India-Pakistan Sports Policy: पड़ोसी ने कहा, 'निशानेबाज, हम पाकिस्तान के साथ खेलते हैं, अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा या टूनमिंट में उसे हराते हैं लेकिन इसके बाद उसकी टीम के सदस्यों से हाथ नहीं मिलाते और उसके खेल प्रमुख के हाथों से ट्रॉफी नहीं लेते। उसका बहिष्कार कर देते हैं। यह कैसी नीति है? क्या इसे कहा जाए-गुड़ खाएं लेकिन गुलगुले से परहेज!'
हमने कहा, 'हम जो करते हैं वह बिल्कुल सही है। पाकिस्तान ने पहलगाम में आतंकी हमला कर पर्यटकों की हत्या की थी। इससे भारत में भारी रोष फैल गया।
हमने ऑपरेशन सिंदूर के जरिए पाकिस्तान को उसकी करनी का फल चखा दिया। जिस देश के हाथ खून से रंगे हों, उनसे हमारे खिलाड़ी हाथ क्यों मिलाएं? पिछले साल एशिया कप की चैम्पियन बनने के बाद भी सूर्यकुमार यादव के नेतृत्व वाली हमारी क्रिकेट टीम ने पाकिस्तानी खिलाड़ियों से हाथ मिलाने से इनकार कर दिया था।
इतना ही नहीं, एशियाई क्रिकेट काउंसिल के अध्यक्ष मोहसिन नकवी के हाथों से ट्रॉफी स्वीकार करने से भी मना कर दिया था। काफी देर प्रतीक्षा करने के बाद नकवी हमारी वह ट्रॉफी लेकर पाकिस्तान चले गए। ऐसा ही महिला क्रिकेट एशिया कप में भी हुआ। भारतीय कप्तान हरमनप्रीत कौर की टीम ने चैंपियनशिप जीतने के बाद पाकिस्तानी महिला खिलाड़ियों से हाथ नहीं मिलाया और मोहसिन नकवी के हाथों से ट्रॉफी नहीं ली।'
पड़ोसी ने कहा, 'निशानेबाज, हमारे कबड्डी खिलाड़ी पाकिस्तानी टीम से हाथ मिलाते हैं। स्क्वैश खिलाड़ी भी ऐसा ही करते हैं। हॉकी टीम के खिलाड़ी हाई फाइव करते हैं। मुक्केबाज एक-दूसरे के ग्लव्स को टच करते हैं फिर क्रिकेट में ही ऐसा बहिष्कार हम क्यों करते हैं?'
हमने कहा, 'बात यह है कि मोहसिन नकवी पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड के अध्यक्ष होने के साथ ही पाकिस्तान के गृहमंत्री भी हैं। इसलिए हमारी क्रिकेट टीम उनका बॉयकाट करती है, बीसीसीआई देश में व्याप्त पाकिस्तान विरोधी भावनाओं का सम्मान करता है। हम जिस टूर्नामेंट में जीतें उसका प्रमुख कोई पाकिस्तानी हो तो हम उसके हाथ से ट्रॉफी लेना बिल्कुल पसंद नहीं करेंगे। हम जीत गए और पाकिस्तान को धूल चटाकर चैम्पियन बन गए, इतना ही काफी है। ट्रॉफी लेना जरूरी नहीं है। ट्रॉफी से बड़ी देशभक्ति है।'
लेख- चंद्रमोहन द्विवेदी के द्वारा