India 2047 Developed Nation Vision: लाल किले से अपने लगातार 13 वें संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने अतीत की उपलब्धियों का तो ब्योरा दिया पर सबसे ज्यादा देर तक 21 साल बाद आने वाली आजादी कि 100 वीं वर्षगांठ यानी साल 2047 पर बोले, जब उनके मुताबिक भारत विकासशील से विकसित देश बन जाएगा, पीएम ने विकास के लक्ष्य को एक नई संरचना 'सप्तधारा' से जोड़ते हुए उत्पादन, कृषि-खाद्य प्रसंस्करण, तकनीक नवाचार, गति शक्ति, रक्षा, हरित-नीली अर्थव्यवस्था और सॉफ्ट पावर को भारत की भावी ताकत के सात आधार बताया।
उन्होंने कहा, 'अब भारत को छोटे लक्ष्य नहीं, बड़ी छलांग के लिए तैयार होना होगा।' उनके इस संबोधन में सेमीकंडक्टर से परमाणु ऊर्जा तक, युवाओं के एआई कौशल से वैश्विक कंपनियों तक और आत्मनिर्भरता से रणनीतिक सुरक्षा तक स्पष्ट लक्ष्य दिखे।
यह लक्ष्य इसलिए भी काल्पनिक उड़ान नहीं लगती, क्योंकि विश्व बैंक भी भारत की 2047 की महत्वाकांक्षा को उच्च्च-मध्य आय वाले देश की दिशा में आगे बढ़ने से जोड़ता है। उसके अनुसार 2000 के बाद भारत की अर्थव्यवस्था वास्तविक अर्थों में लगभग 4 गुना हुई है और प्रति व्यक्ति आय लगभग 3 गुना हुई है। लेकिन यह भी याद रखना होगा कि पिछले डेढ़ दशकों में अमीरों और गरीबों में फर्क सबसे ज्यादा बढ़ा है।
विकसित भारत के लक्ष्य को साधने के लिए हमारा केवल बड़ी अर्थव्यवस्था होना पर्याप्त नहीं होगा। हमें बड़े पैमाने पर ऐसी वस्तुएं बनानी होंगी, जिन्हें दुनिया खरीदे। इसलिए निर्माण क्षेत्र का मजबूत होना निर्णायक है। असली चुनौती केवल 'मेड इन इंडिया' नहीं, बल्कि 'मेड इन इंडिया, ग्लोबल क्वालिटी' है। यदि हम 2047 तक विकसित राष्ट्र बनना चाहते हैं, तो हमें कम लागत वाले निर्माता से आगे बढ़कर उच्च गुणवत्ता, डिजाइन, ब्रांड और तकनीक का वैश्विक केंद्र बनना होगा।
पीएम के भाषण में सेमीकंडक्टर और महत्वपूर्ण खनिजों पर जोर इस बात का संकेत है कि आत्मनिर्भरता की परिभाषा बदल रही है। प्रधानमंत्री ने कहा है कि भारत में 3 सेमीकंडक्टर संयंत्रों में उत्पादन शुरू हो चुका है और आने वाले वर्षों में 5 से 8 और संयंत्र आने की संभावना है।
आर्थिक सर्वेक्षण के मुताबिक भारत सेमीकंडक्टर मिशन के तहत लगभग 1।60 लाख करोड़ के निवेश वाले 10 प्रोजेक्ट आगे बढ़ा चुका है। 2047 का भारत आज के बच्चों और युवाओं का भारत होगा। इसलिए प्रधानमंत्री ने अगले एक वर्ष में एक करोड़ युवाओं को एआई कौशल प्रशिक्षण देने और प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए मुफ्त ऑनलाइन कोचिंग उपलब्ध कराने की घोषणा की है। प्रधानमंत्री कि एआई ट्रेनिंग संबंधी यह घोषणा इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि आज एआई रोजगार की प्रकृति बदल रहा है।
भारत के सामने चुनौती केवल करोड़ों युवाओं को रोजगार देने भर की नहीं, बल्कि उन्हें ऐसे कौशल देने की है जिनकी मांग 2030 और उसके बाद भी बनी रहे। यदि 2047 का भारत ज्ञान, तकनीक और नवाचार का वैश्विक केंद्र बनना चाहता है, तो स्कूल से विश्वविद्यालय और विश्वविद्यालय से उद्योग तक पूरी कौशल-श्रृंखला को बदलना होगा। उन्होंने परमाणु ऊर्जा क्षमता में बड़े विस्तार और नए रिएक्टरों की दिशा में आगे बढ़ने की बात कही।
आर्थिक विकास के साथ बिजली की मांग बढ़ेगी। इलेक्ट्रक वाहन, डाटा सेंटर, एआई, सेमीकंडक्टर और आधुनिक उद्योग सबको विशाल मात्रा में भरोसेमंद ऊर्जा चाहिए, इसलिए ऊर्जा आत्मनिर्भरता राष्ट्रीय सुरक्षा का विषय भी है। कुल मिलाकर जहां 2047 के विकसित भारत का सपना जितना सुखद लगता है, इसे हकीकत का रूप देने में परीक्षा उतनी ही कठिन होगी।
तेज जीडीपी वृद्धि तो जरूरी ही है, उससे भी ज्यादा जरुरी होगा कि विकास का लाभ गांवों, छोटे शहरों, महिलाओं, किसानों, श्रमिकों और मध्यम वर्ग तक पहुंचे। साथ ही रोजगार की गुणवत्ता, शिक्षा, स्वास्थ्य, न्यायिक सुधार, शहरीकरण और कृषि उत्पादकता पर गंभीरता जरूरी होगी। अगर हमने ये कसौटियां साध लीं तो 2047 में हमें विकसित देश बनने से कोई नहीं रोक सकता।
कुल मिलाकर जहां 2047 के विकसित भारत का सपना जितना सुखद लगता है, इसे हकीकत का रूप देने में परीक्षा उतनी ही कठिन होगी। तेज जीडीपी वृद्धि तो जरूरी ही है, उससे भी ज्यादा जरूरी होगा कि विकास का लाभ गांवों, छोटे शहरों, महिलाओं, किसानों, श्रमिकों और मध्यम वर्ग तक पहुंचे। साथ ही रोजगार की गुणवत्ता, शिक्षा, स्वास्थ्य, न्यायिक सुधार, शहरीकरण और कृषि उत्पादकता पर गंभीरता जरूरी होगी। अगर हमने ये कसौटियां साध लीं तो 2047 में हमें विकसित देश बनने से कोई नहीं रोक सकता।
-लेख लोकमित्र गौतम के द्वारा