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Navabharat Nishanebaaz: मुफ्तखोरी का मामला संगीन, पुरुष बन गए लाडकी बहिन

Ladki Bahin Scheme: लाडकी बहीण योजना में पात्रता और सत्यापन प्रक्रिया को लेकर सवाल उठ रहे हैं। कथित अनियमितताओं ने योजना के क्रियान्वयन और निगरानी व्यवस्था पर बहस छेड़ दी है।

अंकिता पटेल

Ladki Bahin Eligibility Fraud: पड़ोसी ने हमसे कहा, 'निशानेबाज, महाराष्ट्र में 14,000 पुरुषों ने खुद को महिला बताकर 'लाडकी बहीण' योजना का लाभ उठाया। यह कितना गलत काम है!' हमने कहा, 'जब विधानसभा चुनाव के समय इस लोकलुभावन योजना की घोषणा की गई, तो बहती गंगा में कितने ही लोगों ने हाथ धो लिए। सरकार ने दिया और लोगों ने लिया। वोट और नोट का आदान-प्रदान लोकतंत्र की पहचान बन गया है। जब तक वेरिफिकेशन नहीं होता, तब तक मुफ्त का माल समेटने की प्रवृत्ति बनी रहती है। इसे कहते हैं मुफ्त का चंदन, घिस मेरे नंदन !'

पड़ोसी ने कहा, 'निशानेबाज, इन पुरुषों को लज्जा नहीं आई कि खुद को स्त्री बताकर योजना का लाभ उठा लिया। क्या उन्हें अपनी मर्दानगी का एहसास नहीं हुआ? पुरुषत्व इसमें है कि खुद मेहनत करके पैसा कमाओ।'

हमने कहा, 'कितने ही लोग मौके की ताक में रहते हैं। जो फुकट में मिल जाए उसे तुरंत हजम कर लो। इसे कहते हैं मौकापरस्ती या अवसरवाद! हो सकता है किसी का नाम कमल, विमल, किरण होगा। ऐसे नाम महिला व पुरुष दोनों के हो सकते हैं। आपको मालूम है कि पंजाब में सुरिंदर, राजिंदर, सुखविंदर, सतिंदर जैसे नाम होते हैं। उनमें सिंह लगा तो पुरुष और कौर लगा दो तो महिला!'

पड़ोसी ने कहा, 'निशानेबाज, हम पंजाब की नहीं, महाराष्ट्र की बात कर रहे हैं। चुनावी वादा पूरा करने के लिए मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस सरकार ने लाडकी बहीण योजना की रकम जारी करते हुए लोगों का वेरिफिकेशन नहीं किया। प्रशासन ने यह भी नहीं देखा कि जिस बैंक खाते में रकम जमा की जा रही है, वह मर्द का है या औरत का?'

हमने कहा, 'मनोवैज्ञानिकों ने ऐसे भी मामले पाए हैं कि शरीर पुरुष का रहने पर भी कुछ लोगों में स्त्री जैसी सोच रहती है। उनका मन महिला का रहता है। यह हारमोन्स की गड़बड़ी से होता है। इस टाइप के लोगों को मराठी में बाईमाणुस कहते हैं। इन लोगों ने इस योजना का लाभ उठाया होगा।'

हमने कहा, 'ऐसा कुछ भी नहीं है। सरकारी नौकरी करने वाली, फोर व्हीलर रखने वाली, इनकम टैक्स देने वाली महिलाओं ने भी तो लाडकी बहीण योजना का लाभ उठाया। अब केवायसी मांगा गया है और अपात्रों के नाम काट दिए जाएंगे। वैसे अब तक हजम किया हुआ पैसा वापस निकाल पाना शायद ही संभव हैं!'

लेख- चंद्रमोहन द्विवेदी के द्वारा

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