लाला अमरनाथ  (सोर्स - सोशल मीडिया)
क्रिकेट

Lala Amarnath Jayanti: भारत के पहले टेस्ट शतकवीर और आजाद भारत के पहले कप्तान की कहानी

Lala Amarnath Birth Anniversary: लाला अमरनाथ भारत के पहले टेस्ट शतकवीर और आजाद भारत के पहले कप्तान थे। 11 सितंबर को जन्में इस महान क्रिकेटर की जानिए पूरी कहानी।

सृष्टि मौर्य

Lala Amarnath Biography: भारतीय क्रिकेट में कई ऐसे खिलाड़ी रहे हैं जिन्होंने मैदान पर अपने प्रदर्शन के साथ-साथ खेल को नई पहचान भी दी। लाला अमरनाथ ऐसे ही क्रिकेटर थे। उन्होंने भारत के लिए कई बड़ी उपलब्धियां हासिल कीं और भारतीय क्रिकेट पर लंबे समय तक अपना प्रभाव बनाए रखा।

लाला अमरनाथ का जन्म 11 सितंबर को पंजाब के कपूरथला में हुआ था। वह भारत के पहले टेस्ट शतक लगाने वाले बल्लेबाज थे। उन्होंने 1933 में इंग्लैंड के खिलाफ अपने टेस्ट डेब्यू मैच में ही शतक लगाया था। यह मुकाबला मुंबई के जिमखाना ग्राउंड पर खेला गया था। इससे एक साल पहले ही भारत ने अपना पहला टेस्ट मैच खेला था।

क्रिकेट को लोकप्रिय बनाया

उस समय क्रिकेट पर अमीर और बड़े परिवारों का दबदबा था। साधारण परिवार से आने वाले लाला अमरनाथ ने इस व्यवस्था के खिलाफ अपनी आवाज उठाई। उन्होंने आम लोगों के बीच क्रिकेट को लोकप्रिय बनाने में भी अहम भूमिका निभाई।

लाला अमरनाथ ने ऑस्ट्रेलिया के महान बल्लेबाज डोनाल्ड ब्रैडमैन को पहली बार हिट विकेट आउट किया था। उन्होंने अपने टेस्ट करियर में 24 मैच खेले और 24.38 की औसत से रन बनाए। आंकड़े भले ही बहुत बड़े नहीं रहे, लेकिन भारतीय क्रिकेट पर उनका प्रभाव काफी बड़ा था।

लाला अमरनाथ

आजादी के बाद बने पहले कप्तान

आजाद भारत के बाद लाला अमरनाथ भारत के पहले कप्तान बने। उनकी कप्तानी में भारत ने 15 टेस्ट मैच खेले। इसी दौरान भारत ने 1952 में पाकिस्तान के खिलाफ अपनी पहली टेस्ट जीत दर्ज की। यह मुकाबला दिल्ली के फिरोजशाह कोटला मैदान पर खेला गया था।

1952 में ईडन गार्डन्स में पाकिस्तान के खिलाफ टेस्ट खेलने के बाद लाला अमरनाथ ने क्रिकेट से संन्यास ले लिया। हालांकि, इसके बाद भी भारतीय क्रिकेट में उनका योगदान जारी रहा। उन्होंने चयनकर्ता, टीम मैनेजर, कोच और प्रसारक के तौर पर काम किया।

चयन करने का अलग अंदाज

चयनकर्ता के तौर पर उनका क्रिकेट को समझने का तरीका काफी अलग था। 1959-60 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ कानपुर टेस्ट के लिए उन्होंने जसु पटेल को टीम में शामिल किया। उस समय पटेल का टीम में शामिल होना तय नहीं माना जा रहा था। लाला ने पिच को देखकर यह फैसला लिया और पटेल ने शानदार गेंदबाजी करते हुए ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ भारत को ऐतिहासिक जीत दिलाने में अहम भूमिका निभाई।

लाला अमरनाथ

सब्स्टीट्यूट खिलाड़ी को दिलाया अधिकार

1960 में ईरानी कप के शुरुआती मुकाबलों में भी लाला अमरनाथ के एक फैसले की काफी चर्चा हुई। दिल्ली के करनैल सिंह स्टेडियम में खेले गए मुकाबले में वह रेस्ट ऑफ इंडिया की टीम का हिस्सा थे।

चोट लगने के बाद उन्होंने 12वें खिलाड़ी प्रेम भाटिया को बल्लेबाजी के लिए भेजा। भाटिया ने पहली पारी में 22 और दूसरी पारी में 50 रन बनाए। बाद के वर्षों में क्रिकेट में सब्स्टीट्यूट खिलाड़ी से जुड़े नियमों को आधिकारिक रूप मिला। इस तरह लाला अमरनाथ की क्रिकेट समझ और उनके फैसलों की चर्चा लंबे समय तक होती रही।

लाला अमरनाथ और कपिल देव

बेटों ने भी क्रिकेट में दिया योगदान

लाला अमरनाथ के तीन बेटों में से दो ने भारतीय क्रिकेट खेला। उनके बेटे मोहिंदर अमरनाथ 1983 में विश्व कप जीतने वाली भारतीय टीम का हिस्सा थे। लाला अमरनाथ ने अपने मजबूत इरादे, क्रिकेट की गहरी समझ और कभी हार न मानने वाले रवैये से भारतीय क्रिकेट पर गहरी छाप छोड़ी। 5 अगस्त 2000 को उनका निधन हुआ, लेकिन भारतीय क्रिकेट में उनका योगदान आज भी याद किया जाता है।

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