मीराबाई चानू (Image- IANS) 
खेल

खाली पेट, ट्रकों से पहुंचती थीं ट्रेनिंग...आज हैं भारत की गोल्डन क्वीन! मीराबाई चानू की प्रेरणादायक कहानी

Mirabai Chanu: मीराबाई चानू ने ग्लास्गो कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में लगातार तीसरा स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रचा। गरीबी, संघर्ष और सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने मेहनत से भारत का नाम रोशन किया।

अर्पित शुक्ला

Mirabai Chanu Story: अगर सीने में जुनून हो और सपनों को पूरा करने का जज्बा हो, तो मुश्किल से मुश्किल हालात भी मंजिल का रास्ता नहीं रोक सकते। भारत की स्टार वेटलिफ्टर मीराबाई चानू इसकी सबसे बड़ी मिसाल हैं। ग्लास्गो कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में उन्होंने इतिहास रचते हुए लगातार तीसरी बार स्वर्ण पदक जीतकर देश का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया।

2018 के गोल्ड कोस्ट, 2022 के बर्मिंघम और अब 2026 के ग्लास्गो में गोल्ड जीतकर मीराबाई ने कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्डन हैट्रिक पूरी कर ली। उनका सफर आज के युवाओं के लिए इस बात का संदेश है कि हालात चाहे कितने भी कठिन क्यों न हों, अगर हौसला मजबूत हो तो सफलता जरूर मिलती है।

गरीबी और संघर्ष से शुरू हुआ सफर

साल 1994 में मणिपुर के इम्फाल ईस्ट जिले के छोटे से गांव नोंगपोक काकचिंग में जन्मीं मीराबाई छह भाई-बहनों में सबसे छोटी हैं। उनके पिता लोक निर्माण विभाग में निर्माण श्रमिक थे, जबकि उनकी मां गांव में चाय और समोसे की छोटी-सी दुकान चलाकर परिवार का गुजारा करती थीं। आठ सदस्यों के परिवार में आर्थिक तंगी इतनी थी कि कई बार दो वक्त का भोजन जुटाना भी मुश्किल हो जाता था। इसके बावजूद मीराबाई ने अपने सपनों से कभी समझौता नहीं किया।

कई बार खाली पेट की ट्रेनिंग

वेटलिफ्टिंग जैसे खेल में पौष्टिक भोजन और प्रोटीन की जरूरत होती है, लेकिन आर्थिक तंगी के कारण कई बार मीराबाई के पास पर्याप्त भोजन तक नहीं होता था। बताया जाता है कि कई दिनों तक उन्होंने सिर्फ पानी पीकर अभ्यास किया, लेकिन कभी हार नहीं मानी।

ट्रकों से पहुंचीं ट्रेनिंग सेंटर

जब अभ्यास के लिए लोहे के बारबेल उपलब्ध नहीं थे, तब उन्होंने बांस के तनों से ही बारबेल बनाकर अभ्यास शुरू किया। उनके गांव से इम्फाल के खुमान लम्पक स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स की दूरी लगभग 20-40 किलोमीटर थी। बस का किराया नहीं होने पर वे अक्सर रेत ढोने वाले ट्रकों से लिफ्ट लेकर ट्रेनिंग के लिए पहुंचती थीं। टोक्यो ओलंपिक में पदक जीतने के बाद उन्होंने उन ट्रक ड्राइवरों को सम्मानित भी किया, जिन्होंने संघर्ष के दिनों में उनकी मदद की थी।

उपलब्धियों की लंबी सूची

  • कॉमनवेल्थ गेम्स 2018 (गोल्ड कोस्ट) – स्वर्ण पदक
  • कॉमनवेल्थ गेम्स 2022 (बर्मिंघम) – स्वर्ण पदक
  • कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 (ग्लास्गो) – स्वर्ण पदक
  • ओलंपिक रजत पदक विजेता
  • मेजर ध्यानचंद खेल रत्न पुरस्कार
  • पद्म श्री सम्मान
  • मणिपुर पुलिस में एडिशनल एसपी (स्पोर्ट्स) के पद पर कार्यरत

मीराबाई चानू की कहानी सिर्फ पदक जीतने की कहानी नहीं है, बल्कि यह विश्वास, संघर्ष और निरंतर मेहनत की कहानी है। सीमित संसाधनों से शुरुआत कर विश्व मंच तक पहुंचने वाली मीराबाई ने साबित किया है कि सफलता किसी सुविधा की नहीं, बल्कि दृढ़ संकल्प और निरंतर प्रयास की मोहताज होती है। उनकी यात्रा आज लाखों युवाओं को यह संदेश देती है कि परिस्थितियां चाहे जैसी भी हों, यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत ईमानदार हो, तो इतिहास रचा जा सकता है।

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