

Raj Thackeray Statement On PM Narendra Modi: महाराष्ट्र की राजनीति में अक्सर कई गर्मागर्म मुद्दे सामने आते रहते हैं, लेकिन हाल ही में पुणे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तस्वीर को लेकर जो विवाद शुरू हुआ, उसने राज्य के सियासी गलियारों में भारी हलचल मचा दी है। इस पूरे विवाद पर मनसे के प्रमुख राज ठाकरे ने आखिरकार अपनी चुप्पी तोड़ी है।
ठाणे में आयोजित मनसे के पदाधिकारियों के एक बड़े सम्मेलन में राज ठाकरे ने इस संवेदनशील मुद्दे पर पहली बार खुलकर बात की और अपनी पार्टी की भूमिका को स्पष्ट किया।
इस विवाद की जड़ें कुछ दिनों पहले अमित ठाकरे के पुणे दौरे से जुड़ी हैं। पुणे दौरे के दौरान अमित ठाकरे की मौजूदगी में एक कॉलेज के ऑफिस में लगी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की फोटो को दीवार से हटा दिया गया था, जिससे बड़ा हंगामा खड़ा हो गया।
इस घटना के बाद मनसे की छात्र इकाई के कुछ कार्यकर्ताओं के खिलाफ पुलिस ने कार्रवाई करते हुए उन्हें गिरफ्तार भी किया था। यही नहीं, इस मुद्दे के विरोध में मुंबई की सड़कों पर भाजपा और मनसे के कार्यकर्ता आमने-सामने आ गए थे और दोनों गुटों के बीच काफी तनाव बढ़ गया था।
ठाणे जिले के सम्मेलन में इस विवाद पर अपनी भूमिका स्पष्ट करते हुए राज ठाकरे ने कहा कि प्रधानमंत्री का पद देश का सर्वोच्च और गरिमामयी संवैधानिक पद है। उन्होंने कहा, सरकारी कार्यालयों में देश के प्रधानमंत्री की तस्वीर लगाई जानी चाहिए। इसे लगाया ही जाना चाहिए क्योंकि वे हमारे प्रधानमंत्री हैं। भले ही हमारे उनके साथ सौ मतभेद क्यों न हों, लेकिन उनके पद का सम्मान होना चाहिए। स्कूलों, सरकारी कार्यालयों और अन्य संस्थानों को पीएम की तस्वीर लगानी चाहिए।
लेकिन इसके तुरंत बाद राज ठाकरे ने अपनी सबसे बड़ी आपत्ति और शर्त को सामने रखा। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि देश के महान राष्ट्रनायकों और महापुरुषों की कतार में वर्तमान नेताओं या प्रधानमंत्रियों की तस्वीर नहीं लगाई जा सकती।
राज ठाकरे ने जोर देकर कहा, छत्रपति शिवाजी महाराज, डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर और महात्मा ज्योतिराव फुले जैसी महान विभूतियों की कतार में कोई दूसरा व्यक्ति नहीं बैठ सकता।
मनसे प्रमुख ने संस्थानों को एक स्पष्ट निर्देश और सलाह दी कि प्रधानमंत्री की तस्वीर लगाते समय उन्हें बेहद सतर्कता बरतनी चाहिए। उन्होंने कहा, यह फोटो निश्चित रूप से लगाई जानी चाहिए, लेकिन उसे किसी दूसरी दीवार पर लगाया जाना चाहिए। इसे हमारे महान महापुरुषों की कतार में शामिल नहीं किया जाना चाहिए।
अपने तीखे और बेबाक अंदाज के लिए जाने जाने वाले राज ठाकरे ने सभी सरकारी और शैक्षणिक संस्थानों को इस संबंध में सचेत रहने की चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि यह बात सिर्फ स्कूलों या कॉलेजों पर ही नहीं, बल्कि कोर्ट पर भी लागू होती है और उन्हें भी यह बात समझनी चाहिए।
राज ठाकरे ने कड़ा रुख अपनाते हुए अंतिम चेतावनी दी, सभी संस्थानों को यह अच्छी तरह पता होना चाहिए कि किस कतार में किसके फोटो लगाने हैं और देश के प्रधानमंत्री का फोटो किस दीवार पर प्रदर्शित किया जाना चाहिए। इसलिए सभी लोग अभी ही अपनी यह गलती सुधार लें।
राज ठाकरे के इस बयान के बाद अब राज्य की राजनीति में इस बात को लेकर नई बहस छिड़ गई है कि क्या भविष्य में सरकारी दफ्तरों और शैक्षणिक संस्थानों में तस्वीरों को लगाने के प्रोटोकॉल में कोई बदलाव देखने को मिलेगा।