मंसूर अली खान पटौदी (फोटो-सोशल मीडिया) 
क्रिकेट

वो खिलाड़ी जिसने एक आंख से 21 साल की उम्र में की थी कप्तानी, जानें कैसे बने थे भारत के कप्तान

Mansoor Ali Khan Pataudi: भारतीय टीम के पूर्व दिग्गज कप्तान मंसूर अली खान पटौदी का भारत के बेहतरीन कप्तानों में शुमार हैं। 5 जनवरी 1941 में उनका जन्म हुआ था। आज उनका 85वां वर्षगांठ मनाया जा रहा है।

उज्जवल सिन्हा

Mansoor Ali Khan Pataudi Birth Anniversary: भारतीय टीम के पूर्व दिग्गज कप्तान मंसूर अली खान पटौदी का भारत के बेहतरीन कप्तानों में शुमार हैं। 5 जनवरी 1941 में उनका जन्म हुआ था। आज 5 जनवरी 2026 को उनका 85वां वर्षगांठ मनाया जा रहा है। उन्होंने कई रिकॉर्ड हासिल किए। उन्हें टाइगर पटौदी और नवाब पटौदी जूनियर के नाम से भी जाना जाता है।

भोपाल के शाही खानदान में जन्मे पटौदी ने महज 21 साल की उम्र में टीम इंडिया की कमान संभाली। उनकी आक्रामक सोच, फिटनेस पर जोर और नेतृत्व ने भारतीय क्रिकेट को नई पहचान दिलाई। अपने पिता इफ्तिखार अली खान पटौदी के नक्शेकदम पर चलते हुए मंसूर अली खान ने न सिर्फ भारत की ओर से क्रिकेट खेला, बल्कि कप्तानी भी की।

कार दुर्घटना में एक आंख हुई खराब

16 साल की उम्र में मंसूर अली खान ने फर्स्ट क्लास क्रिकेट में ससेक्स के लिए पदार्पण किया। ऑक्सफोर्ड के लिए खेलने वाले पटौदी पहले भारतीय क्रिकेटर थे। हालांकि, 1 जुलाई 1961 को एक कार दुर्घटना में उनकी विंडस्क्रीन टूटी और कांच का एक टुकड़ा उनकी दाहिनी आंख में घुस गया, जिससे उनकी आंख स्थायी रूप से क्षतिग्रस्त हो गई। इसके बावजूद, उन्होंने केवल छह महीने बाद दिसंबर 1961 में दिल्ली में इंग्लैंड के खिलाफ टेस्ट क्रिकेट में पदार्पण किया। इस दुर्घटना के बाद उनके क्रिकेट करियर पर हमेशा खतरा मंडरा रहा, क्योंकि उन्हें दो इमेज दिखाई देने लगीं। फिर भी, पटौदी ने जल्दी ही नेट प्रैक्टिस पर लौटकर बेहतरीन प्रदर्शन किया और भारतीय टीम के कप्तान भी बने।

1962 में बने थे भारतीय टीम के कप्तान

1962 में, जब भारतीय कप्तान नारी कॉन्ट्रैक्टर वेस्टइंडीज दौरे के दौरान चोटिल हो गए, तो उपकप्तान पटौदी को कप्तानी मिली। कॉन्ट्रैक्टर के सिर में चार्ली ग्रिफिथ की गेंद लगी और वे पिच पर गिर गए। इसके बाद पटौदी को टीम की अगुवाई का मौका मिला, जिससे उनका नेतृत्व कौशल सामने आया।

टाइगर पटौदी दाहिने हाथ के बल्लेबाज और मध्यम गति के तेज गेंदबाज थे। उन्हें उस समय दुनिया के बेहतरीन फील्डर में भी गिना जाता था। उन्होंने 46 टेस्ट मैच खेले, जिनमें से 40 में कप्तान (1962-1975) रहे। उनकी कप्तानी में भारत ने 9 मैच जीते, 12 ड्रॉ और 19 में हार मिली। भले ही उनकी कप्तानी का रिकॉर्ड शानदार न था, लेकिन उन्होंने टीम में जीतने का जुनून और आत्मविश्वास भर दिया। 22 सितंबर 2011 को लंबे समय तक बीमारी के बाद टाइगर पटौदी ने 70 वर्ष की उम्र में दुनिया को अलविदा कह दिया।

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