लेख में इंदिरा गांधी और प्रधानमंत्री मोदी के देशसेवा के संकल्पों की तुलना की गई है।
मोदी ने जीवन की अंतिम सांस तक जनता की सेवा करने का संकल्प जताया।
'प्रधान सेवक', 'सेवातीर्थ' और 'कर्तव्यपथ' के जरिए सेवा की भावना का उल्लेख किया गया है।
लेख में चुनावी राजनीति, सत्ता की निरंतरता और 'वोट चोरी' के आरोपों पर व्यंग्य किया गया है।
Modi Political Promises and Power Politics: पड़ोसी ने हमसे कहा, 'निशानेबाज, फिल्मी गीतों में कैसी प्रतिबद्धता या कमिटमेंट दिखाई देता है। हीरो गाता है- 'दिल, जिगर नजर क्या है, मैं तो तेरे लिए जां भी दे दूं!' हीरोइन गाती है- 'जब तक है जां, जाने जहां, मैं नाचूंगी तेरे लिए!' ऐसी ही अटूट समर्पण की भावना राजनीति में भी आ जाए तो देश कहां से कहां पहुंच जाएगा!'
हमने कहा, 'ऐसा प्रण करने वाले नेताओं को आपने पहचाना ही कहां है! याद कीजिए जब भुवनेश्वर की आमसभा में इंदिरा गांधी की नाक पर किसी का फेंका हुआ पत्थर लगा था और रक्त बहने लगा था, तो उन्होंने वहीं ऐलान किया था कि मैं अपने खून का कतरा-कतरा बह जाने तक देश की सेवा करूंगी। आखिर उनका वचन सत्य निकला।'
पड़ोसी ने कहा, 'निशानेबाज, इंदिरा की कहानी पुरानी हो गई। अभी आप प्रधानमंत्री मोदी के वचनों पर गौर कीजिए। उन्होंने गुजरात के बनासकांठा जिले के भिलड़ी में भारत गोवंश प्रजनन केंद्र का उद्घाटन करने के बाद सभा में घोषणा की कि मैं अपनी जिंदगी की अंतिम सांस तक देश की जनता की सेवा करता रहूंगा। उनकी इस भीष्म प्रतिज्ञा के बारे में आपकी क्या राय है?'
हमने कहा, 'राजनीति में आगे बढ़ने और अपनी स्थिति मजबूत रखने के लिए सेवा का संकल्प सभी नेता लेते हैं। मोदी खुद को प्रधानमंत्री की बजाय प्रधान सेवक कहते हैं, उन्होंने अपने पीएम ऑफिस का नाम भी सेवातीधं रख लिया है। जहां सेवा की अटूट भावना हो, वहां निवास भी तीर्थ बन जाता है। मोदी ने कांग्रेस के जमाने से चले आ रहे राजपथ को कर्तव्यपथ का नाम दे दिया।'
पड़ोसी ने कहा, 'निशानेबाज, हमारी चुनाव प्रणाली मोदी को संकल्प पूर्ति में मददगार रहेगी। 2024 में 'अबकी बार 400 पार' का पवित्र संकल्प पूरी तरह खंडित हो गया था लेकिन अब ऐसी चूक नहीं होने दी जाएगी। चुनाव आयोग 'ज्ञान योग' जागृत करेगा कि अवतारी पुरुष का दिव्य चिंतन करते हुए बीजेपी को प्रचंड बहुमत दिया जाए। 2047 तक विकसित भारत बनाने के लिए निरंतरता बनाए रखनी होगी। 'एक नेता, एक विचार' का जनाधार बनाना होगा। इसके लिए अपने हिसाब से सिस्टम सुधारा गया है। जिस तरह आरएसएस एक चालकानुवर्ती (एक सरसंघचालक द्वारा संचालित) माना जाता है वैसे ही देश भी सिर्फ मोदी चलाएंगे, अमित शाह ने कहा है- मोदी कहीं नहीं जाएंगे, वैसे चुनाव तंत्र में वोट चोरी और हेराफेरी के चलते मोदी हैं तो मुमकिन है।'
लेख- चंद्रमोहन द्विवेदी के द्वारा