UPI का सिस्टम कैसे काम करता है। Source. Gemini
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Google Pay और PhonePe पर सेकंडों में पहुंचता है पैसा, लेकिन पीछे कैसे काम करता है UPI? जानिए पूरा प्रोसेस

How UPI works: UPI Payment हमारी रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा है लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि QR कोड स्कैन करने और पेमेंट कन्फर्म होने के बीच आखिर पर्दे के पीछे क्या होता है?

सिमरन सिंह

UPI Payment Technology: आज के समय में UPI Payment हमारी रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन चुका है। जिसमें चाय की दुकान पर QR कोड स्कैन करने से लेकर ऑनलाइन शॉपिंग और बिजली का बिल भरने तक कुछ ही सेकंड में पेमेंट हो जाता है। वहीं Google Pay, PhonePe और Paytm जैसे ऐप्स ने इस प्रक्रिया को बेहद आसान बना दिया है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि QR कोड स्कैन करने और पेमेंट कन्फर्म होने के बीच आखिर पर्दे के पीछे क्या होता है? बता दें कि UPI के पीछे कई तकनीकी प्रक्रियाएं एक साथ काम करती हैं जो पेमेंट को तेज, सुरक्षित और भरोसेमंद बनाने में मदद करती हैं।

UPI क्या है और इसे किसने बनाया?

UPI का पूरा नाम Unified Payments Interface एक रियल-टाइम डिजिटल पेमेंट सिस्टम है जिसके जरिए एक बैंक अकाउंट से दूसरे बैंक अकाउंट में तुरंत पैसे भेजे जा सकते हैं। इसे National Payments Corporation of India (NPCI) ने विकसित किया है और भारत में पेमेंट सिस्टम से जुड़े नियमन में Reserve Bank of India (RBI) की अहम भूमिका है। वहीं UPI की खासियत यह है कि पैसे भेजने के लिए हर बार बैंक अकाउंट नंबर और IFSC जैसी जानकारी साझा करने की जरूरत नहीं पड़ती। इसमें मोबाइल नंबर, UPI ID या QR कोड के जरिए भी भुगतान किया जा सकता है।

QR स्कैन करते ही पर्दे के पीछे क्या होता है?

बता दें कि जब आप Google Pay, PhonePe या Paytm जैसे UPI ऐप को खोलकर QR कोड स्कैन करते हैं और रकम दर्ज करते हैं तो ऐप पेमेंट रिक्वेस्ट UPI नेटवर्क तक भेजता है। इस रिक्वेस्ट में ट्रांजैक्शन से जुड़ी जरूरी जानकारी और एक यूनिक आईडी शामिल होती है। वहीं इसके बाद सुरक्षा की अगली परत शुरू होती है। जिसमें यूजर को UPI PIN डालना होता है। सिस्टम यह जांचता है कि PIN सही है या नहीं और खाते में भुगतान के लिए पर्याप्त रकम उपलब्ध है या नहीं।

वहीं जानकारी सही पाए जाने के बाद UPI नेटवर्क संबंधित बैंकों से संपर्क करता है। भेजने वाले बैंक से रकम डेबिट होती है और प्राप्तकर्ता के बैंक में क्रेडिट की प्रक्रिया शुरू होती है। इसमें सफल होने पर दोनों पक्षों को ट्रांजैक्शन की पुष्टि मिल जाती है। यही वजह है कि ज्यादातर UPI पेमेंट कुछ ही सेकंड में पूरे हो जाते हैं।

पैसा तुरंत पहुंचता है लेकिन बैंक सेटलमेंट कब होता है?

इस तकनीक में एक दिलचस्प बात समझना जरूरी है। आपके सामने ट्रांजैक्शन तुरंत पूरा दिखाई देता है लेकिन बैंकों के बीच अंतिम सेटलमेंट एक अलग प्रक्रिया के तहत होता है। NPCI की व्यवस्था यह सुनिश्चित करती है कि संबंधित बैंकों के खाते में सही डेबिट और क्रेडिट का हिसाब दर्ज हो। जिसका सीधा मतलब है कि आपके मोबाइल पर दिखने वाला Payment Successful मैसेज पूरी प्रक्रिया का सिर्फ दिखाई देने वाला हिस्सा है। इसके पीछे बैंक, UPI नेटवर्क और कई तकनीकी सिस्टम मिलकर काम कर रहे होते हैं।

UPI इतना सुरक्षित कैसे रहता है?

जानकारी के लिए बता दें कि UPI में सुरक्षा के लिए कई स्तरों का इस्तेमाल किया जाता है। UPI PIN, एन्क्रिप्शन और अन्य सुरक्षा तकनीकें संवेदनशील बैंकिंग जानकारी को सुरक्षित रखने में मदद करती हैं। इसके अलावा बैंक और पेमेंट ऐप्स संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखते हैं और ट्रांजैक्शन होने पर यूजर को SMS या ऐप अलर्ट के जरिए जानकारी देते हैं। वहीं UPI की लोकप्रियता का बड़ा कारण इसकी स्पीड, आसान इस्तेमाल और 24x7 उपलब्धता है। छुट्टी हो या देर रात यूजर कई तरह के भुगतान तुरंत कर सकता है। यही तकनीकी ढांचा भारत में डिजिटल पेमेंट को बड़े पैमाने पर इस्तेमाल करने में मदद कर रहा है।

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