(साेर्स: नवभारत डिजाइन फोटो) 
नवभारत विशेष

नवभारत संपादकीय: बाल यौन शोषण वाले विज्ञापनों पर केंद्र सख्त, मेटा को एक हफ्ते का अल्टीमेटम

Instagram Child Safety Ads: बाल यौन शोषण से जुड़े कथित विज्ञापनों पर केंद्र सरकार ने मेटा को एक सप्ताह के भीतर कार्रवाई करने और इंस्टाग्राम से ऐसी सामग्री हटाने का निर्देश दिया है।

अंकिता पटेल

Instagram Child Safety Policy: बीबीसी आई द्वारा भंडाफोड़ किए जाने के बाद केंद्र सरकार ने मेटा को सख्त चेतावनी दी है कि वह एक सप्ताह के भीतर बाल यौन शोषण को बढ़ावा देने वाले विज्ञापनों को इंस्टाग्राम से हटा दे। यह केवल नियामक सूचना नहीं है, बल्कि विश्व की सबसे बड़ी प्रौद्योगिकी कंपनी की कड़ी निंदा है, जो मानवता के खिलाफ अपराध को अपने प्लेटफार्म से प्रचारित होने दे रही है।

इलेक्ट्रॉनिक्स व सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने इंस्टाग्राम से ऐसे गंदे विज्ञापन हटाने व अपनी करतूत का स्पष्टीकरण देने को कहा। यह अत्यंत निंदनीय है कि विकृत मानसिकता वाली शोषणकर्ताओं के लिए ऐसे विज्ञापनों को मेटा ने अनुमति दे रखी थी।

यूजर्स से मुनाफा कमाने वाले प्लेटफार्म का दायित्व है कि वह अपनी विज्ञापन प्रणाली व सर्च मैकेनिज्म यौन अपराधियों तक न पहुंचने दे। मेटा ने दावा किया है कि उसने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), सेफ्टी टूल व सामग्री (कंटेंट) के सुधार में अरबों डॉलर खर्च किए हैं।

इतने पर भी उसके प्लेटफार्म में बाल यौन शोषण से संबंधित विज्ञापन आना यही बताता है कि तकनीकी रूप से कमी बनी हुई है और लापरवाही कायम है, भारत विश्व के सबसे बड़े डिजिटल मार्केट में से एक है और यहां के लाखों नाबालिग सोशल मीडिया का इस्तेमाल करते हैं।

हानिकारक कंटेंट पर टेक कंपनियों पर सख्त कार्रवाई जरूरी

साइबर स्पेस में आपराधिक नेटवर्क चलाने वाले विज्ञापनों के जरिए शिकार खोजते हैं जिस पर यथाशीघ्र कठोर प्रतिबंध लगना चाहिए। केवल नोटिस देने और स्पष्टीकरण मांगने से काम नहीं चलेगा। ऐसी मनमानी करने वाली प्रौद्योगिकी कंपनियों पर भारी जुर्माना लगाने व निर्देश नहीं मानने पर उनका प्रसारण बंद करने की चेतावनी देनी होगी।

जहां जरूरी है वहां उनके कार्यकलापों का निष्पक्ष ऑडिट होना चाहिए, उनकी आपराधिक जबाबदारी तय की जाए। बच्चों की सुरक्षा अत्यंत महत्वपूर्ण है। प्लेटफार्म से नुकसानदेह सामग्री तुरंत हटाई जानी चाहिए।

बच्चों की सुरक्षा पर मेटा की जवाबदेही तय हो

हर सोशल मीडिया प्लेटफार्म को अपने कंटेंट के लिए पूरी तरह जिम्मेदार माना जाए। ऐसे अकाउंट तत्काल बंद किए जाएं, मेटा को समझना होगा कि भारत में बाल संरक्षण के लिए कठोर कानून है। यूरोपीय यूनियन में भी बाल संरक्षण को लेकर मेटा पर कार्रवाई हो रही है।

जांच से पता चला है कि 13 वर्ष से कम आयु के बच्चों की ऐसे आपत्तिजनक प्लेटफार्म तक पहुंच को रोकने के लिए फेसबुक व इंस्टाग्राम ने पर्याप्त उपाय नहीं किए। मेटा का रिकमंडेशन एल्गोरिदम बच्चों के व्यवहार को एडिक्टिव बना रहा है।

बीबीसी की जांच में पता चला है कि इंस्टाग्राम पर विज्ञापन की वजह से बाल-शोषण सामग्री बिक्री के लिए उपलब्ध हुई। मेटा को भारत में रहना है तो यहां के कानून मानने होंगे और बच्चों की सुरक्षा से कोई खिलवाड़ अपराध माना जाएगा।

लेख- चंद्रमोहन द्विवेदी के द्वारा

आज की ताजा खबर 22 अगस्त LIVE: बीजेपी मुख्यालय पहुंचे PM मोदी, नई टीम से कर रहे मुलाकात

POWERGRID Vacancy 2026: अप्रेंटिस के 270 पदों पर भर्ती, 25 अगस्त से आवेदन शुरू; जानें योग्यता व स्टाइपेंड

अखिलेश यादव ने गिनाए परिवारवाद के फायदे, बताया- आखिर क्यों नहीं टूटी समाजवादी पार्टी

महाराष्ट्र में होगा जंतर मंतर से बड़ा आंदोलन! कांग्रेस सांसद का बड़ा दावा, बोलीं- हम जेल भी जाने को तैयार हैं

वंदे मातरम् पर BJP का बड़ा वार, कांग्रेस के 1937 वाले फैसले के खिलाफ पारित किया प्रस्ताव