June New Rules In India: जून 2026 की शुरुआत भारत के आम लोगों के लिए कई बड़े बदलाव लाई है। जिसके बाद अब नए नियमों का असर आपकी रोजमर्रा की जिंदगी, डिजिटल पेमेंट, टैक्स प्लानिंग, वाहन खरीदने और यहां तक कि सोलर एनर्जी से जुड़े फैसलों पर भी होगी। ऐसे में अगर आप अभी तक इन बदलावों के बारे में नहीं जानते है तो आगे चलकर यह आपकी जेब पर भारी असर भी डाल सकते है। आइए जानते हैं 1 जून 2026 से लागू हुए उन 5 बड़े बदलावों के बारे में जो आज के समय में देश में चर्चा का विषय बने हुए है।
भारत में हर जगह डिजिटल पेमेंट का धमाका देखने को मिल रहा है और एक सबसे बड़ा अपडेट ऐसे ही लोगों के लिए आया है जो UPI का काफी इस्तेमाल करते है। जानकारी में बताया जा रहा है कि अब जब भी आप किसी को UPI के जरिए पैसे भेजेंगे तो स्क्रीन पर सामने वाले व्यक्ति का बैंक में रजिस्टर्ड वास्तविक नाम देखने के लिए मिलेगा। इस नए बदलाव को नेशनल पेमेंट कॉरपोरेशन (NPCI) ने किया है ताकि आने वाले समय में ऑनलाइन धोखाधड़ी और गलत अकाउंट में पैसे ट्रांसफर होने की घटनाओं को कम किया जा सके। वहीं अब यूजर्स पैसे भेजने से पहले लाभार्थी की सही पहचान कर पाएगे।
बता दें कि इस वित्त वर्ष 2026-27 के लिए एडवांस टैक्स भरने वाले करदाताओं में 15 जून बेहद महत्वपूर्ण तारीख रहेगी। जिसमें बताया जा रहा है कि जिन भी लोगों की अनुमानित टैक्स देनदारी 10,000 रुपये से ज्यादा होगी उन्हें कुल एडवांस टैक्स का 15 प्रतिशत हिस्सा जमा करना होगा। वहीं विशेषज्ञों बताते है कि इस समय पर भुगतान नहीं करने पर ब्याज का अतिरिक्त बोझ उठाना पड़ सकता है।
इस साल आप भी नई कार खरीदने की योजना बना रहे हैं तो अब आपको ज्यादा खर्च करना पड़ सकता है। बता दें कि मारुति सुजुकी ने अपने कई मॉडल्स की कीमतों में 30,000 रुपये तक की बढ़ोतरी कर दी है। इसके अलावा हुंडई मोटर इंडिया ने भी अपने पोर्टफोलियो की कीमतें 12,800 रुपये तक बढ़ा दी हैं। जिसका कारण दोनों कंपनियों ने बढ़ती उत्पादन लागत, कच्चे माल की कीमत और ऑपरेशनल खर्च बताया है।
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नए बदलावों में 1 जून 2026 से सरकारी योजनाओं, सब्सिडी आधारित सोलर प्रोजेक्ट्स और नेट-मीटरिंग सिस्टम में केवल उन्हीं सोलर पैनल और सोलर सेल का इस्तेमाल किया जा सकेगा जो सरकार की स्वीकृत ALMM सूची में शामिल होगे। वहीं देखा यह भी जा रहा है कि हर महीने की तरह पेट्रोल, डीजल और LPG की कीमतों की समीक्षा भी की जाएगी। जो ईंधन की कीमतों में बदलाव की संभावना को देखते हुए किया जा रहा है।