Digital arrest (Source. Pixabay) 
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वीडियो कॉल से डिजिटल अरेस्ट और करोड़ों की ठगी! सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा मामला

Online Scam: डिजिटल अरेस्ट फ्रॉड के मामलों को लेकर केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अपनी स्टेटस रिपोर्ट दाखिल कर दी है। अदालत के निर्देशों के तहत दिल्ली पुलिस द्वारा दर्ज FIR अब सीबीआई को सौंप दी है।

सिमरन सिंह

Supreme Court Digital Fraud: देश में तेजी से बढ़ते डिजिटल अरेस्ट फ्रॉड के मामलों को लेकर केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अपनी स्टेटस रिपोर्ट दाखिल कर दी है। अदालत के निर्देशों के तहत दिल्ली पुलिस द्वारा दर्ज एफआईआर अब सीबीआई को सौंप दी गई है, जिसके बाद एजेंसी ने नई एफआईआर दर्ज कर औपचारिक जांच शुरू कर दी है। यह कदम ऐसे समय उठाया गया है, जब साइबर ठगी के नए-नए तरीके आम लोगों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर रहे हैं।

डिजिटल अरेस्ट से 14.85 करोड़ की ठगी ने मचाई सनसनी

हाल ही में दिल्ली के ग्रेटर कैलाश इलाके में रहने वाले एक एनआरआई डॉक्टर दंपति के साथ वीडियो कॉल के जरिए तथाकथित "डिजिटल अरेस्ट" कर 14.85 करोड़ रुपये की ठगी का चौंकाने वाला मामला सामने आया। इस हाई-प्रोफाइल केस ने यह साफ कर दिया कि साइबर अपराधी अब खुद को जांच एजेंसियों का अधिकारी बताकर लोगों को मानसिक दबाव में ले रहे हैं और मिनटों में उनकी जिंदगी भर की कमाई साफ कर रहे हैं।

पूरे नेटवर्क तक पहुंचने की तैयारी में एजेंसियां

इस बड़े खुलासे के बाद जांच एजेंसियां अब केवल आरोपियों तक सीमित नहीं रहना चाहतीं, बल्कि पूरे साइबर फ्रॉड नेटवर्क को बेनकाब करने की कोशिश में जुट गई हैं। सीबीआई की जांच का मकसद यह पता लगाना है कि इस तरह के डिजिटल अरेस्ट फ्रॉड के पीछे कौन-कौन लोग शामिल हैं और यह गिरोह देश-विदेश में कैसे फैला हुआ है।

केंद्र सरकार ने मांगा एक महीने का समय

केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को यह भी अवगत कराया कि गठित समिति ने अदालत से एक महीने का समय मांगा है। इस दौरान समिति अन्य सदस्यों से जरूरी इनपुट जुटाएगी और इस गंभीर समस्या पर विस्तृत विचार-विमर्श करेगी। इसके बाद एक ठोस और विस्तृत रिपोर्ट अदालत के समक्ष पेश की जाएगी। गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने डिजिटल अरेस्ट से जुड़ी कई शिकायतों पर स्वतः संज्ञान लिया है।

हाई-लेवल इंटर-डिपार्टमेंटल कमेटी का गठन

केंद्र सरकार ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि गृह मंत्रालय ने "डिजिटल अरेस्ट" मामलों की गहन जांच के लिए एक हाई-लेवल इंटर-डिपार्टमेंटल कमेटी बनाई है। इस समिति की अध्यक्षता गृह मंत्रालय में आंतरिक सुरक्षा के विशेष सचिव करेंगे।

समिति में सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय, दूरसंचार विभाग, विदेश मंत्रालय, वित्तीय सेवा विभाग, विधि एवं न्याय मंत्रालय, उपभोक्ता मामलों का मंत्रालय और आरबीआई के संयुक्त सचिव स्तर के अधिकारी शामिल हैं। इसके अलावा सीबीआई, एनआईए और दिल्ली पुलिस के आईजी रैंक के अधिकारी तथा इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (आईसी) के सदस्य सचिव भी इस कमेटी का हिस्सा हैं।

आम लोगों के लिए क्या है संदेश

इस पूरे घटनाक्रम से यह साफ संकेत मिलता है कि सरकार और अदालतें डिजिटल ठगी को लेकर गंभीर हैं। आम नागरिकों को भी सतर्क रहने और किसी भी वीडियो कॉल, कॉल या मैसेज पर बिना पुष्टि पैसे या निजी जानकारी साझा न करने की जरूरत है।

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