समृद्धि महामार्ग डिजाइन फोटो
नवभारत विशेष

नवभारत संपादकीय: करोड़ों का समृद्धि महामार्ग या लुटेरों का अड्डा? हाई-स्पीड एक्सप्रेसवे पर खौफ का राज

Samruddhi Mahamarg Safety: समृद्धि महामार्ग पर 120 किमी/घंटा की रफ्तार के बीच लुटेरों के खौफनाक जाल से सुरक्षा दावों की पोल खुल गई है। आपराधिक वारदातों ने यात्रियों की जान जोखिम में डाल दी है।

आकाश मसने

Samruddhi Expressway Crime: हजारों करोड़ रुपये खर्च कर महाराष्ट्र सरकार ने समृद्धि महामार्ग का निर्माण किया परंतु यह कितना असुरक्षित है, यह बात 27 अगस्त की रात को हुई 3 आपराधिक घटनाओं से सामने आई। एक मामले में महामार्ग पर कोई धारदार चीज डालकर संभाजी नगर के एक वकील की कार के टायर पंक्चर किए गए और फिर उसमें प्रवास कर रहे परिवारजनों को मारपीट कर 18 लाख की रकम लूटी गई।

दूसरी घटना में उत्तराखंड से तीर्थयात्रा कर लौट रहे राहुरी के व्यापारी की कार का पीछा कर उसे रास्ते में रोका गया और उसमें बैठे उद्योजक के गले की सोने की चेन छीनकर मारपीट की गई। तीसरी घटना में एक बीमार को इलाज के लिए मुंबई ले जा रहे लोगों की कार रोककर मारा-पीटा गया तथा आभूषण और नकद रकम लूटी गई।

120 किमी/घंटा की स्पीड पर जानलेवा जाल

कांटेदार वस्तु डालकर गाड़ी के टायर पंक्चर करना बेहद खतरनाक हो सकता है, क्योंकि समृद्धि महामार्ग पर 100 से 120 किलोमीटर की स्पीड से वाहन चलते हैं। इतनी तेज गति में यदि टायर पंक्चर हुए तो वाहन पलटकर दुर्घटनाग्रस्त हो सकता है या डिवाइडर से टकरा सकता है। इसमें लोगों की जान जा सकती है। यह लुटेरे प्रवासियों को लूट ही नहीं रहे, उनकी जान भी खतरे में डाल रहे हैं।

समृद्धि महामार्ग के सुरक्षा तंत्र पर उठे तीखे सवाल

बार-बार दावा किया जाता है कि समृद्धि महामार्ग पर निश्चित प्रवेश और निर्गम मार्ग है। वहां टोल नाके हैं, सीसीटीवी व नियंत्रण कक्ष की व्यवस्था है। महामार्ग पुलिस व गश्ती वाहनों की तैनाती है तथा आपातकालीन सहायता के इंतजाम हैं। जब ऐसा है तो 10-12 लुटेरों की टोली कैसे महामार्ग पर पहुंच कर लूटमार को अंजाम देती है और बाद में लूट का माल लेकर कैसे फरार हो जाती है? क्या महामार्ग से बच निकलने के रास्ते जुड़े हुए हैं?

महामार्ग पुलिस की गश्त हुई फेल

महामार्ग पुलिस व गश्ती वाहनों को इन लुटेरों का पता क्यों नहीं चल पाता? संदिग्ध वाहन, मोबाइल लोकेशन व फास्टैग पर निगाह क्यों नहीं रखी जाती ? डकैती की घटना के पहले वाले या आगे वाले टोल नाके पर तो मालूम पड़ ही जाना चाहिए कि अपराधी कहां जा रहे हैं। जब आज के समय वाहन का नंबर पहचानने वाले कैमरे, डिजिटल टोल भुगतान प्रणाली और मोवाइल नेटवर्क उपलब्ध है तो सुरक्षा व्यवस्था इतनी ढीली और कमजोर क्यों हैं?

सुरक्षित सफर का दिखाया था सपना

गतिशील, सुरक्षित और नियोजित प्रवास का स्वप्न दिखाते हुए समृद्धि महामार्ग बनाया गया था, लेकिन अब इस पर लुटेरों की दहशत व्याप्त हो गई है। इसके पहले भी मार्च में सिन्नर परिसर के एक परिवार को समृद्धि महामार्ग पर हथियार का डर दिखाकर लूटा गया था। बाद में संदिग्ध लुटेरों को नासिक व ठाणे ग्रामीण पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में पकड़ा गया था।

इसे देखते हुए संपूर्ण महामार्ग की सुरक्षा मजबूत की जाए, इससे जुड़ने वाले अवैध मार्ग की जांच की जाए, रात में गश्त बढ़ाई जाए, सहायता पथक व नियंत्रण कक्ष प्रभावी बनाए जाएं, प्रवासियों के जान-माल की सुरक्षा सरकार की जिम्मेदारी है। यदि लुटेरों की अंतरराज्यीय टोली होने का संदेह है तो पड़ोसी राज्यों की पुलिस का सहयोग लेकर इन्हें पकड़ा जाए।

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