विदरसा के. विनोद   (सोर्स- सोशल मीडिया)
खेल

Asian Games 2026 में रजत जीतने वाली विदरसा के. विनोद बोलीं- 8 साल की मेहनत के बाद पूरा हुआ सपना

Vidarsa K Vinod Statement: एशियन गेम्स 2026 में 10 मीटर एयर राइफल टीम स्पर्धा में रजत पदक जीतने के बाद विदरसा के. विनोद ने कहा कि 8 साल की कड़ी मेहनत के बाद उनका सपना पूरा हुआ है।

सृष्टि मौर्य

Vidarsa K Vinod Shooting Journey: भारतीय निशानेबाज विदरसा के. विनोद महिलाओं की 10 मीटर एयर राइफल के व्यक्तिगत फाइनल में जगह नहीं बना सकीं। उन्होंने क्वालीफिकेशन में 630.4 अंक हासिल किए और शीर्ष आठ में जगह बनाने से चूक गईं। हालांकि, विदरसा ने एलावेनिल वलारिवन और सोनम मस्कर के साथ टीम इवेंट में रजत पदक जीता।

ये एशियन गेम्स 2026 में भारत का पहला पदक है। विदरसा ने अपने सफर और एशियन गेम्स के अनुभव के बारे में बात की। उन्होंने बताया कि शुरुआत में उनके लिए निशानेबाजी काफी मुश्किल थी और उन्हें सही मार्गदर्शन भी नहीं मिल पा रहा था।

'8 साल की मेहनत के बाद यहां तक पहुंची हूं'

विदरसा ने कहा कि वह केरल से हैं और फिलहाल दिल्ली में ट्रेनिंग कर रही हैं। उन्होंने बताया कि शुरुआत में निशानेबाजी को लेकर कई परेशानियां थीं, लेकिन बाद में उनके पति ने उन्हें काफी मदद की।

उन्होंने कहा, 'शुरुआत में मेरे लिए निशानेबाजी काफी मुश्किल थी। मुझे बेहतर तरीके से गाइड करने वाला कोई नहीं था। अपने पति से मिलने के बाद मेरी ये समस्याएं खत्म हुईं। अब मेरे प्रशिक्षण से जुड़े सभी फैसले वही लेते हैं।'

खुदको भाग्यशाली मानती है

एशियन गेम्स में हिस्सा लेने के अनुभव को लेकर विदरसा ने कहा कि इसे शब्दों में बताना मुश्किल है। उन्होंने कहा कि लोग उन्हें एशियन गेम्स में खेलने का मौका मिलने पर भाग्यशाली बता रहे थे, लेकिन वो इसे सिर्फ किस्मत नहीं मानतीं। उन्होंने कहा, 'मैंने यहां तक पहुंचने के लिए 8 साल तक कड़ी मेहनत की है। एशियन गेम्स में हिस्सा लेना मेरा सपना था, जो अब सच हो रहा है।'

प्रतियोगिताओं के कारण नहीं कर पाईं पोस्ट-ग्रेजुएशन

विदरसा ने बताया कि उन्होंने ग्रेजुएशन किया है और फिलहाल उनका पूरा ध्यान शूटिंग पर है। वह पोस्ट-ग्रेजुएशन करना चाहती थीं, लेकिन लगातार होने वाली प्रतियोगिताओं के कारण ऐसा नहीं कर पाईं।

उन्होंने बताया कि खिलाड़ियों को वर्ल्ड कप, एशियन चैंपियनशिप और घरेलू प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेना होता है। प्रतियोगिताओं की तैयारी और उनमें भाग लेने में काफी समय लगता है, इसलिए वह अपनी आगे की पढ़ाई पूरी नहीं कर सकीं।

पति और कोच दे रहे साथ

विदरसा ने बताया कि उनके पति एशियन गेम्स के दौरान उन्हें सपोर्ट करने के लिए जापान में उनके साथ हैं। वहीं उनका पूरा परिवार भारत में है और उन्हें अपना आशीर्वाद दे रहा है। उनके कोच मनोज कुमार भी इस दौरान उनके साथ हैं।

व्यक्तिगत इवेंट में फाइनल से चूकने के बावजूद विदरसा के लिए एशियन गेम्स की शुरुआत यादगार रही है। टीम इवेंट में रजत पदक जीतकर उन्होंने भारत के लिए पहला पदक हासिल करने वाली टीम का हिस्सा बनने की उपलब्धि हासिल की।

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