अन्वेषा मिशन 
टेक्नॉलजी

आखिर क्या हुआ अन्वेषा मिशन के साथ, कहां गया सैटेलाइट ले जाने वाला रॉकेट? सभी सवालों के जवाब एक क्लिक में

PSLV-C62 Launch: अन्वेषा सैटेलाइट ऑर्बिट में तैनात नहीं हो सका है। इसरो चीफ ने बयान जारी कर बताया तीसरे स्टेज में दिक्कत आई और दिशा में परिवर्तन हो गया। डेटा एनालिसिस किया जा रहा है।

अर्पित शुक्ला

Satellite Anvesha: ISRO के साल के पहले अंतरिक्ष मिशन से एक चिंताजनक खबर सामने आई है। सोमवार सुबह सैटेलाइट अन्वेषा को लेकर उड़ा PSLV C-62 तीसरे चरण के बाद अपना रास्ता भटक गया, जिसके बाद रॉकेट से डेटा मिलना बंद हो गया। अंतरिक्ष में भारत की ‘तीसरी आंख’ कहे जा रहे अन्वेषा के साथ आखिर क्या हुआ, इस पर सवाल उठ रहे हैं। अगर यह मिशन असफल होता है, तो इसका असर गगनयान और चंद्रयान जैसे बड़े मिशनों पर भी पड़ सकता है, क्योंकि ये दोनों ही तीसरे चरण की परफॉर्मेंस पर निर्भर करते हैं। ISRO इस बारे में क्या कह रहा है और यह भारत के स्पेस प्रोग्राम के लिए कितना बड़ा झटका है, आइए समझते हैं।

आखिर क्या हुआ अन्वेषा मिशन के साथ?

ISRO के भरोसेमंद रॉकेट PSLV ने सोमवार को श्रीहरिकोटा के प्रक्षेपण केंद्र से घरेलू और विदेशी ग्राहकों के 14 कमर्शियल सैटेलाइट्स के साथ अन्वेषा को लेकर उड़ान भरी थी। यह PSLV की 64वीं उड़ान थी। चार चरणों वाले PSLV C-62 ने उड़ान तो भरी, लेकिन तय कक्षा तक नहीं पहुंच सका। ISRO ने फिलहाल यही बताया है कि तीसरे चरण के अंत में तकनीकी समस्या आई।

तीसरे चरण में क्या गड़बड़ी आई?

ISRO के अनुसार, लिक्विड इंजन वाले तीसरे स्टेज के अंतिम हिस्से में खराबी आई, जिससे रॉकेट अपने निर्धारित मार्ग से भटक गया।

मिशन को लेकर ISRO का क्या कहना है?

ISRO ने अभी इस मिशन को न तो पूरी तरह सफल बताया है और न ही असफल। रॉकेट से मिले डेटा का विस्तृत विश्लेषण किया जा रहा है।

तीसरे चरण की दिक्कत क्यों बढ़ा रही है चिंता?

2025 में भी PSLV का एक मिशन असफल रहा था, जिसमें तीसरे चरण में ही समस्या आई थी। इस बार भी अन्वेषा मिशन में तीसरे स्टेज के बाद रॉकेट का रास्ता भटकना चिंता का विषय बन गया है।

इसका क्या मतलब निकाला जाए?

आमतौर पर अगर तीसरे चरण में गड़बड़ी आती है और रॉकेट डेविएट करता है, तो सैटेलाइट को उसकी तय कक्षा में स्थापित करना मुश्किल हो जाता है। हालांकि, अंतिम निष्कर्ष ISRO की जांच के बाद ही सामने आएगा।

यह कितना बड़ा झटका है?

इस मिशन में अन्वेषा के अलावा कई छोटे सैटेलाइट भी शामिल थे, जिनमें ध्रुवा सैटेलाइट भी था। अगर मिशन को असफल घोषित किया जाता है, तो यह PSLV के लिए लगातार दूसरा बड़ा झटका होगा। अन्वेषा DRDO द्वारा विकसित एक बेहद अहम सैटेलाइट है।

PSLV क्या है?

PSLV भारत का ‘वर्कहॉर्स’ रॉकेट माना जाता है। यह इसकी 64वीं उड़ान थी और अब तक सिर्फ 4 मिशन असफल रहे हैं। अगर मौजूदा मिशन फेल घोषित होता है, तो यह PSLV की पांचवीं असफलता होगी।

गगनयान और चंद्रयान पर क्या असर पड़ेगा?

अगर यह मिशन असफल रहता है, तो गगनयान और चंद्रयान कार्यक्रमों के लिए भी चिंता बढ़ सकती है, क्योंकि इन मिशनों में भी तीसरे चरण की भूमिका बेहद अहम है।

मिशन में आई गड़बड़ी

44.4 मीटर लंबा, चार चरणों वाला PSLV C-62 रॉकेट सुबह 10:18 बजे तय समय पर श्रीहरिकोटा से रवाना हुआ था। करीब 17 मिनट बाद उपग्रहों को लगभग 511 किलोमीटर ऊंचाई पर सूर्य तुल्यकालिक कक्षा में स्थापित किया जाना था, लेकिन तीसरे चरण के दौरान रॉकेट रास्ता भटक गया। मिशन कंट्रोल रूम में इस दौरान वैज्ञानिकों के चेहरों पर तनाव साफ दिखा।

ISRO प्रमुख नारायणन ने कहा, “PSLV एक चार चरणों वाला वाहन है, जिसमें दो ठोस और दो तरल चरण हैं। तीसरे चरण के अंत तक वाहन का प्रदर्शन सामान्य था, लेकिन उसके बाद गड़बड़ी और उड़ान पथ में विचलन देखा गया। हम डेटा का विश्लेषण कर रहे हैं और जल्द जानकारी साझा करेंगे।”

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