पुलेला गोपीचंद (सौ.सोशल मीडिया) 
खेल

Pullela Gopichand: घर गिरवी रखकर की बैडमिंटन अकादमी की शुरुआत, आज हैं कई दिग्गज खिलाड़ियों के गुरु

भारत में बैडमिंटन का नाम जब भी लिया जाता है तो पुलेला गोपीचंद का नाम सबसे पहले आता है। भारत में इस खेल को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग पहचान दिलाने वाले दिग्गज खिलाड़ी आज अपना 50वां जन्मदिन मना रहे हैं।

प्रीति शर्मा

दिल्ली: भारत में बैडमिंटन का नाम जब भी लिया जाता है तो पुलेला गोपीचंद का नाम सबसे पहले आता है। भारत में इस खेल को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग पहचान दिलाने वाले दिग्गज खिलाड़ी आज अपना 50वां जन्मदिन मना रहे हैं। ऑल इंग्लैंड बैडमिंटन चैंपियनशिप जीतने वाले भारत के दूसरे खिलाड़ी पुलेला गोपीचंद खिलाड़ी से ज्यादा कोच के रूप में फेमस हैं। उन्हें बैडमिंटन का द्रोणाचार्य भी कहा जाता है। उन्होंने भारत के कई दिग्गज खिलाड़ियों को स्टार बनाया है।

बचपन में था क्रिकेट का शौक

पुलेला गोपीचंद का जन्म 16 नवंबर 1973 में आंध्र प्रदेश में हुआ था। वह बचपन से ही क्रिकेटर बनना चाहते थे। स्कूल के दिनों से ही उन्हें क्रिकेट का काफी शौक था। लेकिन उनके भाई ने उन्हें बैडमिंटन के लिए प्रेरित किया। क्रिकेट के अलावा वह बैडमिंटन में भी अच्छे थे। जिसकी वजह से उनके भाई चाहते थे कि वह अपनी एक अलग पहचान बनाएं। अपने बड़े भाई की बात मानते हुए उन्होंने बैडमिंटन में ही मेहनत और प्रैक्टिस करनी शुरू कर दी। जिसके बाद वह प्रकाश पादुकोण के बीपीएल प्रकाश पादुकोण अकादमी में भी शामिल हुए।

गोपीचंद एक मिडिल क्लास परिवार से ताल्लुक रखते थे। उनके परिवार द्वारा इकट्ठा किए हुए पैसों से वह बैडमिंटन खेलते थे ताकि वह इस खेल में अपना करियर बना सकें। हालांकि उनके परिवार के लिए पैसों का इंतजाम करना इतना आसान नहीं था। उन्होंने उधार के पैसों से बैडमिंटन खरीदा और खेलना शुरू किया। उनके पास कई बार स्टेडियम तक जाने के पैसे नहीं होते थे लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी।

मिल चुके हैं कई सम्मान

गोपीचंद ने साल 1996 से लेकर 2000 तक लगातार पांच बार नेशनल चैंपियनशिप जीती है। वहीं, 2001 में उन्होंने ऑल इंग्लैंड बैडमिंटन चैंपियनशिप जीती और ऐसा करने वाले दूसरे खिलाड़ी बन गए। बता दें कि इससे पहले प्रकाश पादुकोण ने 1980 में यह खिताब अपने नाम किया था। गोपीचंद को अर्जुन अवॉर्ड, राजीव गांधी खेल रत्न अवॉर्ड, पद्मश्री, पद्मभूषम जैसे सम्मान भी प्राप्त हैं। उन्होंने साल 2009 में द्रोणाचार्य अवार्ड भी हासिल किया।

घर गिरवी रखकर की अकादमी की शुरुआत

गोपीचंद ने आने वाली पीढ़ी के लिए बैडमिंटन अकादमी खोलने का फैसला लिया। लेकिन इसके लिए उनके पास इतने पैसे नहीं थे। जिसकी वजह से उन्होंने 2008 में अपना घर गिरवी रखने का फैसला किया और बैडमिंटन अकादमी की शुरूआत की। इस अकादमी ने देश को कई सितारे दिए। साइना नेहवाल, पीवी सिंधु से लेकर कई शानदार खिलाड़ी उनकी अकादमी का हिस्सा बने। इनमें किदांबी श्रीकांत, पी कश्यप, गुरुसाई दत्त, तरुण कोना जैसे खिलाड़ियों का नाम भी शामिल है। उन्होंने अपनी एक किताब भी लिखी है जिसका नाम Shuttlers Flick है।

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