

Highlights:
रूस से जुड़े डीजल समझौते पर ट्रंप और रिपब्लिकन सीनेटरों में मतभेद सामने आए।
थॉम टिलिस ने ट्रंप पर कानून उल्लंघन की आशंका जताई।
जॉन बारासो ने फैसले को रूस पर दबाव बनाने का तरीका बताया।
रूसी तेल के बड़े खरीदारों पर कार्रवाई की समयसीमा 18 अक्टूबर है।
कानून के तहत कुछ देशों पर 100% तक शुल्क लगाने का अधिकार है।
Trump Russia Oil Deal Row: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के रूस से जुड़े डीजल समझौते को लेकर रिपब्लिकन पार्टी के भीतर मतभेद खुलकर सामने आ गए हैं। रिपब्लिकन सीनेटर थॉम टिलिस ने कहा कि ट्रंप शायद कानून तोड़ रहे हैं, जबकि सीनेट में रिपब्लिकन व्हिप जॉन बारासो ने इसे रूस पर दबाव बनाने का एक तरीका बताया। ट्रंप को एक हफ्ते के अंदर यह तय करना है कि रूसी तेल के बड़े खरीदारों पर जुर्माना लगाया जाए या नहीं।
यह मतभेद रविवार को दो टीवी कार्यक्रमों, एनबीसी के मीट द प्रेस और सीबीएस के फेस द नेशन में दिखाई दिया। एनबीसी की पत्रकार क्रिस्टन वेल्कर ने टिलिस से पूछा कि क्या ट्रंप 2022 में बने उस कानून का उल्लंघन कर रहे हैं, जो रूसी तेल के आयात पर रोक लगाता है। इस पर टिलिस ने कहा, मेरा मानना है कि ऐसा हो सकता है। उन्होंने कहा कि यह कहने के लिए पर्याप्त आधार हैं कि राष्ट्रपति कानून का पालन नहीं कर रहे हैं।
नॉर्थ कैरोलिना से रिपब्लिकन सीनेटर टिलिस ने कहा कि दिवंगत सीनेटर लिंडसे ग्राहम के नाम पर बने प्रतिबंध विधेयक पर सीनेट में हुए मतदान से लॉमेकर्स का रुख साफ दिखता है। उन्होंने कहा कि अगर मुझे सही याद है तो उस बिल को 86 वोट मिले थे। यह अमेरिकी सीनेट की लगभग सर्वसम्मत राय थी। लेकिन पिछले 24 घंटों में राष्ट्रपति के कदम और बयान उस बिल की भावना के बिल्कुल उलट हैं। टिलिस ने कहा कि डीजल समझौते की वजह से रूस पर प्रतिबंध लगाने की दिशा में ग्राहम की कोशिशों को नुकसान पहुंच रहा है।
रविवार को बाद में टिलिस ने छह अन्य सीनेटरों के साथ एक संयुक्त बयान भी जारी किया। इस बयान का नेतृत्व सीनेट विदेश संबंध समिति की वरिष्ठ डेमोक्रेट सदस्य जीन शाहीन ने किया था। बयान में कहा गया कि डोनाल्ड ट्रंप का फैसला सीधे तौर पर उस कानून के खिलाफ जाता है और प्रशासन को तुरंत अपना रुख बदलना चाहिए।
इस बयान पर रिपब्लिकन सीनेटर सुसान कॉलिन्स, लिसा मुर्कोव्स्की और जॉन कर्टिस के अलावा डेमोक्रेट सीनेटर रिचर्ड ब्लुमेंथल और रॉन वाइडेन ने भी हस्ताक्षर किए। वहीं, सीबीएस के कार्यक्रम में एंकर मार्गरेट ब्रेनन ने बारासो से उस कानून के बारे में सवाल किया, जिसके पक्ष में उन्होंने खुद वोट दिया था।
ब्रेनन ने पूछा, राष्ट्रपति को 18 अक्टूबर तक यह फैसला लेना है कि रूसी तेल खरीदने वाले देशों पर कार्रवाई करनी है या नहीं। क्या उनका मौजूदा कदम उस कानून का मजाक नहीं बनाता जिसे आपने हाल ही में पारित किया?
बारासो ने ट्रंप का बचाव करते हुए कहा, हमने यह कानून राष्ट्रपति को अधिक विकल्प और ताकत देने के लिए बनाया था, ताकि वह व्लादिमीर पुतिन के खिलाफ इसे एक अतिरिक्त हथियार की तरह इस्तेमाल कर सकें। उन्होंने कहा, यह रूस पर दबाव बनाने और उस क्षेत्र में दीर्घकालिक समाधान निकालने की कोशिश का एक और तरीका है। दोनों सीनेटरों ने अपने बयानों में भारत का नाम नहीं लिया। लेकिन 18 अक्टूबर की समयसीमा भारत के लिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
18 सितंबर को कानून बनने वाले लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट 2026 की धारा 113 के तहत राष्ट्रपति को 30 दिनों के भीतर उन देशों के उत्पादों पर 100 प्रतिशत तक शुल्क लगाने का अधिकार है, जो रूसी कच्चे तेल या प्राकृतिक गैस के पांच सबसे बड़े खरीदारों में शामिल हैं और खरीद जारी रखते हैं। हालांकि, अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने रविवार को फॉक्स न्यूज से कहा कि जो लोग यह दावा कर रहे हैं कि ग्राहम कानून डीजल की खरीद पर रोक लगाता है, वे गलत हैं।
कानून राष्ट्रपति को यह भी अधिकार देता है कि यदि वह कांग्रेस को यह प्रमाणित कर दें कि ऐसा करना अमेरिका के राष्ट्रीय हित में है, तो वे शुल्क में छूट दे सकते हैं। इसके अलावा, धारा 113 में केवल कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की खरीद को आधार माना गया है। डीजल जैसे रिफाइंड उत्पादों को इसमें शामिल नहीं किया गया है।