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Navabharat Nishanebaaz: सरकार का क्यों नहीं अटेंशन, वांगचुक का कब तक अनशन

Sonam Wangchuk Hunger Strike: सोनम वांगचुक के अनशन, नीट विवाद और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को लेकर उठ रहे राजनीतिक सवालों पर केंद्रित टिप्पणी में सरकार की भूमिका पर चर्चा की गई है।

अंकिता पटेल

NEET Scam Political Row: पड़ोसी ने हमसे कहा, 'निशानेबाज, दिल्ली हाईकोर्ट को चिंता है कि अनशन कर १रहे सोनम वांगचुक को मरना नहीं चाहिए। उनकी जान हर कीमत पर बचाई जाए। ऐसी ही फिक्र प्रधानमंत्री मोदी को क्यों नहीं है? वह झटपट शिक्षामंत्री धर्मेंद्र प्रधान से इस्तीफा ले लें तो वांगचुक अनशन समाप्त कर देंगे।'

हमने कहा, 'मोदी सरकार झुकना नहीं चाहती। नीट परीक्षा घोटाले की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए धर्मेंद्र प्रधान को खुद ही इस्तीफा दे देना चाहिए था। अब मोदी उनकी ढाल बने हुए हैं। चाहें तो जल्दी से मंत्रिमंडल का फेरबदल कर प्रधान को खिसका दें या उनका विभाग बदल दें। कोई रास्ता तो निकालना होगा।'

पड़ोसी ने कहा, 'निशानेबाज, अनशन करके महात्मा गांधी अंग्रेज सरकार को झुका लिया करते थे। जब डॉ. आंबेडकर ने दलितों के लिए अलग चुनाव क्षेत्र बनाने की मांग की तब भी बापू ने इस मांग के खिलाफ यह कहकर अनशन किया था कि दलित भी हिंदू समाज का अंग हैं। अलग चुनाव क्षेत्र का मतलब हिंदुओं को बांटना होगा। बापू की जान बचाने के लिए डॉ. आंबेडकर ने अपनी मांग वापस ले ली थी। पंजाबी सूबे की मांग को लेकर मास्टर तारासिंह ने बहुत लंबा अनशन किया था। आखिर नेहरू सरकार ने उनकी मांग मानकर पंजाब राज्य का गठन किया। पोट्टि श्रीरामुलू ने अनशन कर के अपनी जान दे दी। उनके इस बलिदान की वजह से आंध्रप्रदेश बना था। अनशन में बहुत शक्ति है।'

हमने कहा, 'यूरोप-अमेरिका के फाइव कोर्स मील या 5 बार भोजन करनेवाले लोग नहीं जानते कि अनशन किस चिड़िया का नाम है। वह दिनभर कुछ न कुछ खाते हैं, भूखे नहीं रहते। अनशन सिर्फ भारतीय कर सकते हैं। कितने ही लोग सोमवार, मंगलवार, गुरुवार, शनिवार मे से किसी एक दिन उपवास करते हैं। कुछ एकादशी या पूर्णिमा को व्रत करते हैं। हिंदू महिलाएं ज्यादा उपवास करती हैं। मुस्लिम रमजान महीने में रोजे रखते हैं और सूर्योदय से सूर्यास्त तक कुछ भी नहीं खाते-पीते।'

पड़ोसी ने कहा, 'निशानेबाज, हर इंसान अनशन नहीं कर सकता। इसके लिए प्रबल इच्छाशक्ति या विलपॉवर चाहिए। अनशन करने की प्रैक्टिस भी होनी चाहिए, जैन समुदाय में जब कोई बुजुर्ग प्राण त्यागना चाहता है तो संथारा ले लेता है। भोजन व पानी की मात्रा कम करता चला जाता है और फिर शिथिल व मरणासन्न रहते हुए इस संसार को छोड़ जाता है।'

हमने कहा, 'प्रधानमंत्री मोदी भी नवरात्रि में उपवास करते हैं लेकिन उनकी एनर्जी बनी रहती है। राममंदिर की प्राणप्रतिष्ठा के पूर्व उन्होंने कई दिनों तक उपवास किया था। स्वामी गविंद देव गिरी ने चम्मच से चरणामृत पिलाकर उनका उपवास समाप्त करवाया था।'

लेख- चंद्रमोहन द्विवेदी के द्वारा

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