गणेशोत्सव के बीच महाराष्ट्र में बारिश संकट फोटो सोर्स- नवभारत डिजाइन
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नवभारत संपादकीय: गणपति बप्पा से बारिश की आस, महाराष्ट्र में सूखती फसलों ने बढ़ाई किसानों की चिंता

Maharashtra Rain Crisis: गणेशोत्सव के बीच महाराष्ट्र के कई हिस्सों में कम बारिश से किसान परेशान हैं। विदर्भ, मराठवाड़ा और मध्य महाराष्ट्र में खरीफ फसलों पर संकट है।

अंकिता पटेल

Maharashtra Rain Crop Damage: महाराष्ट्र सहित राष्ट्र के सामने व्याप्त विषम परिस्थितियों में गणेशोत्सव की पावन बेला में सभी की प्रार्थना है कि हे विघ्नहर्ता समस्त संकट दूर करो और प्रतिकूलता को अनुकूलता में बदलकर हमारे इस राष्ट्र पर रिद्धी-सिद्धी सहित कृपा बनाए रखो। महाराष्ट्र में वर्षा कम हुई। विदर्भ, मराठवाड़ा व मध्य महाराष्ट्र के अनेक जिलों को वर्षा की प्रतीक्षा है। शुरू में बारिश आकर फिर लंबे समय तक गायब हो गई। इससे कहीं-कहीं दोबारा फसल बोनी पड़ी।

सोयाबीन, कपास, मूंग, उड़द की खरीफ फसलें सूखने लगीं। कुछ स्थानों पर तो किसानों ने निराश होकर खड़ी फसल पर ट्रैक्टर चला दिया क्योंकि पौधों में दाना ही नहीं भरा था। वर्षा न होने से मध्यम व क्योंकि पौधों में दाना ही नहीं भरा था। वर्षा न होने से मध्यम व लघु जलाशयों में जलसंग्रह में वृद्धि नहीं हो पाई। इसलिए रबी मौसम में सिंचाई की दिक्कत जा सकती है।

कम बारिश से जल संकट की आहट

पेयजल संकट भी उत्पन्न हो सकता है। मानसून भरोसेमंद नहीं रहा। इसलिए पानी बचाने और जमीन में पुनर्भरण पर ध्यान देना होगा। ऐसी सिंचाई प्रणाली को अपनाना होगा जिससे जल की बचत हो। समूचे देश में 15 प्रतिशत और महाराष्ट्र में 17 प्रतिशत कम बारिश हुई है। इसे जल संकट की पूर्व सूचना माना जा सकता है।

खेतों में दरारें पड़ गई हैं। ऐसी स्थिति में फसलों के नुकसान का तत्काल सही पंचनामा होना चाहिए। किसानों को फसल बीमा की रकम देना, कर्जवसूली रोकना, पशुचारे की छावनी शुरू करना, पेयजल का नियोजन करना जैसे कदम उठाकर सरकार किसानों को राहत दे सकती है। महाराष्ट्र के शहरी क्षेत्रों में भी चुनौतियां कायम हैं।

सुरसा के मुख के समान महंगाई बढ़ती चली जा रही है। इससे सामान्य जनों का जीवन दूभर हो गया है। बेरोजगारी से युवा वर्ग परेशान गया है। बेरोजगारी से युवा वर्ग परेशान है। यातायात व ट्रैफिक जाम की समस्याएं बढ़ती जा रही हैं। सड़कों पर जानलेवा गड्ढे हो गए हैं। सड़क हादसों में वृद्धि हुई है। महिला सुरक्षा का प्रश्न गंभीर है। जरा-सी उत्तेजना में हत्याएं होने लगी हैं। समाज आखिर किस दिशा में जा रहा है? महाराष्ट्र में गणपति पूजन का विशेष महत्व है लेकिन श्रद्धा की बजाय शोरगुल और दिखावा बढ़ता चला जा रहा हैं।

डीजे की तेज ध्वनि, सड़कों का आवागमन रोककर देर तक नाचना क्या यही भक्ति है? डीजे के हाई डेसिबल से वृद्धों, बीमारों, बच्चों व विद्यार्थियों को तकलीफ होती है। इसलिए उत्सव उत्साह और उमंग से मनाया जाए लेकिन सभी की सुविधा का ध्यान भी रखना आवश्यक है। बुद्धि विधाता गणेश सभी को सुबुद्धि दें और सर्वत्र मंगलमय सुखद वातावरण बने, यही कामना है।

लेख- चंद्रमोहन द्विवेदी द्वारा

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