India Russia Ukraine Peace: दीर्घकाल से चले आ रहे रूस-यूक्रेन युद्ध को समाप्त न करने की दिशा में सार्थक उपायों की भारत खोज कर रहा है। विगत कुछ समय से इसके प्रयास जारी हैं। विदेशमंत्री एस। जयशंकर ने रूस और यूक्रेन के नेतृत्व से संपर्क किया है। प्रधानमंत्री मोदी ने भी रूस के राष्ट्रपति पुतिन से शांति प्रयासों को लेकर चर्चा की है। मोदी की अपील है कि दुनिया के देश अंतहीन युद्ध से बाहर निकलकर युद्ध के अंत की ओर बढ़ें।
यदि भारत के कूटनीतिक प्रयासों से रूस-यूक्रेन के बीच युद्ध समाप्त हो जाता है, तो यह उन देशों के साथ ही समूचे विश्व के लिए बहुत अच्छी बात होगी। युद्ध खत्म होना मानवता के हित में अत्यंत आवश्यक है। सभी इसका हृदय से स्वागत करेंगे। रूस को भारत पर भरोसा है। दोनों देशों की मित्रता कई दशक पुरानी है इसलिए रूस को जितनी अच्छी तरह भारत समझा सकता है, वैसा अन्य कोई नहीं।
भारत भी ऐसा समाधान चाहेगा, जिसमें उसके मित्र रूस का कोई नुकसान न होने पाए। पिछले समय अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप ने रूस और यूक्रेन के बीच शांति समझौता कराने को लेकर व्यर्थ की डींग हांकी थी, लेकिन वह जेलेंस्की या पुतिन को राजी नहीं कर पाए। ट्रंप जल्दबाजी में समझौता कराने की सोच रहे थे।
वह पुतिन की आशंकाओं को दूर नहीं कर पाए, क्योंकि अमेरिका द्वारा प्रायोजित नाटो सैनिक गठबंधन के तहत यूक्रेन को शत्र पूर्ति जारी थी। ट्रंप ने व्हाइट हाउस में जेलेंस्की को घुड़की दी व अपमान करके बाहर निकाला, फिर भी वह यूक्रेन पर दबाव नहीं डाल पाए। बड़बोले ट्रंप के सारे प्रयास विफल रहे। उनका धमकाने वाला रवैया भी कोई पसंद नहीं करता। भारत की बात अलग है।
भारत अपनी जिम्मेदारीपूर्ण कूटनीति की वजह से विश्व में सम्मानित है। वह शांति के मसले को हानि-लाभ के तराजू में नहीं तौलता। इसलिए जब शंघाई सहयोग संगठन के शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने पुतिन से शांति व युद्ध समाप्ति को लेकर चर्चा की, तो न केवल पुतिन बल्कि सारी दुनिया ने इसे सुना। इसके बाद विदेशमंत्री जयशंकर ने अपने प्रयास शुरू किए। युद्ध में रूस और यूक्रेन दोनों ने काफी कुछ खोया है। जनधन की हानि तथा विनाश से दोनों देश प्रभावित हुए हैं।
युद्ध शुरू करना आसान होता है, खत्म करना मुश्किल। रूस और यूक्रेन यही चाहेंगे कि दोनों की नाक बच जाए। कोई जीता, कोई हारा जैसी बात न हो। यूक्रेन के रूसी भाषा बोलने वाले क्षेत्रों पर व्लादिमीर पुतिन कब्जा छोड़ना नहीं चाहेंगे। यूक्रेन को भी समझना होगा कि पश्चिमी यूरोप के देश और नाटो उसके कंधे पर बंदूक रखकर रूस को चुनौती दे रहे हैं। वह सिर्फ घातक शस्त्र, मिसाइल व ड्रोन देते हैं जबकि यूक्रेनवासियों को जान गंवानी पड़ती है। रूस का यह भ्रम पहले ही चकनाचूर हो चुका है कि वह कुछ हफ्तों की लड़ाई में यूक्रेन पर कब्जा कर लेगा।
लेख- चंद्रमोहन द्विवेदी के द्वारा