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निशानेबाज: हमारी संस्कृति पर न करे कोई शक गरिमा का चिन्ह माथे का तिलक

Religious Discrimination: लंदन के एक स्कूल में तिलक लगाने पर 8 साल के बच्चे को स्कूल छोड़ना पड़ा। धार्मिक परंपरा को जस्टीफाई करने को कहना भेदभाव का मामला बन गया है।

अंकिता पटेल

नवभारत डिजिटल डेस्क: पड़ोसी ने कहा, 'निशानेबाज, लंदन के विकर ग्रीन प्राइमरी स्कूल में एक 8 साल के बच्चे को तिलक लगाने की वजह से स्कूल छोड़ना पड़ा। स्कूल स्टाफ ने बच्चे से तिलक लगाने की वजह बताने और उसकी धार्मिक प्रथा को जस्टीफाई करने या उचित ठहराने को कहा।

बच्चे को लगातार निगरानी में रखा गया जिससे वह सदमे में आ गया। यह कितना बड़ा भेदभाव है?' हमने कहा, 'अज्ञानी अंग्रेज क्या जानें कि भारत की धार्मिक-सांस्कृतिक परंपरा में तिलक का कितना महत्वपूर्ण स्थान है।

जन्मदिन पर तिलक लगाकर दीर्घायु की कामना की जाती है। विद्वान, ज्ञानी और पंडित तिलक लगाए बगैर बाहर नहीं निकलते। कोई केसर का टीका लगाता है तो कोई हल्दी का! पूर्व केंद्रीय मंत्री तथा बीएचयू में फिजिक्स के प्रोफेसर रहे डा. मुरलीमनोहर जोशी हमेशा माथे पर गोल टीका लगाए रहते हैं।

उत्तरप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री पं. कमलापति त्रिपाठी भी ऐसा टीका लगाया करते थे। किसी का आदर सम्मान करने के लिए उसे तिलक लगाया जाता है।

हमारे यहां राजाओं व सम्राटों का राजतिलक हुआ करता था। भगवान विष्णु के लिए कहा गया है- कस्तूरी तिलकम ललाट पटले वक्षस्थले कौस्तुभं!' पड़ोसी ने कहा, 'निशानेबाज, लंदन के स्कूल प्रबंधन का कहना है कि वह त्वचा पर किसी चिन्ह या स्किन मार्क की अनुमति नहीं देता। इससे यूनिफार्म कोड का उल्लंघन होता है।

जब बच्चे के माता-पिता ने हेडटीचर व स्कूल गवर्नर को तिलक या टीके के बारे में समझाने की कोशिश की तो उन्होंने हिंदू परंपरा को चुनौती दी। 'इनसाइट यूके' ने यह मुद्दा उठाया और कहा कि स्कूल ने समानता कानून या इक्वलिटी एक्ट का उल्लंघन किया है। अभिभावकों ने अपने बच्चे को उस स्कूल से निकाल लिया।' हमने कहा, 'जब विश्व के तमाम देश जंगली थे तब भारत सभ्यता-संस्कृति के सर्वोच्च शिखर पर था।

पश्चिमी देशों को तिलक, स्वस्तिक जैसे चिन्ह नापसंद हैं। हमारे सभी साधु संत तिलक लगाते हैं युद्ध के मैदान में जानेवाले पति को राजपूत महिलाएं तिलक लगाकर विदा करती थीं और उनकी विजय की कामना करती थीं।

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परीक्षा देने जा रहे बच्चे को भी टीका लगाकर व दही खिलाकर भेजा जाता है। तिलक का वैज्ञानिक महत्व यह है कि दोनों भौहों के बीच आज्ञाचक्र होता है। वहां तिलक लगाने से मानसिक ऊर्जा जागृत होती है। इस तरह की समझ की उम्मीद अंग्रेजों से मत कीजिए।'

लेख- चंद्रमोहन द्विवेदी के द्वारा

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