बाजपा अध्यक्ष नितिन नबीन  सोर्स-नवभारत
नवभारत विशेष

नवभारत संपादकीय: पंजाब चुनाव में आप और कांग्रेस को टक्कर देने की तैयारी में BJP, सिख नेताओं पर बड़ा दांव

Punjab Elections: पंजाब में BJP अन्य दलों के सिख नेताओं को जोड़कर अपना जनाधार बढ़ाने में जुटी है। AAP और कांग्रेस की हालिया बढ़त के बाद पार्टी अकेले चुनाव लड़ने या अकाली दल से गठबंधन की तैयारी में है।

अनन्या तिवारी

BJP Punjab Election Strategy: अगले वर्ष की शुरुआत में पंजाब विधानसभा चुनाव होने की संभावना व्यक्त की जा रही है, जिसे देखते हुए बीजेपी की तैयारियां जारी हैं। इस राज्य में आम तौर पर बीजेपी को हिंदू व्यापारी वर्ग की पार्टी माना जाता है, लेकिन अब वह बड़े पैमाने पर अन्य पार्टियों के सिख नेताओं को अपने साथ शामिल कर आधार बढ़ाने में लगी है। कांग्रेस छोड़कर आए जाट सिख केवलसिंह ढिल्लों को बीजेपी ने पंजाब प्रदेश अध्यक्ष बनाया है।

गठबंधन या एकला चलो की नीति?

प्रधानमंत्री मोदी ने भी स्थानीय डेरा प्रमुखों व दलित नेताओं से व्यक्तिगत भेंट की है। देखना है कि बीजेपी पंजाब में अकेले अपने बलबूते चुनाव लड़ेगी या शिरोमणि अकाली दल से गठबंधन करेगी ! पंजाब में बदलाव की राजनीति देखी जाती है। 2022 के विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी भारी बहुमत से जीती। उसने कुल 117 में से 92 सीटों पर विजय पाई। इसके 2 वर्ष बाद लोकसभा चुनाव में मतदाताओं ने कांग्रेस को समर्थन दिया। कुल 13 में से 7 सीटें कांग्रेस ने जीतीं। 'आप' को सिर्फ 3 तथा अकाली दल को सिर्फ 1 सीट मिल पाई। 2 सीटें पंथ से जुड़े कट्टर लोगों को मिलीं।

अकाली दल का घटता जनाधार

अब शिरोमणि अकाली दल अपनी खोई जमीन हासिल करने की कोशिश कर रहा है, लेकिन उसके पास राज्य की समस्याओं और चुनौतियों से निपटने का कोई स्पष्ट एजेंडा नहीं है। कांग्रेस, आप व अकाली दल तीनों ही सुशासन व मुफ्त उपहार के वादों के साथ चुनाव लड़ने की तैयारी में हैं। पंजाब में 1966 से शिरोमणि अकाली दल सिख पंथ का प्रतिनिधित्व करने वाली प्रमुख पार्टी रही है, लेकिन पिछले चुनाव में उसका वोट शेयर सिर्फ 13.5 प्रतिशत रह गया, जो बीजेपी के 18.6 प्रतिशत से कम था।

पंजाब का सामाजिक और राजनीतिक समीकरण

इसके बावजूद पंजाब की राजनीति में धर्म, जाति और वर्ग की पहचान बनी हुई है, जो मतदान पर असर डालती है। सिखों की आबादी ग्रामीण क्षेत्रों में ज्यादा है। अधिकांश खेत जाट सिखों के हैं। हिंदुओं की आबादी शहरी क्षेत्रों में अधिक है। पंजाब में अब तक सारे मुख्यमंत्री सिख ही रहे हैं। शिरोमणि अकाली दल की 2017 के विधानसभा चुनाव में हार की वजह यह भी थी कि उसने केंद्र की एनडीए सरकार से गठबंधन किया था, जिसने 2020 में 3 किसान विरोधी कानून पारित किए थे।

किसान आंदोलन और नेतृत्व संकट

बाद में तीव्र किसान आंदोलन को देखते हुए हरसिमरन कौर के इस्तीफे के बाद केंद्र सरकार ने ये तीनों कानून वापस ले लिए थे। इसके बाद से ही पंथ से जुड़ी राजनीति में शिरोमणि अकाली दल का प्रभाव घट गया। प्रकाशसिंह बादल के मुख्यमंत्री रहते हुए दल में जैसी मजबूती रही वैसी सुखबीर बादल के नेतृत्व में नहीं देखी गई।

'आप' की रणनीति और पंजाब की चुनौतियां

पंजाब में सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी की भगवंत मान सरकार तरह-तरह की लोकलुभावन योजनाओं से अपनी पकड़ मजबूत बना रही है। दिल्ली खो देने के बाद 'आप' किसी भी हालत में पंजाब को अपने हाथ से जाने देना नहीं चाहती। पंजाब नशाखोरी तथा अवैध रूप से युवाओं को विदेश ले जाने वाले एजेंटों की समस्या से जूझ रहा है। सीमावर्ती राज्य होने से पाकिस्तान से ड्रग्स व हथियारों की तस्करी की चुनौती भी बनी हुई है।

महाराष्ट्र के शबरी नेचुरल्स को मिला जापान का ग्लोबल गुड डिजाइन अवॉर्ड, मन की बात में PM मोदी ने की सराहना

Chef Damu Dies: चेन्नई में 72 साल के शेफ दामू का निधन, 617 डिश बनाकर बनाया था वर्ल्ड रिकॉर्ड

जलगांव में आरएसएस के पथसंचलन के दौरान पथराव और विरोध-प्रदर्शन, पुलिस को करना पड़ा लाठीचार्ज

...असहाय दर्शक बनकर नहीं रह सकते, मिडिल ईस्ट संकट को लेकर एस जयशंकर का बयान; संवाद और कूटनीति को जरूरी बताया

UP चुनाव से पहले कांग्रेस का शक्ति प्रदर्शन, लखनऊ में 200 सीट हक है हमारा के पोस्टर; अखिलेश की बढ़ेगी टेंशन?