Hotel Free Wi-Fi Hack: आप भी बिजनेस ट्रिप या छुट्टियों के दौरान होटल और एयरपोर्ट का Free Wi-Fi इस्तेमाल करते हैं तो अब आपको थोड़ा ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत है। वहीं माइक्रोसॉफ्ट की थ्रेट इंटेलिजेंस टीम ने CaptiveCrunch नाम के एक खतरनाक साइबर अटैक अभियान को लेकर यात्रियों को अलर्ट किया है। इस अभियान में हैकर्स पब्लिक Wi-Fi नेटवर्क के जरिए यूजर्स के पासवर्ड, ब्राउजर डेटा और संवेदनशील जानकारी तक पहुंच बनाने की कोशिश कर रहे हैं।
माइक्रोसॉफ्ट ने जानकारी दी है कि इस अभियान को Storm-2945 नाम का हैकर ग्रुप चला रहा है। इसे रूस से जुड़े कुख्यात साइबर ग्रुप Midnight Blizzard (APT29/Cozy Bear) से जोड़ा गया है। खासतौर पर कॉर्पोरेट ट्रैवलर्स इस अभियान के निशाने पर बताए जा रहे हैं। हमला शुरू करने के लिए हैकर्स पहले होटल के राउटर या उस सिस्टम को निशाना बनाते हैं जहां से Wi-Fi का लॉगिन पेज यानी Captive Portal खुलता है। इसके बाद यूजर को Google या Microsoft 365 जैसा दिखने वाला नकली लॉगिन पेज दिखाया जा सकता है। जैसे ही यूजर अपनी जानकारी दर्ज करता है क्रेडेंशियल्स हैकर्स तक पहुंच सकते हैं।
इस साइबर अटैक का दूसरा खतरनाक हिस्सा फर्जी अपडेट हैं। Wi-Fi से कनेक्ट होने के बाद यूजर को Browser Update, Windows Security Check या DirectX/Visual C++ इंस्टॉल करने जैसे पॉप-अप दिखाई दे सकते हैं। ये मैसेज देखने में इतने असली लग सकते हैं कि यूजर आसानी से धोखा खा जाए। क्लिक करते ही डिवाइस में मालवेयर इंस्टॉल हो सकता है और इसके बाद हमलावर सिस्टम पर ज्यादा नियंत्रण हासिल करने की कोशिश कर सकते हैं।
माइक्रोसॉफ्ट की चेतावनी के अनुसार, संक्रमित डिवाइस से हैकर्स वेबकैम और माइक्रोफोन का दुरुपयोग, स्क्रीनशॉट लेने और की-स्ट्रोक्स रिकॉर्ड करने जैसी गतिविधियां कर सकते हैं। ब्राउजर में सेव पासवर्ड, कुकीज और दूसरी संवेदनशील जानकारी भी जोखिम में पड़ सकती है।
सुरक्षित रहने का सबसे आसान तरीका है कि होटल या एयरपोर्ट के पब्लिक Wi-Fi की जगह पर्सनल मोबाइल हॉटस्पॉट इस्तेमाल करें। Wi-Fi कनेक्ट करने के बाद अचानक दिखने वाले किसी भी अपडेट पॉप-अप पर क्लिक न करें। सॉफ्टवेयर अपडेट के लिए हमेशा उसकी आधिकारिक वेबसाइट या डिवाइस की सिस्टम सेटिंग्स का इस्तेमाल करें। अगर पब्लिक Wi-Fi इस्तेमाल करना मजबूरी हो तो भरोसेमंद VPN का उपयोग करना भी सुरक्षा की एक अतिरिक्त परत दे सकता है। खासकर कॉर्पोरेट यूजर्स के लिए छोटी-सी लापरवाही बड़ी डेटा चोरी में बदल सकती है।