Highlights:
Apple ने 1998 में भारत में कारोबार शुरू किया।
Apple को iPhone के लिए पहला आधिकारिक रिटेल स्टोर खोलने में उसे 25 साल लग गए।
2025 तक भारत में करीब 5.5 करोड़ iPhone असेंबल किए जाने का दावा है।
iPhone Store in India: भारत में एप्पल के प्रोडक्ट्स को लेकर भारी क्रेज है। लोग नया आईफोन खरीदने के लिए एक रात पहले से ही स्टोर के बाहर लाइन में लग जाते हैं। इन प्रोडक्ट्स को 'स्टेटस सिंबल' के तौर पर भी देखा जाता है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि भारत में पहला आधिकारिक एप्पल स्टोर खुलने में 2023 तक का समय क्यों लग गया, जबकि यह कंपनी 1998 से मौजूद है?
इतनी भारी लोकप्रियता के बावजूद, एक आधिकारिक स्टोर स्थापित करने में इतना लंबा समय क्यों लगा? आइए, भारत में एप्पल के पूरे सफर पर एक नजर डालते हैं।
कल्पना कीजिए कि खिलौनों का कोई मशहूर ब्रांड दशकों से स्थानीय रिटेलर्स के जरिए भारत में अपने प्रोडक्ट्स बेच रहा हो, लेकिन उसका अपना कोई आधिकारिक फ्लैगशिप स्टोर न हो। एप्पल के साथ बिल्कुल ऐसा ही हुआ।
Apple ने 1998 में भारत में अपना कारोबार शुरू किया। काफी लंबे समय तक, भारतीय लोग iPhone, iPad और MacBook सीधे Apple से खरीदने के बजाय, थर्ड-पार्टी अधिकृत विक्रेताओं से खरीदते थे। एप्पल ने सबसे पहले 2017 में भारत में आईफोन की असेंबलिंग शुरू की थी। इसके बाद भारत में एप्पल के आईफोन निर्माण में तेजी से वृद्धि हुई है।
जब एप्पल ने 19 साल पहले अपना पहला आईफोन लॉन्च किया था, तब स्मार्ट टेक्नोलॉजी आज से बहुत अलग थी। एप्पल ने धीरे-धीरे नए खोज किए और अपने प्रोडक्ट्स को पर लगातार नए अपडेट्स लाए। टचस्क्रीन से लेकर मल्टी यूज गैजेट तक बदलाव किए।
2007 (पहला आईफोन): इसमें 3.5 इंच की छोटी स्क्रीन थी। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह थी कि इसमें फिजिकल कीबोर्ड बटनों की जगह उंगलियों से चलने वाली टचस्क्रीन दी गई थी।
2008 (ऐप स्टोर): इसने यूजर्स को गेम और ऐप डाउनलोड करने की सुविधा दी, जिससे फोन एक मल्टी-यूज गैजेट में बदल गया।
2010 (रेटिना डिस्प्ले): इसने स्क्रीन के ग्राफिक्स, टेक्स्ट और फोटो को बेहद शार्प और साफ बना दिया।
2011 (सिरी): इसमें वॉयस असिस्टेंट टेक्नोलॉजी पेश की गई, जिससे यूजर्स सीधे अपने फोन से बात कर सकते थे।
2013 (टच आईडी): इसने यूजर्स को फिंगरप्रिंट सेंसर की मदद से अपने फोन को सुरक्षित रूप से अनलॉक करने की सुविधा दी।
2014 (बड़ी स्क्रीन): एप्पल ने आईफोन 6 सीरीज के साथ 4.7 इंच और 5.5 इंच की बड़ी डिस्प्ले पेश कीं।
2017 (आईफोन X): इसमें फेस आईडी और फुल-फ्रंट डिस्प्ले स्क्रीन देने के लिए, पुराने होम बटन को पूरी तरह से हटा दिया गया।
2020 (5G और मैगसेफ): इसमें 5G सुपर-फास्ट मोबाइल इंटरनेट और मैग्नेटिक वायरलेस चार्जिंग को जोड़ा गया।
2023 (USB-C चार्जिंग): पुराने चार्जर की जगह यूनिवर्सल USB-C पोर्ट दिए गए।
2024–2025 (AI और प्रो फीचर्स): इसमें 'एप्पल इंटेलिजेंस', एक ऐसा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जो यूजर के संदर्भ को समझता है और प्रोफेशनल-ग्रेड कैमरा फीचर्स पेश किए गए, जिनसे हाई-एंड वीडियो रिकॉर्ड किए जा सकते हैं।
2025 में असेंबल की गई 5.5 करोड़ यूनिट्स, एप्पल के कुल वैश्विक आईफोन उत्पादन का लगभग एक-चौथाई (25%) हिस्सा थीं। भविष्य में संभावनाएं है कि 2026 के अंत तक, दुनिया भर में बिकने वाले कुल आईफोन में से 28% का निर्माण भारत में होगा।
मुंबई (बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स): भारत में Apple का पहला आधिकारिक स्टोर, 'Apple BKC', 18 अप्रैल 2023 को बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स में खुला।
नई दिल्ली (साकेत): दूसरा स्टोर, 'Apple साकेत', 20 अप्रैल 2023 को साकेत में खुला।
बेंगलुरु (हेब्बल): तीसरा स्टोर 2 सितंबर 2025 को हेब्बल में खुला, जो दक्षिण भारत में Apple का पहला रिटेल स्टोर है।
पुणे (कोरेगांव पार्क): चौथा स्टोर 4 सितंबर 2025 को कोरेगांव पार्क में खुला।
नोएडा (DLF मॉल ऑफ इंडिया): पांचवां स्टोर 11 दिसंबर 2025 को DLF मॉल ऑफ इंडिया में खुला।
मुंबई (बोरीवली): Apple का छठा स्टोर मुंबई में दूसरी जगह 26 फरवरी 2026 को बोरीवली के स्काई सिटी मॉल में खुला।
'मेड इन इंडिया' iPhone स्टोर खोलने से पहले ही, एप्पल ने 2017 में भारत में आईफोन की असेंबलिंग शुरू कर दी थी। 2024 में, एप्पल ने भारत में लगभग 3.6 करोड़ (36 मिलियन) आईफोन असेंबल किए। 2025 में, यह आंकड़ा बढ़कर लगभग 5.5 करोड़ (55 मिलियन) आईफोन हो गया। यह आंकड़ा भारत में आईफोन असेंबलिंग में लगभग 53% की वार्षिक वृद्धि दर को दर्शाता है।
2025 तक, एप्पल ने भारत में लगभग 5.5 करोड़ (55 मिलियन) आईफोन असेंबल किए। जो दुनिया भर में बनने वाले कुल आईफोन का लगभग 25% (एक-चौथाई) हिस्सा है। 2026 के अंत तक, दुनिया भर में बिकने वाले कुल आईफोन में से लगभग 28% के भारत में बनने का अनुमान है।
भारत में एक सख्त बिजनेस कानून था। अगर कोई विदेशी कंपनी भारत में अपने स्टोर खोलना चाहती थी और बिजनेस में 51% से ज्यादा हिस्सेदारी रखना चाहती थी, तो उसे अपने कुल सामान का कम से कम 30% हिस्सा भारत से ही खरीदना जरूरी था। चूंकि Apple (iPhone) अपने प्रोडक्ट्स एक जटिल ग्लोबल सप्लाई चेन के जरिए बनाता था, इसलिए उस समय उसके लिए इस 30% की शर्त को पूरा करना आसान नहीं था।
इन विनियामक प्रतिबंधों के कारण, 1998 में भारतीय बाजार में प्रवेश करने के बाद भी Apple अपने खुद के आधिकारिक रिटेल स्टोर नहीं खोल सका। इसके बजाय, उसे अपने उत्पादों की बिक्री के लिए पूरी तरह से थर्ड-पार्टी अधिकृत विक्रेताओं (रिसेलर्स) और रिटेल भागीदारों पर निर्भर रहना पड़ा।
जनवरी 2018 में, भारत सरकार ने विदेशी निवेश को आसान बनाने के लिए इन नियमों में बदलाव किया और यह अनुमति दी कि भारत से की गई ग्लोबल खरीदारी को भी 'लोकल सोर्सिंग' में गिना जा सकता है। हालांकि रास्ता साफ हो गया था, लेकिन COVID-19 महामारी की वजह से Apple के स्टोर खोलने की योजना में कुछ और सालों की देरी हो गई।