Middle East Shipping Attacks: पश्चिम एशिया में 28 फरवरी को युद्ध शुरू होने के बाद से, इन तीन नाविकों सहित भारतीय मृतकों की संख्या 7 हो गई है। पिछले चार दिन के दौरान अमेरिकी सेना ने तीन मर्चेंट शिप्स पर हमला किया है, जिनमें भारतीय क्रू सदस्य सवार थे। दो पलाऊ झंडे वाले आयल टैंकरों- मारीवेज व सेटिबेलो पर अमेरिकी हमला 8 व 10 जून को हुआ था, जबकि गिनी-बिसाऊ झंडे वाले बिटुमेन टैंकर एमटी जयवीर, जिसमें 20 भारतीय सवार थे, पर हमला 11 जून को हुआ था। भारत ने पहली बार स्वीकार किया है कि अमेरिकी नौसेना शिप्स पर हमले कर रही है।
शिप्स पर निरंतर हमले निश्चित रूप से चिंताजनक हैं और इसी को मद्देनजर रखते हुए दिल्ली ने अब अमेरिका से जबरदस्त विरोध दर्ज करते हुए इस बात पर बल दिया है कि यह हमले रुकने चाहिएं। जब से अमेरिका व इजराइल ने अपनी बेतुकी जंग ईरान के खिलाफ छेड़ी है तब से लगभग 20,000 नाविक, जिनमें भारतीयों की भी बड़ी संख्या है, इस वैश्विक व्यापार के महत्वपूर्ण गलियारे में फंसे हुए हैं।
कुछ तो विशाल जहाजों पर अटके हुए हैं, जहां फूड व पानी की तो अत्यधिक कमी है। कब किधर से कोई मिसाइल आ जाये, कोई नहीं जानता। ईरान की नाकाबंदी और अमेरिका की जवाबी नाकाबंदी की वजह से इस क्षेत्र में तकरीबन 1,600 मालवाहक जहाजों के फंसने से वैश्विक जहाजरानी पर पेचीदा गांठ लग गई है। सैंकड़ों मिलियन डॉलर के कार्यों को इधर से उधर पहुंचाने की जिम्मेदारी लिए हुए जहाज मालिकों के सामने असम्भव गुत्थी है, अगर वह अपने जहाजों को निकालने के लिए ईरान से सहयोग करते हैं, तो अमेरिकी हमले का खतरा है और अगर अमेरिका से क्लियरेंस ले लिया जाये तो यह आईआरजीसी की गोलियों को आमंत्रित करना होगा। गले में ऐसी हड्डी फंसी है कि न निगलते बन रहा है और न उगलते।
सबसे अधिक बोझ क्रू पर पड़ रहा है। बहुत से नाविक अपने कॉन्ट्रैक्ट के अंतिम चरण में हैं और कर्मचारियों की शिफ्ट या ड्यूटी का समय भी निकल चुका है। इसके बावजूद मुआवजा कहीं दिखाई नहीं दे रहा है। कुछ मालिक नाविकों पर जहाज पर टिके रहने का दबाव बना रहे हैं। मालिकों को डर है कि उन्हें रिप्लेसमेंट क्रू नहीं मिलेगी, जबकि बीमा कम्पनियों व फाइनेंसरों को बढ़ते हुए नुकसान का भय है।
इस समस्या का एकमात्र मानवीय समाधान यह है कि वैश्विक समुदाय मिलकर होर्मुज से जहाजों व क्रू को बाहर निकाले। दुनिया अमेरिका, इजराइल व ईरान पर दबाव बनाये कि वह युद्ध पर विराम लगायें, वैश्विक व्यापार को 28 फरवरी से पहले जैसा होने दें और खुद भी चैन से रहें व दूसरों को भी चैन की सांस लेने दें।
अगर समुद्र के मुख्य रास्तों का मनमर्जी से सैन्यकरण किया जाता रहेगा तो अंतर्राष्ट्रीय व्यापार की अपने आप धज्जियां उड़ जाएंगी, भारत के अमेरिका, इजराइल व चीन से अच्छे संबंध हैं। दिल्ली को चाहिए कि वह खुले समुद्री मार्गों व नाविकों की सुरक्षा के लिए न सिर्फ अंतरराष्ट्रीय अभियान आरंभ करे बल्कि उसका नेतृत्व भी करे।
उत्तर प्रदेश में जिला देवरिया के गांव सुरौली के छोटे से मकान में एक कुर्सी पर पांच साल का राजवीर व उसकी दो साल की छोटी बहन वानिका बैठ हुए थे, असमंजस में इधर-उधर देखते हुए, जो त्रासदी घटित हो चुकी थी उससे बेखबर, शायद उनकी निगाहें उस व्यक्ति को तलाश रही थीं, जो अब कभी नहीं लौटेगा और जिसके लिए उनकी मां, दादा-दादी, रिश्तेदार व पड़ोसी सब रो रहे थे।
उनका 31 वर्षीय पिता शिवानंद चौरसिया (इंजन फिटर) उन तीन भारतीय नाविकों में शामिल था, जिनकी मौत इस वजह से हुई थी; क्योंकि अमेरिकी सेना ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के निकट ओमान तट पर खड़े पलाऊ-झंडे वाले आयल टैंकर एमटी सेटिबेलो पर मिसाइल स्ट्राइक की थी। उस समय टैंकर में 24 भारतीय क्रू सदस्य थे, जिनमें से 21 को रेस्क्यू कर लिया गया था। अन्य दो मृतकों की पहचान आदित्य शर्मा (डेक कैडेट) व पतनाला सुरेश (चीफ इंजीनियर) के रूप में की गई है।
लेख- नरेंद्र शर्मा के द्वारा