Repo Rate Loan EMI: बढ़ती महंगाई, क्रूड ऑयल के बढ़ते दाम तथा विश्वव्यापी आर्थिक अनिश्चितता को देखते हुए भारतीय रिजर्व बैंक ने रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट की वृद्धि कर दी। इसके पहले फरवरी 2023 में ऐसा कदम उठाया गया था। आरबीआई के गवर्नर संजय मल्होत्रा के नेतृत्व में 6 सदस्यीय मौद्रिक नीति समिति ने सर्वसम्मति से रेपो रेट को 5.RBI50 प्रतिशत करने का फैसला लिया।
सामने त्योहारों का सीजन है, इसलिए रेपो रेट वृद्धि एक समझदारीभरा कदम है। रेपो रेट बढ़ाने के पीछे महंगाई को काबू में रखने का उद्देश्य है। इतना अवश्य है कि इस वजह से होम लोन, वाहन लोन की ब्याज दर बढ़ेंगी और ग्राहकों को ऊंची ब्याज दर चुकानी पड़ेगी। अब तक रिजर्व बैंक का दृष्टिकोण था कि जब विकास दर बढ़ती चली जा रही है तो ब्याज दरों में वृद्धि करना फिजूल है लेकिन मैन्युफैक्चरिंग के अबाध रूप से चलने के लिए धन निवेश करते रहना जरूरी है।
पिछले कुछ समय से घरेलू उपभोग बढ़ा है, जिसकी वजह से कंपनियों ने उत्पादन वृद्धि की है। इसके बावजूद अब जरूरत से ज्यादा उत्पादन और कम उपभोग होने का खतरा मंडरा रहा है। इसका असर खाद्य कीमतों और खुदरा महंगाई पर पड़ेगा। ऐसे में रिजर्व बैंक नहीं चाहता था कि महंगाई की वजह से विकास के लक्ष्य प्रभावित हों। रेपो रेट में वृद्धि से ही इस खतरे को टाला जा सकता था। यदि अगली तिमाही तक वैश्विक तनाव खत्म नहीं हुआ, तो ब्याज दरों में फिर से वृद्धि की जा सकती है।
इस वर्ष मानसून कमजोर रहने की वजह से खाद्य उत्पादन कम होने की व्यापक संभावना है। अनेक क्षेत्रों में सूखा घोषित किया जा चुका है। रबी मौसम पर भी 'सुपर अल नीनों' का खतरा मंडरा रहा है। इन सबका प्रभाव खुदरा महंगाई पर होता है। इतने पर भी त्योहारों में बाजार की गतिविधियों में सक्रियता बनी रहती है।
मौद्रिक समिति ने वैश्विक घटनाक्रम तथा भविष्य की आशंकाओं को ध्यान में रखकर कदम उठाए हैं। रिजर्व बैंक ने आर्थिक विकास को ध्यान में रखते हुए मूल्यों को स्थिर रखने पर जोर दिया है। अगस्त में हुई पिछली समीक्षा के बाद से स्थितियां बदली हैं। अप्रैल, मई, जून की प्रथम तिमाही में जीडीपी की 7.8 फीसदी विकास दर ने सभी को चकित कर दिया था।
इस वजह से अब रिजर्व बैंक ने पूरे वर्ष का अनुमान 6.7 फीसदी से बढ़ाकर 7.1 प्रतिशत कर दिया है। इस दौरान फिर सितंबर में पश्चिम एशिया में संकट तीव्र हो उठा तथा कच्चे तेल के दाम में उबाल आ गया। रिजर्व बैंक के अनुमान को पीछे छोड़कर खुदरा महंगाई 4 प्रतिशत को पार कर गई। यह दिसंबर तक 6 फीसदी हो जाने की आशंका है। इन सारी स्थितियों पर रिजर्व बैंक की निगाह है। विश्व के अन्य केंद्रीय बैंक भी आगामी महीनों में ब्याज दर बढ़ा सकते हैं।
लेख- चंद्रमोहन द्विवेदी के द्वारा