दिसंबर की MPC में 50 अंक रेपो रेट बढ़ा सकता है RBI, एसबीआई रिसर्च का बड़ा अनुमान

SBI Research On Repo Rate: एसबीआई रिसर्च के अनुसार, दिसंबर की एमपीसी में आरबीआई 50 बेसिस प्वाइंट्स तक रेपो रेट बढ़ा सकता है, जिससे महंगाई और वैश्विक हालात पर असर पड़ सकता है।
sbi research estimate on repo rate hike by 50 bps in december mpc
RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा(सोर्स- सोशल मीडिया)
Published on: 
Updated on: 

SBI Research On Repo Rate: भारतीय रिजर्व बैंक की दिसंबर की मौद्रिक नीति में रेपो रेट 50 बेसिस प्वाइंट्स तक बढ़ सकता है। हालांकि, यह बढ़ोतरी काफी हद तक ग्लोबल सिचुएशन पर निर्भर करेगी। एसबीआई रिसर्च द्वारा बुधवार को जारी एक रिपोर्ट में यह बयान दिया गया है।

रिपोर्ट के मुताबिक, वैश्विक हालात जल्द ही अस्थिर हो सकते हैं, एसलिए आरबीआई को छोटी-छोटी बढ़ोतरी के बजाय एक बार में ही दरें बढ़ाने का कदम उठाना चाहिए।

'रेपो रेट 6% प्रतिशत करना अच्छा विकल्प'

स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) के ग्रुप चीफ इकोनॉमिक एडवाइजर डॉ. सौम्य कांति घोष के मुताबिक, दिसंबर तक रेपो रेट को 6 प्रतिशत करना सबसे अच्छा विकल्प हो सकता है।आरबीआई की एमपीसी में रेपो रेट को सर्वसम्मति से 25 बेसिस प्वाइंट्स बढ़ाकर 5.50 प्रतिशत करने के फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए रिपोर्ट में कहा गया है कि अब आगे नीतिगत विकल्प असल में या तो दरें बढ़ाने या उन्हें स्थिर रखने तक ही सीमित हैं, जो बदलती परिस्थितियों पर निर्भर करेगा।

डॉ. घोष ने कहा कि आरबीआई ने वित्त वर्ष 27 के लिए जीडीपी ग्रोथ अनुमान 40 बेसिस प्वाइंट्स बढ़ाकर 7.1 प्रतिशत और खुदरा महंगाई अनुमान 20 बेसिस प्वाइंट्स बढ़ाकर 5.20 प्रतिशत कर दिया है। हमारा मानना ​​है कि वित्त वर्ष 27 की दूसरी तिमाही में जीडीपी ग्रोथ 7.5 प्रतिशत तक पहुंच सकती है।

'कैपिटल फ्लो के लिए AI पॉलिसी की जरूरत'

रेपो रेट से जुड़े कदम के अलावा डॉ. घोष ने कहा ने कहा कि हमारा मानना ​​है कि अक्टूबर की पॉलिसी से जुड़ी बातचीत सतर्कता से हटकर साफ तौर पर सख्ती की ओर बढ़ने का संकेत देती है। गवर्नर के बयान और मॉनेटरी पॉलिसी स्टेटमेंट के हमारे विशलेषण से पता चलता है कि इस बार उनके रुख में काफी समानता है, जो पिछली पॉलिसी साइकिल में देखी गई बातचीत में अंतर से एक बड़ा बदलाव है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि कैपिटल फ्लो को आसान बनाने के लिए भारत को एक स्पष्ट एआई पॉलिसी की जरूरत है, क्योंकि स्पष्ट पॉलिसी के बिना कैपिटल फ्लो की संभावना कम है।

चिंताजनक बेंचमार्क की ओर रुपया

इसके साथ ही, इसमें यह भी कहा गया है कि रुपये के लिए सुरक्षा उपाय करने की जरूरत है, क्योंकि यह अब एक चिंताजनक बेंचमार्क की ओर बढ़ रहा है। एसबीआई ने आरबीआई के पुराने पॉलिसी साइकल का जो विशलेषण किया है, उससे पता चलता है कि ब्याज दरें बढ़ाने का दायरा महंगाई के दबाव की तीव्रता और उसके बने रहने की अवधि के हिसाब से तय किया गया है।

sbi research estimate on repo rate hike by 50 bps in december mpc
RBI Repo Rate Hike: आम जनता को बड़ा झटका! RBI ने 0.25% बढ़ाया रेपो रेट, महंगी होगी आपके लोन की EMI, जानें असर

दिलचस्प बात यह है कि जैसे-जैसे आरबीआई के अलग-अलग दौर में महंगाई का माहौल नरम हुआ, पॉलिसी रेट का पीक लेवल भी कम होता गया।

नवंबर 2026 में 6.8% महंगाई का अनुमान

इस पुराने ट्रेंड को देखते हुए रिपोर्ट में कहा गया है कि हमारे अनुमान बताते हैं कि नवंबर 2026 में महंगाई के लगभग 6.8 प्रतिशत के पीक पर पहुंचने की उम्मीद है, और इस तरह पीक रेपो रेट लगभग 6.0 प्रतिशत हो सकता है।

sbi research estimate on repo rate hike by 50 bps in december mpc
Explainer: महंगाई और रेपो रेट का क्या है कनेक्शन, कैसे काम करता है RBI का यह फॉर्मूला; जानें सबकुछ

हालांकि, महंगाई के ट्रेंड में बदलाव के आधार पर ब्याज दरें बढ़ाने की मात्रा और रफ्तार में काफी अंतर हो सकता है। टाइटनिंग साइकल की रफ्तार भी उतनी ही अहम है।

Navbharat Live: Hindi News
navbharatlive.com