ग्लोबल टेक हब बनने जा रही है। आज से भारत मंडपम में 'AI Impact Summit 2026' की शुरुआत हो गई है, जहां दुनिया के बड़े देशों के राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और दिग्गज टेक कंपनियों के CEO एक ही मंच पर नजर आएंगे। माना जा रहा है कि यह आयोजन भारत को AI की दुनिया में नई और मजबूत पहचान दिला सकता है।

पहले कहां हुई थीं ऐसी समिट?

AI से जुड़ी वैश्विक बैठकों की शुरुआत 2023 में हुई थी। पहली बार 1-2 नवंबर 2023 को ब्रिटेन के ब्लेचली पार्क में 'AI Safety Summit' आयोजित किया गया था। इसमें AI से जुड़े संभावित खतरों और सुरक्षा मानकों पर चर्चा हुई थी। बैठक के अंत में ‘ब्लेचली डिक्लेरेशन’ जारी किया गया, जिसमें AI को सुरक्षित बनाने पर सहमति बनी। इसके बाद 2024 में साउथ कोरिया की राजधानी सियोल में 'AI Seoul Summit' आयोजित हुई। यहां AI को सुरक्षित और समावेशी बनाने पर जोर दिया गया। फरवरी 2025 में फ्रांस के पेरिस में 'AI Action Summit' आयोजित की गई, जिसकी संयुक्त अध्यक्षता फ्रांस और भारत ने की। इस समिट में AI को पब्लिक इंटरेस्ट, शिक्षा, स्वास्थ्य और विकास से जोड़ने पर चर्चा हुई।

पिछली समिट्स से क्या निकला नतीजा?

ब्रिटेन की बैठक में डेटा सुरक्षा, कंपनियों की जिम्मेदारी और इंसानी निगरानी जैसे मुद्दों पर फोकस किया गया। सियोल में देशों ने माना कि AI के फायदे जितने बड़े हैं, उसके खतरे भी उतने ही गंभीर हो सकते हैं। इसी दौरान AI Safety Institute जैसे संस्थानों की जरूरत पर जोर दिया गया। पेरिस में यह साफ संदेश दिया गया कि AI केवल मुनाफे का जरिया नहीं, बल्कि समाज के विकास का साधन होना चाहिए। शिक्षा, खेती, स्वास्थ्य और पर्यावरण जैसे क्षेत्रों में इसके सकारात्मक उपयोग पर चर्चा हुई।

दिल्ली की समिट क्यों है सबसे खास?

इस बार दिल्ली के भारत मंडपम में हो रही AI Impact Summit 2026 कई मायनों में अलग है। पहली बार कोई विकसित देश नहीं, बल्कि भारत जैसा विकासशील देश AI के वैश्विक नियमों की अगुवाई कर रहा है। इसे ग्लोबल साउथ की बड़ी जीत माना जा रहा है। इस बार सिर्फ घोषणाएं नहीं, बल्कि AI कॉमन्स और साझा कंप्यूट इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे ठोस प्रोजेक्ट्स पर हस्ताक्षर हो रहे हैं। भारत अपना खुद का AI स्टैक भी पेश कर रहा है, जिसे 45 देश अपनाने की तैयारी में हैं।

आम आदमी और युवाओं को क्या फायदा?

सरकार "Yuva AI for All" जैसे कार्यक्रमों के जरिए हर छात्र और प्रोफेशनल तक AI की पहुंच बनाना चाहती है। सुंदर पिचाई और सैम ऑल्टमैन जैसे दिग्गजों की मौजूदगी इस बात का संकेत है कि भारत अब सिर्फ एक बाजार नहीं, बल्कि AI की दुनिया में नेतृत्व करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

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