Hardik Pandya Statement: टीम इंडिया के स्टार ऑलराउंडर हार्दिक पांड्या ने चोट से उबरने के बाद जिस तरह मैदान पर वापसी की, वह उनकी मजबूत मानसिकता का साफ सबूत है। हार्दिक का मानना है कि चोट से लौटने के लिए सिर्फ फिटनेस ही नहीं, बल्कि सकारात्मक सोच सबसे बड़ा हथियार होती है। एशिया कप 2025 के दौरान चोटिल होने के बाद हार्दिक ने खुद से वादा किया था कि वह पहले से ज्यादा मजबूत बनकर लौटेंगे।
दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ पहले टी-20 इंटरनेशनल मुकाबले में हार्दिक पांड्या ने शानदार ऑलराउंड प्रदर्शन किया। उन्होंने महज 28 गेंदों में नाबाद 59 रन की तूफानी पारी खेली और गेंदबाजी में भी 16 रन देकर एक विकेट झटका। हार्दिक की इस दमदार मौजूदगी की बदौलत भारत ने मैच को 101 रन से अपने नाम किया और सीरीज की शुरुआत जोरदार अंदाज में की।
बीसीसीआई टीवी को दिए इंटरव्यू में हार्दिक ने कहा कि चोटें सिर्फ शरीर को नहीं, बल्कि दिमाग को भी चुनौती देती हैं। ऐसे समय में आत्मविश्वास बनाए रखना सबसे मुश्किल होता है। उन्होंने बताया कि परिवार और करीबी लोगों का साथ उन्हें फिर से खुद पर भरोसा करने की ताकत देता है। हार्दिक के मुताबिक, अगर एक खिलाड़ी खुद पर भरोसा करना छोड़ दे, तो मैदान पर वापसी करना नामुमकिन हो जाता है।
हार्दिक पांड्या का साफ मानना है कि आत्मविश्वास भीतर से आता है। वह इस बात की ज्यादा चिंता नहीं करते कि लोग उनके बारे में क्या सोचते हैं। उनके लिए अहम यह है कि वह खुद को किस नजर से देखते हैं। हार्दिक ने कहा कि वह सीधे और ईमानदार इंसान हैं और मैदान पर भी वही रहना पसंद करते हैं। यही सोच उन्हें दबाव में भी खुलकर खेलने की आजादी देती है।
हार्दिक का कहना है कि अब उनका लक्ष्य सिर्फ खेल को एंजॉय करना है। मैदान पर हर पल को जीना और खुद को पहले से बेहतर बनाना ही उनकी प्राथमिकता है। वह खुद को किसी दबाव में नहीं रखना चाहते और सिर्फ अपने खेल पर फोकस करना चाहते हैं।
हार्दिक पांड्या ने अपनी प्रेरणा का उदाहरण रॉकस्टार से दिया। उनका मानना है कि जैसे एक रॉकस्टार मंच पर आता है और कुछ मिनटों में दर्शकों को झूमने पर मजबूर कर देता है, वैसे ही वह मैदान पर उतरकर फैंस को रोमांच देना चाहते हैं। दर्शकों का समर्थन उन्हें नई ऊर्जा देता है और यही एहसास उन्हें हर मैच में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन के लिए प्रेरित करता है।