नरेंद्र बेरवाल  (सोर्स - सोशल मीडिया)
खेल

अर्जुन अवॉर्ड के लिए चुने गए नरेंद्र बेरवाल, 16 साल की मेहनत ने दिलाया बड़ा सम्मान

Narendra Berwal Award: 16 साल की कड़ी मेहनत रंग लाई! हांसी के मुक्केबाज नरेंद्र बेरवाल को अर्जुन अवॉर्ड मिला। CWG में रजत पदक जीतकर देश का नाम रोशन किया।

सृष्टि मौर्य

Narendra Berwal Selected For Arjuna Award: हांसी जिले के सोरखी गांव निवासी अंतरराष्ट्रीय मुक्केबाज नरेंद्र बेरवाल का नाम अर्जुन अवॉर्ड के लिए चुना गया है। इस खबर के बाद उनके परिवार, गांव और पूरे हांसी जिले में खुशी का माहौल है। परिजनों, ग्रामीणों और खेल प्रेमियों ने मिठाई बांटकर इस उपलब्धि का जश्न मनाया।

अवॉर्ड के लिए चुने जाने पर नरेंद्र ने खुशी जताते हुए कहा कि वह आगे भी देश और प्रदेश के लिए पदक जीतकर नाम रोशन करने की कोशिश करेंगे। उन्होंने कहा कि देश के लिए खेलना उनके लिए गर्व की बात है और यह सम्मान उन्हें तिरंगे की शान के लिए और ज्यादा मेहनत करने की प्रेरणा देगा।

16 साल की मेहनत का मिला इनाम

नरेंद्र बेरवाल ने साल 2009 में दूध, दही और हलवे जैसे पौष्टिक आहार के साथ बॉक्सिंग शुरू की थी। मैट्रिक के बाद उन्होंने पूरी तरह मुक्केबाजी पर ध्यान देना शुरू कर दिया। भिवानी बॉक्सिंग एकेडमी में कोच देवराज के मार्गदर्शन में उन्होंने लगातार मेहनत और अभ्यास किया।

साल 2013 में नरेंद्र भारतीय सेना में भर्ती हुए। इसके बाद उन्होंने कई अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारत का प्रतिनिधित्व किया। उन्होंने 2012 फिलीपींस यूथ वर्ल्ड कप में रजत, 2013 आर्मेनिया यूथ एशियन चैंपियनशिप में रजत और 2015 मिलिट्री वर्ल्ड गेम्स में भी रजत पदक जीता।

इसके बाद 2023 एशियन गेम्स में उन्होंने कांस्य पदक जीता और करीब छह महीने बाद यूरोपियन कप में स्वर्ण पदक अपने नाम किया। यूथ वर्ल्ड चैंपियनशिप में रजत, यूथ एशियन चैंपियनशिप में कांस्य और 2025 नेशनल गेम्स में स्वर्ण पदक भी उनके शानदार करियर का हिस्सा रहे हैं।

कॉमनवेल्थ गेम्स में जीता रजत

ग्लास्गो कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में नरेंद्र ने 90 किलोग्राम से अधिक भार वर्ग में शानदार प्रदर्शन किया। उन्होंने क्वार्टर फाइनल जीतकर पदक पक्का किया और सेमीफाइनल जीतकर फाइनल में जगह बनाई। खिताबी मुकाबले में उन्हें इंग्लैंड के डेमर थॉमस के खिलाफ 0-5 से हार मिली, लेकिन उन्होंने रजत पदक अपने नाम किया।

रजत पदक जीतने के बाद नरेंद्र ने कहा था कि उनका सफर अभी खत्म नहीं हुआ है। उनका अगला लक्ष्य एशियन गेम्स और ओलंपिक में भारत के लिए स्वर्ण पदक जीतना है। उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय 16 वर्षों की कड़ी मेहनत, अनुशासन और लगातार अभ्यास को दिया।

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