ट्रंप की रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर 100% टैरिफ लगाने की नीति पर सवाल।
अमेरिका में ईंधन की कीमतें बढ़ने के बीच रूस से डीजल खरीदने के समझौते का दावा।
भारत ने रूस से तेल खरीदने के अपने फैसले को देश की जरूरतों और कीमतों से जुड़ा बताया।
रूस से डीजल खरीदने के अमेरिकी फैसले और भारत पर टैरिफ के दबाव को लेकर दोहरी नीति के आरोप।
Trump Tariffs on India Russia Oil: अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप भारत पर लगातार दबाव डालते आ रहे हैं कि वह रूस से बड़े पैमाने पर क्रूड ऑयल खरीदना बंद करे, क्योंकि इससे मिलने वाली रकम से रूस को यूक्रेन पर हमला जारी रखने में मदद मिलती है। ट्रंप ने रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर 100 प्रतिशत दंडात्मक टैरिफ लगाने का 'लिंडसे ओ ग्राहम' कानून भी पारित करवाया। अब वही ट्रंप खुद रूस से हजारों टन डीजल खरीद रहे हैं। इसके लिए उन्होंने पुतिन के साथ व्यापार समझौता किया है।
इसकी वजह यह है कि अमेरिका में ईधन के दाम काफी बढ़ गए हैं, जो 6।50 डॉलर प्रति गैलन तक जा पहुंचे हैं। इससे वहां की जनता नाराज है। नवंबर में अमेरिकी कांग्रेस (संसद) के मिड टर्म चुनाव हैं, इसे देखते हुए ट्रंप को रूस से डीजल खरीद सौदा करना पड़ा। अमेरिका स्वयं डीजल का बड़ा निर्यातकर्ता है, लेकिन फिर भी वह यूरोप पर दबाव डाल रहा है कि वह अपना डीजल का भंडार बाजार में लाए।
गत सप्ताह जी-7 देशों ने अपने आपात रिजर्व से 100 मिलियन बैरल क्रूड ऑयल व पेट्रोलियम उत्पाद जारी करने पर सहमति जताई। ट्रंप की टैरिफ धमकी पर भारत ने साफ किया था कि वह अपनी जरूरतों के लिए विश्व के किसी भी देश से उचित दाम पर तेल खरीदने के लिए स्वतंत्र है। वह किसी एक आपूर्तिकर्ता पर निर्भर नहीं है।
वह अनेक देशों से तेल खरीद रहा है, जिनमें से रूस भी एक है। जब अमेरिका स्वयं रूस से डीजल खरीद रहा है तो भारत और चीन पर 100 प्रतिशत टैरिफ लगाने का बेतुका कदम क्यों उठा रहा है? क्या अमेरिका के रूसी डीजल खरीदने से रूस को यूक्रेन पर हमला तेज करने के लिए मदद नहीं मिलेगी? प्रधानमंत्री मोदी को अपना अच्छा मित्र बताने वाले ट्रंप ऐसी दोहरी नीति क्यों अपना रहे हैं? फरवरी में भारत ने रूस से काफी बड़ी मात्रा में तेल खरीदा था, जो उसके कुल तेल आयात का 20 प्रतिशत था।
गत माह जब अमेरिका ने 100 फीसदी दंडात्मक टैरिफ लगाने का कानून बनवाया तो भारत ने रूस से तेल की खरीदी बहुत कम कर दी जबकि वह रूस के कम दाम पर तेल आयात करता आया था। भारत अब अमेरिका के सामने यह मुद्दा उठाएगा कि जब वह स्वयं रूस से डीजल खरीद रहा है तो भारत पर टैरिफ क्यों लगा रहा है? ट्रंप के अनुसार रूस की ओर से तुरंत अमेरिका व अन्य देशों को 3 लाख टन डीजल की सप्लाई की जाएगी।
इसके बाद नवंबर में वह और 50 लाख टन डीजल की आपूर्ति करेगा। डोनाल्ड ट्रंप ने रूस से डीजल सौदे को अपनी उपलब्धि बताते हुए कहा कि अमेरिका के किसानों, ट्रक चालकों के लिए कम दाम पर भरपूर डीजल उपलब्ध कराना उनकी एक बड़ी और महत्वपूर्ण घोषणा है। यह बात स्पष्ट है कि अमेरिका को डीजल बेचने से रूस की आमदनी बढ़ेगी। इसलिए पुतिन ने कुछ सोचकर ही अमेरिका के साथ यह समझौता किया है।
लेख- चंद्रमोहन द्विवेदी के द्वारा