- तीन माह में चार पुलिसकर्मियों पर निलंबन की गाज
- तहसील में चल रहा अवैध कारोबार
- चोरी की घटनाओं में हुआ इजाफा
दिंडोरी: 'सद्राक्षणाय खालनिग्रहणाय' महाराष्ट्र पुलिस के इस नारे का मतलब है, सज्जनों की सुरक्षा दुष्टों पर अंकुश। यदि किसी घटना में जनता के साथ अन्याय होता है तो निष्पक्ष तरीके से वो न्याय की उम्मीद करती है। लेकिन दिंडोरी (Dindori) पुलिस (Police) जनता के भरोसे को कायम रखने में खरी नहीं उतरी है। तीन महीने (3 Months) में चार पुलिसकर्मियों (4 Police Personnel) का निलंबन (Suspend) कुछ इसी ओर इशारा कर रहा है।
तहसील में चल रहा अवैध कारोबार
तहसील में कई ऐसी जगहें हैं जहां अवैध कारोबार किया जा रहा है। नासिक अपराध शाखा पुलिस ने तहसील में विभिन्न स्थानों पर छापेमारी की. लेकिन सवाल यह उठता है कि दिंडोरी पुलिस कार्रवाई क्यों नहीं कर रही है। ऐसे में अब आम नागरिकों के मन में दिंडोरी पुलिस को लेकर एक अलग ही भावना पैदा हो गई है।
चोरी की घटनाओं में हुआ इजाफा
तहसील में मोटरसाइकिल चोरी की कई घटनाएं हो रही हैं। चोरी का मामला दर्ज कराने पुलिस के पास जाने वाले नागरिकों को कई दिनों तक इंतजार करना पड़ता है। उसके बाद उन्हें किसी प्रकार वहां से भगा दिया जाता है। शिकायत दर्ज भी की गई तो जांच की कार्रवाई नहीं होती है।
पेठ-नासिक राजमार्ग पर गुजरात से गुटखा की तस्करी में संबंध होने के कारण अगस्त माह में पुलिस अधिकारी किशोर सानप को वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने निलंबित कर दिया है।
नाशिक बलसाड और गुजरात की ओर जाने वाले राजमार्ग पर चाचड़गांव टोल बूथ तोड़फोड़ मामले में टोल बूथ प्रशासन द्वारा डील करने का आरोप लगाते हुए पुलिस अधिकारी बालकृष्ण पजाई को अगस्त माह में वरिष्ठ अधिकारियों ने निलंबित कर दिया था।
घटना 3
पिंपलवणे में दुष्कर्म मामले में पुलिस हिरासत में बंद आरोपी पुलिस को चकमा देकर भाग निकला। उसकी आत्महत्या के बाद पुलिस निरीक्षक पांडुरंग कावले, नायक सुदाम धूमाल पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए उन्हें 5 अक्टूबर को निलंबित कर दिया गया है।