Vividh Bharati Anniversary: भारत में रेडियो प्रसारण का इतिहास काफी पुराना है, जिसकी शुरुआत 23 जुलाई 1927 को हुई थी। आजादी के बाद देश भर में रेडियो स्टेशनों का एक बड़ा नेटवर्क तैयार किया गया।
पचास के दशक के में आकाशवाणी के प्राइमरी चैनल देश के सभी प्रमुख शहरों में सूचना और मनोरंजन की जरूरतें पूरी कर रहे थे। हालांकि, उस दौर में किसी वजह से आकाशवाणी पर हिंदी फिल्मों के गाने बजाने पर रोक लगा दी गई थी।
यह वही समय था जब हिंदी सिनेमा में संगीत का सुनहरा दौर चल रहा था और एक से बढ़कर एक कालजयी गीत बन रहे थे। आकाशवाणी पर गानों पर पाबंदी के कारण लोग 'रेडियो सीलोन' सुनने लगे थे, यह श्रीलंका ब्रॉडकास्टिंग कॉर्पोरेशन की विदेश सेवा थी।
रेडियो सीलोन अपने प्रायोजित कार्यक्रमों और हिंदी गानों के जरिए भारतीय श्रोताओं के बीच तहलका मचा रहा था। इसी के बाद रेडियो सीलोन की बढ़ती लोकप्रियता को देखते हुए आकाशवाणी के तत्कालीन महानिदेशक की पहल 'विविध भारती' की आधार शिला रखी गयी।
रेडियो सीलोन की बढ़ती लोकप्रियता को देखते हुए आकाशवाणी के तत्कालीन महानिदेशक गिरिजाकुमार माथुर ने एक अखिल भारतीय मनोरंजन सेवा शुरु करने की सोची। इस विचार पर चर्चा करने के लिए पंडित नरेंद्र शर्मा, गोपालदास, केशव पंडित और उनके अन्य सहयोगियों को बुलाया गया। इन सभी ने विविध भारती को शुरू करने में मुख्य भूमिका निभाई। शुरुआत में इसे 'ऑल इंडिया वैरायटी प्रोग्राम' कहा गया था, जो अंग्रेजी शब्द 'मिस्लेनियस' का अनुवाद था। बाद में पंडित नरेंद्र शर्मा ने इसे 'विविध भारती' नाम दिया।
विविध भारती को आकाशवाणी का 'पंचरंगी कार्यक्रम' कहा गया, जिसका मतलब यह था कि इसमें पांचों ललित कलाओं का समावेश होगा। तमाम तैयारियों के बाद 3 अक्टूबर 1957 को विविध भारती सेवा की शुरुआत मुंबई में हुई।
विविध भारती पर प्रसारित होने वाला पहला गाना पंडित नरेंद्र शर्मा द्वारा लिखा गया था और इसे मशहूर संगीतकार अनिल विश्वास ने संगीतबद्ध किया था। इस विशेष गीत को 'प्रसार गीत' कहा गया, जिसके बोल थे 'नाच मयूरा नाच'। इस कालजयी गीत को प्रसिद्ध गायक मन्ना डे ने अपनी आवाज दी थी। यह ऐतिहासिक गीत आज भी विविध भारती के संग्रहालय में सुरक्षित है।
विविध भारती की पहली घोषणा उद्घोषक शील कुमार ने की थी। बाद में इस मंच से अमीन सयानी जैसे दिग्गज नाम जुड़े, जिनकी आवाज ने पूरे देश को अपना दीवाना बना लिया। विविध भारती का मुख्य स्टूडियो मुंबई में बनाया गया था और देश भर से सबसे बेहतरीन निर्माताओं व उद्घोषकों को यहां लाया गया। शुरुआत में इसका प्रसारण मुंबई और मद्रास (चेन्नई) केंद्रों से होता था, लेकिन धीरे-धीरे इसकी लोकप्रियता इतनी बढ़ी कि आकाशवाणी के अन्य केंद्र भी इसका प्रसारण करने लगे।
विविध भारती ने कई ऐसे कार्यक्रमों को जन्म दिया, जो इतिहास के पन्नों में अमर हो गए। इनमें से एक सबसे प्रमुख कार्यक्रम है 'जयमाला'। यह कार्यक्रम सोमवार से शुक्रवार तक फौजी भाइयों की पसंद के फिल्मी गानों पर आधारित होता है।
शनिवार को कोई नामचीन फिल्मी हस्ती इसे पेश करती है, जबकि रविवार को 'जयमाला संदेश' प्रसारित होता है, जिसमें फौजी भाई अपने परिजनों को और परिजन देश की सीमा पर तैनात जवानों को संदेश भेजते हैं।
आपको बता दें कि विविध भारती पहला ऐसा मीडिया चैनल था, जिसने विशेष रूप से देश के सैनिकों के लिए कोई कार्यक्रम शुरू किया था। कारगिल युद्ध के दौरान 'हेलो जयमाला' के जरिए सैनिकों ने अपने परिवार तक अपनी कुशलता के संदेश पहुंचाए थे।
पहली बार अभिनेत्री नरगिस ने जयमाला कार्यक्रम प्रस्तुत किया था। इसके बाद देव आनंद, धर्मेंद्र, अमिताभ बच्चन, वहीदा रहमान और हेमा मालिनी जैसी हस्तियों ने फौजी भाइयों के लिए इस कार्यक्रम को होस्ट किया।
विविध भारती का एक और बेहद लोकप्रिय कार्यक्रम था 'हवामहल', जो नाटकों और झलकियों का संग्रह था। पहले यह कार्यक्रम रात सवा नौ बजे प्रसारित होता था, जिसे बाद में बदलकर रात आठ बजे कर दिया गया।
हवामहल के लिए देशभर से नाटक तैयार होकर आते थे। एक दौर में असरानी, ओम पुरी, ओम शिवपुरी, अमरीश पुरी, दीना पाठक और यूनुस परवेज जैसे महान कलाकारों ने हवामहल के नाटकों में अपनी आवाज का जादू बिखेरा था।
साल 1967 में विविध भारती पर 'विज्ञापन प्रसारण सेवा' की शुरुआत हुई। विज्ञापनों के आने के बाद प्रायोजित कार्यक्रमों का एक नया दौर शुरू हुआ।
उस दौर में 'बिनाका गीतमाला', 'एस कुमार्स का फिल्मी मुकदमा', 'मोदी के मतवाले राही', 'सेरिडॉन के साथी' और 'इंस्पेक्टर ईगल' जैसे रेडियो शो प्रसारित होते थे। ये कार्यक्रम अपने समय में उतने ही लोकप्रिय थे, जितने आज के दौर में टीवी धारावाहिक होते हैं।
बदलते समय के साथ विविध भारती ने खुद को नया रूप दिया। साल 1996 में मनोरंजन का एक नया पैकेज 'पिटारा' शुरू किया गया। इसमें सेहतनामा, हेलो फरमाइश, सेल्यूलाइड के सितारे, सरगम के सितारे और यूथ एक्सप्रेस जैसे विविध कार्यक्रम शामिल थे।
इसी तरह, महिलाओं के लिए विशेष रूप से 'सखी सहेली' कार्यक्रम दोपहर तीन बजे शुरू किया गया, जिसे केवल महिलाएं ही प्रस्तुत करती हैं। श्रोताओं की भारी मांग पर इसमें 'हेलो सहेली' नाम का फोन-इन प्रोग्राम भी जोड़ा गया।
विविध भारती ने भारतीय संगीत और सिनेमा के इतिहास को संजोने का बहुत बड़ा काम किया है। 'उजाले उनकी यादों के' कार्यक्रम के जरिए नौशाद, खय्याम, ओ.पी. नैयर, प्यारेलाल, प्रकाश मेहरा और माला सिन्हा जैसी महान हस्तियों के 6 से 10 घंटे लंबे इंटरव्यू रिकॉर्ड किए गए।
वहीं, सुबह साढ़े सात बजे प्रसारित होने वाला 'संगीत सरिता' कार्यक्रम शास्त्रीय संगीत की बारीकियों को बेहद आसान भाषा में आम लोगों तक पहुंचाता है।
प्रसिद्ध फिल्म निर्देशक ऋषिकेश मुखर्जी ने एक बार विविध भारती के बारे में कहा था कि विविध भारती भारत के मध्यवर्गीय जीवन का बैकग्राउंड म्यूजिक है। विविध भारती केवल गानों का चैनल नहीं था, बल्कि इसने भारत की सांस्कृतिक चेतना को गढ़ने और देश के कोने-कोने को हिंदी भाषा से जोड़ने में अहम भूमिका निभाई है। आज भी डिजिटल दौर के बावजूद विविध भारती करोड़ों लोगों की यादों और दिनचर्या का एक अटूट हिस्सा बनी हुई है।