

Thane Coastal Road Relief: मुंबई-ठाणे के बीच बढ़ते यातायात दबाव को कम करने और घोड़बंदर रोड के यात्रियों को राहत देने वाली ठाणे कोस्टल रोड-1 परियोजना ने निर्माण की रफ्तार पकड़ ली है। महज 14 महीनों में परियोजना का 40 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है।
खारेगांव टोल नाका से गायमुख तक बन रहे इस नए कॉरिडोर के शुरू होने के बाद मुंबई-ठाणे क्षेत्र में यातायात का दबाव कम होने, आवागमन अधिक सुगम होने और नाशिक, भिवंडी के साथ ही गुजरात की ओर कनेक्टिविटी बेहतर होने की उम्मीद है।
शहर की ट्रैफिक तस्वीर बदलने वाली ठाणे कोस्टल रोड-1 परियोजना में दो सितंबर तक महज 14 महीनों में परियोजना का 40 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। कुल 426 वर्किंग पाइल में से 77 फीसदी यानी 332 तैयार हो चुके हैं। वहीं 426 में से 65 फीसदी यानी 277 पियर का निर्माण पूरा हो गया है।
460 पियर कैप की कास्टिंग भी की जा चुकी है। आई-गर्डर लगाने का काम भी तेजी से जारी है। कुल 1,632 आई-गर्डर में से 30 फीसदी यानी 501 लगाए जा चुके हैं। इसके साथ ही 13 डेक स्लैब स्पैन भी तैयार हो चुके हैं।
भारत में पहली बार जमीन पर मोनोपाइल तकनीक परियोजना की सबसे खास बात इसकी आधुनिक इंजीनियरिंग तकनीक है।
भारत में पहली बार किसी ग्रीनफील्ड रोड परियोजना में जमीन पर सिंगल-पाइल, सिंगल-पियर प्रणाली के साथ मोनोपाइल फाउंडेशन का इस्तेमाल किया जा रहा है। इससे परियोजना को आधुनिक और मजबूत तकनीकी आधार मिलेगा।
ठाणे कोस्टल रोड-1 में 240 मीटर लंबा क्रीक ब्रिज बनाया जा रहा है। इसके अलावा मैग्रोव क्षेत्र से होकर 8.11 किलोमीटर लंबी एलिवेटेड रोड तैयार की जा रही है। पर्यावरणीय संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए आधुनिक सड़क ढांचे का निर्माण किया जा रहा है।
गायमुख पर यह कॉरिडोर आगामी गायमुख फाउंटेन होटल टनल से सीधे जुड़ेगा। दोनों परियोजनाएं मिलकर ठाणे-भाईंदर के बीच निर्वाध कनेक्टिविटी उपलब्ध कराएंगी। इससे घोड़बंदर रोड पर यातायात का दबाव घटने के साथ ठाणे की शहरी परिवहन व्यवस्था को नई गति मिलने की उम्मीद है।
नया कॉरिडोर केवल यात्री यातायात के लिए ही महत्वपूर्ण नहीं होगा, बल्कि माल ढुलाई के लिहाज से भी रणनीतिक भूमिका निभाएगा। इससे वाढवण पोर्ट, जेएनपीटी, दक्षिण महाराष्ट्र और कर्नाटक की और जाने वाले मालवाहक यातायात को बेहतर कनेक्टिविटी मिलेगी।
रणनीतिक फ्रेट कॉरिडोर के रूप में विकसित यह मार्ग घोड़बंदर रोड का यातायात दबाव कम करेगा। यह एनएच-160 यानी मुंबई-नासिक हाईवे को गायमुख से जोड़ेगा।
मैग्रोव क्षेत्र को बचाने के लिए इसका बड़ा हिस्सा वायाडक्ट और पुलों के रूप में बनाया जा रहा है। 40-45 मीटर चौड़ी सड़क से स्थानीय और अंत्तर-शहरी यातायात को अलग कर घोडबंदर रोड का संचालन सुचारू होगा।
ठाणे कोस्टल रोड-1 को भविष्य की कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं से जोड़ा जाएगा।
इसमें ठाणे कोस्टल रोड-2, साकेत-अमाने एलिवेटेड कॉरिडोर और कासारवडवली-खारबाव रोड प्रमुख हैं।
इन परियोजनाओं के साथ जुड़ने के बाद यह कॉरिडोर ठाणे और पूरे मुंबई महानगर क्षेत्र के अगली पीढ़ी के परिवहन नेटवर्क के लिए अहम रीढ़ के रूप में उभर सकता है।