20 अक्टूबर को है मुल्तान के सुल्तान वीरेंद्र सहवाग का जन्मदिन
टेस्ट में आज भी नंबर 1 पर बैटिंग का ऐतिहासिक स्ट्राइक रेट
गांगुली की सलाह दरकिनार कर ठोके थे लगातार 4 चौके
Virender Sehwag Birthday: भारतीय क्रिकेट इतिहास के सबसे विस्फोटक और निडर सलामी बल्लेबाजों में शुमार वीरेंद्र सहवाग 20 अक्टूबर 2026 को अपना 48वां जन्मदिन मनाने वाले हैं। 20 अक्टूबर 1978 को दिल्ली के नजफगढ़ में जन्मे सहवाग ने अपनी आक्रामक बल्लेबाजी से क्रिकेट की दुनिया में एक नया मुकाम बनाया। क्रिकेट पंडित उनके शुरुआती दिनों में 'खराब फुटवर्क' का हवाला देकर उन्हें टेस्ट प्रारूप के लिए अनुपयुक्त मानते थे, लेकिन सहवाग ने अपनी काबिलियत के बल पर टेस्ट क्रिकेट का पूरा इतिहास और भूगोल ही बदलकर रख दिया।
वीरेंद्र सहवाग दुनिया के एकमात्र ऐसे महान बल्लेबाज हैं जिनके नाम टेस्ट मैच में एक अद्भुत रिकॉर्ड दर्ज है। उन्होंने एक ओर जहां दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ 2008 में सबसे तेज 278 गेंदों पर 319 रनों की विशाल तिहरी शतकीय पारी खेली, वहीं उसी साल 2008 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ दिल्ली टेस्ट में गेंदबाजी करते हुए एक पारी में 5 विकेट लेने का बड़ा कारनामा भी अंजाम दिया। टेस्ट क्रिकेट में किसी बल्लेबाज द्वारा तिहरा शतक जड़ना और उसी प्रारूप में 5 विकेट हॉल लेना अपने आप में अद्वितीय है।
सहवाग की बेबाकी से जुड़ा एक बेहद दिलचस्प किस्सा साल 2002 के नैटवेस्ट ट्रॉफी के ऐतिहासिक फाइनल मैच का है। लॉर्ड्स के मैदान पर इंग्लैंड के खिलाफ 326 रनों के पहाड़ जैसे लक्ष्य का पीछा करने उतरी भारतीय टीम को कप्तान सौरव गांगुली और सहवाग ने तूफानी शुरुआत दिलाई। महज 7 ओवरों में भारत का स्कोर 70 रन हो चुका था। तभी गांगुली ने सहवाग के पास जाकर कहा कि अच्छी शुरुआत मिल चुकी है, अब सिंगल-डबल लेकर खेलो और विकेट मत गंवाओ।
सहवाग ने कप्तान गांगुली की बात सुनकर हामी तो भर दी, लेकिन अगली ही गेंद पर बाउंड्री जड़ दी। गांगुली ने दोबारा टोकते हुए रिस्क न लेने की हिदायत दी, पर सहवाग तो अपने ही मूड में थे। उन्होंने उस ओवर में लगातार 4 चौके जड़ दिए। हद तो तब हो गई जब गांगुली की मनाही के बावजूद अगली गेंद पर सहवाग ने रिवर्स स्वीप खेलने का दुस्साहस कर दिखाया। गेंद बल्ले से मिस हुई और वे बाल-बाल बचे। यह देखकर कप्तान गांगुली क्रीज पर ही सिर पकड़कर बैठ गए।
उस ओवर की आखिरी गेंद पर एक रन लेने के बाद सहवाग मुस्कुराते हुए सौरव गांगुली के पास पहुंचे और बोले "दादा, देखो सिंगल ले लिया!" सहवाग ने उस मैच में 49 गेंदों पर 45 रनों की तेज पारी खेलकर भारत की ऐतिहासिक जीत की मजबूत नींव रखी थी। सौरव गांगुली ने बाद में खुद इस वाकये को याद करते हुए स्वीकार किया था कि इस घटना ने उन्हें कप्तानी का बहुत बड़ा सबक सिखाया। उन्होंने समझा कि हर खिलाड़ी अलग होता है और सहवाग जैसे मैच-विजेता खिलाड़ी को कभी एक सांचे में ढालने की कोशिश करने के बजाय खुलकर खेलने की आजादी देनी चाहिए।
वीरेंद्र सहवाग ने टेस्ट क्रिकेट से 'फौलादी डिफेंस' और धीमी बल्लेबाजी की पुरानी सोच को पूरी तरह उखाड़ फेंका। कम से कम 2,000 रन बनाने वाले दुनिया के महान सलामी बल्लेबाजों की तुलना में सहवाग का स्ट्राइक रेट 82.23 रहा, जो कि ऐतिहासिक रूप से सबसे अधिक है। जहां अन्य ओपनर नई गेंद की चमक और स्विंग खत्म करने के लिए गेंदों को छोड़ते थे, वहीं सहवाग पहली ही गेंद से गेंदबाजों पर प्रहार कर दबाव बना देते थे। उन्होंने दो तिहरे शतक के साथ-साथ एक बार 293 रनों की पारी भी इसी तूफानी अंदाज से खेली थी।