टैरिफ की धमकी और वैश्विक तनाव के बीच नहीं डगमगाई देश की इकोनॉमी! दूसरी तिमाही में 7.3 फिसदी वृद्धि का अनुमान

Monthly Economy Review: वित्त मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार अनिश्चितता के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूती से जगह बनाए हुए है। वर्तमान वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में 7.3 प्रतिशत वृद्धि अनुमान है।
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भारतीय बाजारसोर्स- IANS
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Indian Economy: पश्चिम एशिया में लगातार तनाव जारी है। अमेरिका की ओर से सौ फिसदी टैरिफ को लेकर कानून बनाया गया है। इन सभी अनिश्चितताओं के बीच देश की अर्थव्यवस्था के लिए राहत की खबर है। वित्त मंत्रालय ने गुरुवार को सितंबर माह की 'मासिक आर्थिक समीक्षा' के आधार पर रिपोर्ट जारी किया है। इसके अनुसार, वैश्विक स्तर पर बढ़ती अनिश्चितताओं के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था ने वित्त वर्ष 2026-27 की शुरुआत मजबूत आधार के साथ की है।

विकास की रफ्तार जारी है

मंत्रालय का कहना है कि पहली तिमाही में दिखी विकास की रफ्तार दूसरी तिमाही में भी जारी है, हालांकि इसकी गति कुछ संतुलित रहने की संभावना है। रिपोर्ट के अनुसार, आर्थिक सर्वेक्षण में पेश किए गए नाउकास्टिंग मॉडल के आधार पर वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही में वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर 7.3 प्रतिशत रहने का अनुमान है। वित्त मंत्रालय ने कहा कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष ने वैश्विक ऊर्जा बाजारों और व्यापारिक मार्गों को प्रभावित किया है, जिससे दुनिया की कई अर्थव्यवस्थाओं पर दबाव बढ़ा।

7.8 प्रतिशत वास्तविक जीडीपी

वैश्विक तनाव के बीच भारत ने मजबूत प्रदर्शन करते हुए वित्त वर्ष की पहली तिमाही में 7.8 प्रतिशत की वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर्ज की, जो मौजूदा शृंखला में किसी भी वित्त वर्ष की पहली तिमाही का सबसे ऊंचा स्तर है। समीक्षा रिपोर्ट में कहा गया है कि इसमें विनिर्माण, निर्माण और सेवा क्षेत्रों में मजबूत प्रदर्शन देखने को मिला। घरेलू मांग ने अर्थव्यवस्था को राहत दी, इसके साथ ही लोग निवेश के लिए आगे आए। रिपोर्ट के अनुसार, निवेश दर मौजूदा शृंखला के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गई है।

उर्जा आपूर्ति के लिए सरकार के कदम

वित्त मंत्रालय का मानना है कि ऊर्जा आपूर्ति और महत्वपूर्ण कच्चे माल की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए सरकार द्वारा समय पर उठाए गए कदमों ने अर्थव्यवस्था को बाहरी झटकों से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। साथ ही अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा कीमतों का सीमित असर घरेलू ईंधन कीमतों पर पड़ने से भी आर्थिक गतिविधियां प्रभावित नहीं हुईं। हालांकि कुछ संकतकों में वृद्धि की रफ्तार पहले की तुलना में थोड़ी धीमी रही।

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सेवा क्षेत्र की गतिविधियों में मजबूती

मैन्युफैक्चरिंग पीएमआई की वृद्धि दर में कुछ नरमी देखी गई। दूसरी ओर अगस्त में सेवा क्षेत्र की गतिविधियों में मजबूती आई, जिसे नए कारोबार और रोजगार में वृद्धि का समर्थन मिला। रिपोर्ट के अनुसार, बिजली और ईंधन की खपत लगातार स्वस्थ वृद्धि दर्ज कर रही है, जबकि बैंक ऋण वितरण भी मजबूत बना हुआ है। इससे आर्थिक गतिविधियों में मजबूती के संकेत मिलते हैं। औद्योगिक क्षेत्र का प्रदर्शन भी पहली तिमाही में मजबूत रहा है।

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बैंक लोन में भी तेजी आई

रिपोर्ट में कहा गया है कि जुलाई में उद्योग क्षेत्र को दिए गए बैंक ऋण में भी तेजी आई और यह वृद्धि सभी आकार की कंपनियों में व्यापक रूप से देखने को मिली। इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर मूल्य श्रृंखला में घरेलू क्षमताओं को मजबूत करने के लिए हालिया नीतिगत कदमों का भी सकारात्मक असर दिखाई दे रहा है।

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