दिल्ली या मौत की राजधानी? (AI जेनरेटेड इमेज)
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Explainer: दिल्ली क्यों बनती जा रही मौत की राजधानी, हर साल सैकड़ों घटनाएं; फिर भी नहीं सुधरे हालात, वजह क्या?

Delhi Building Collapse: एनसीआरबी आंकड़ों, दिल्ली-NCR के प्रमुख हादसों, प्रशासनिक चूक और समाधान पर गहराई से विश्लेषण, ताकि समझा जा सके कि 'दिल्ली मौत की राजधानी' क्यों बनती जा रही है।

मनोज आर्या

Delhi Building Collapse Explained: दिल्ली के सत्य निकेतन (Satya Niketan) इलाके में रविवार दोपहर करीब 01:30 बजे अचानक एक पांच मंजिला इमारत ढह गई। खबर लिखे जाने तक इस हादसे में तीन छात्रों की मौत की बात कही जा रही है। जबकि, तीन छात्र गंभीर रूप से घायल हैं। फिलहाल मौत के आंकड़ों को लेकर आधिकारिक तौर पर कोई पुष्टि नहीं हुई है। वहीं, मलबे के अंदर अभी भी कई छात्रों के फंसे होने की आशंका जताई जा रही है।

घटना को लेकर दिल्ली पुलिस (Delhi Police) की ओर से जारी बयान में कहा गया कि स्थानीय लोगों से पूछताछ में पता चला है कि यह 40-50 साल पुरानी इमारत थी, जिसमें एक बेसमेंट और पांच ऊपरी मंजिलें थीं। इस इमारत में हॉस्टल चल रहा था। घटना के समय बिल्डिंग के बेसमेंट में मरम्मत का काम चल रहा था।

दिल्ली या मौत की राजधानी?

दिल्ली में पिछले कुछ सालों से लगातार इस तरह की घटनाएं होती रही हैं। हर बार कार्रवाई के नाम पर खानापूर्ति किया जाता रहा है, जिसका नतीजा आम लोग भुगतने को मजबूर हैं। देश के अलग-अलग हिस्सों से उच्च शिक्षा और करियर बनाने के सपने लेकर दिल्ली में आने वाले कई छात्र प्रशासन की इसी लापरवाही के कारण अपनी जान गंवा देते हैं। तब यह सवाल पूछना जरूरी हो जाता है कि 'दिल्ली या मौत की राजधानी'?

दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में 6 सितंबर को गिरी इमारत की तस्वीर

दिल्ली में यह कोई पहली घटना है जब जिम्मेदार अधिकारियों की नजरअंदाजगी की वजह से किसी का बेटा, भाई और किसी का पूरा परिवार चंद मिनटों में इस दुनिया को छोड़ चुका होता है। हाल ही में साकेत एक होटल में लगी आग की घटना हो या मुखर्जी नगर की लाइब्रेरी में जलभराव की खबर। इसमें हमेशा ही निर्दोष लोग मारे जाते हैं। आइए इस एक्सप्लेनर के जरिए जानने की कोशिश करते हैं कि दिल्ली में लगातार इस तरह की घटनाएं क्यों हो रही हैं और इसको कैसा रोका जा सकता है?

इस एक्सप्लेनर में क्या-क्या जानेंगे?

  • दिल्ली-NCR में हुई प्रमुख घटनाएं

  • इन घटनाओं की असली वजह क्या?

  • दिल्ली में क्यों नहीं सुधरे हालात?

  • घटनाओं पर कैसे लगेगी ब्रेक?

दिल्ली-NCR में हुई प्रमुख घटनाएं

दिल्ली-NCR में पिछले 10 वर्षों (2016 से 2026 तक) के दौरान इमारत ढहने की सैकड़ों घटनाएं सामने आई हैं। इन हादसों में कई निर्दोष लोगों ने अपनी जान गंवाई और भारी संख्या में लोग घायल हुए। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) की वार्षिक रिपोर्ट्स के अनुसार, भारत में हर साल औसतन 1,500 से 2,000 लोग विभिन्न प्रकार के ढांचागत हादसों (बिल्डिंग, पुल आदि) में मारे जाते हैं।

दिल्ली-NCR के अनुमानित आंकड़े के मुताबिक, पिछले 10 वर्षों में केवल दिल्ली-NCR (दिल्ली, नोएडा, ग्रेटर नोएडा, गुरुग्राम, गाजियाबाद) में इमारत ढहने की छोटी-बड़ी घटनाओं में 250 से अधिक लोगों की मौत हुई है और 500 से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं। इन सभी घटनाओं के बारे में यहां विस्तार से जानते हैं।

2018 का शाहबेरी (ग्रेटर नोएडा) हादसा

ग्रेटर नोएडा वेस्ट के शाहबेरी गांव में 17 जुलाई 2018 की रात एक बड़ा हादसा हुआ था। जहां दो अवैध इमारत गिर जाने से नौ जिंदगियां दम तोड़ गई थी। दोनों इमारतों के ढहने के बाद प्राधिकरण ने अवैध इमारतों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की थी।

2020 में मॉडल टाउन हादसे में 5 की मौत

साल 2020 में राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के मॉडल टाउन (उत्तर-पश्चिम दिल्ली) में पुरानी और जर्जर हो चुकी एक आवासीय इमारत अचानक ताश की पत्तों की तरह ढह गई। इस दर्दनाक हादसे में तीन लोगों की मौत हो गई थी। वहीं, कई लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे।

2022 का चिंटल्स सोसाइटी हादसा

10 फरवरी 2022 को गुरुग्राम के चिंटल्स सोसाइटी के टावर-डी के छठी मंजिल के फ्लैट में मरम्मत कार्य के दौरान एक बेडरूम की छत गिर गई थी। इस हादसे में फ्लैट्स की कई मंजिलें पहली मंजिल तक ढह गईं, जिसमें दो से तीन लोगों की मौत हो गई थी। इस घटना के बाद, हरियाणा के टाउन एंड कंट्री प्लानिंग (DTCP) विभाग ने पूरे कंडोमिनियम का स्ट्रक्चरल ऑडिट करने का आदेश दिया।

2024 का कबीर नगर-जहांगीरपुरी हादसा

मार्च 2024 में दिल्ली के शाहदरा के कबीर नगर में अचानक एक निर्माणाधीन इमारत ढह गई। इस हादसे में दो लोगं की मौत गई गई। वहीं, जहांगिरपुरी में अगस्त 2024 में एक अन्य हादसे में तीन मंजिला मकान गिरने से तीन लोगों की जानें गई थी।

2025 में मुस्ताफाबाद में 8 की मौत

अप्रैल 2025 में दिल्ली के मुस्ताफाबाद में अचानक एक चार मंजिला मकान गिरने से कुल 11 लोगों की मौत हो गई थी। मृतकों में से 8 लोग एक ही परिवार के थे। वहीं, 11 लोग गंभीर रूप से घायल हो गए थे। बाद में बताया गया कि यह मकान जर्जर और काफी पुरानी थी, जिसके कारण गिर गई।

2026 में साकेत में 6 लोगों की मौत

दिल्ली के साकेत मेट्रो स्टेशन के पास एक अवैध पांच मंजिला इमारत अचानक गिर गई। इस हादसे में कुल छह लोगों की मौत होने की बात कही गई थी। घटना की जांच के बाद प्रशासन ने बताया कि यह इमात अवैध थी।

दिल्ली-NCR में पिछले दस सालों में इमारत गिरने की प्रमुख घटनाओं की लिस्ट

दिल्ली में गिरती इमारतों की असली वजह

दिल्ली में लगातार इमारतों के गिरने की असली वजह कमजोर बुनियादी ढांचा, लगातार हो रही भारी बारिश, अवैध निर्माण और नियमों की अनदेखी है। हाल ही में 6 सितम्बर 2026 को दक्षिण-पश्चिम दिल्ली के सत्य निकेतन और मोती बाग इलाके में हुई दर्दनाक इमारत हादसों ने एक बार फिर इस गंभीर समस्या को उजागर कर दिया है। सिविल इंजीनियर्स और विशेषज्ञों के अनुसार, दिल्ली में इमारतों के ढहने के पीछे ये कुछ मुख्य कारण हैं-

1. भारी बारिश और जलभराव

दिल्ली में हो रही लगातार भारी बारिश के कारण पुरानी और जर्जर इमारतों में पानी का रिसाव बढ़ जाता है। इससे दीवारों और नींव की पकड़ कमजोर हो जाती है और इमारतें भरभराकर गिर जाती हैं।

2. बिना अनुमति बेसमेंट का निर्माण

ज्यादातर मकान मालिक अधिक मुनाफे के लिए इमारतों का रेनोवेशन करवाते समय अवैध रूप से बेसमेंट खोदने लगते हैं। इस वजह मकान का पूरा ढ़ांचा नीचे से कमजोर हो जाता है, जो मकान गिरने के प्रमुख कारणों में से एक है।

3. क्षमता से अधिक मंजिलों का निर्माण

दिल्ली के कई इलाकों में नियमों को अंदेखा कर 3 मंजिला अनुमति वाली जगह पर 5 से 6 मंजिल की इमारतों का निर्माण करवाया जाता है। अधिक भार होने के कारण नींव इस दबाव को झेल नहीं पाती। यही कारण है कि हल्की बारिश के बाद मकान हादसे का शिकार हो जाता है।

4. निर्माण में खराब सामग्री का इस्तेमाल

दिल्ली में ज्यादातर अवैध या कमर्शियल उपयोग के लिए किराए पर लगाने के लिए बनाई जाने वाली इमारतों में घटिया क्वालिटी के सीमेंट, सरियों और ईंट का इस्तेमाल किया जाता है। जिसकी वजह से मकान कमजोर हो जाते हैं।

5. प्रशासनिक लापरवाही और भ्रष्टाचार

स्थानीय प्रशासन और दिल्ली नगर निगम (MCD) के बिल्डिंग विभाग द्वारा समय पर जर्जर इमारतों का सुरक्षा ऑडिट न करना और अवैध निर्माणों पर सख्त कार्रवाई न करना भी इसका एक बड़ा कारण माना जाता है।

दिल्ली में गिरती इमारतों की असली वजह

दिल्ली में क्यों नहीं सुधरे हालात?

दिल्ली में समय-समय पर सरकार बदलती रही। लेकिन, राजधानी में अवैध निर्माण के खिलाफ कोई भी ठोस कदम नहीं उठाया गया। जैसे ही कोई बड़ी घटना होती है, इसके तुरंत बाद अधिकारियों को कार्रवाई का निर्देश दे दिया जाता है। सरकारी अधिकारी मकान मालिक के खिलाफ मुकदमा दर्ज करते हैं और कार्रवाई शुरू कर दी जाती है। हालांकि, घटना के कुछ समय बीत जाने के बाद आरोपियों और अधिकारियों के बीच मामले को सुलह कर लिया जाता है या कोई खास एक्शन नहीं होती।

कमजोर ड्रेनेज सिस्टम

अगर समय-समय पर दिल्ली में ऑडिट किया जाए, तो आधा से अधिक अवैध निर्माण मिलेंगे। बावजूद इसके उनके खिलाफ कोई एक्शन नहीं लिया जाता है। वहीं, दूसरी ओर यमुना नदी के किनारे तेजी से हो रहे अवैध निर्माण की वजह से दिल्ली का ड्रैनेज सिस्टम काफी कमजोर हो चुका है, जो की हल्की बारिश के बाद भी जलभराव जैसे स्थिति पैदा कर देता है।

दिल्ली में बढ़ती आबादी बड़ा खतरा
न्यू इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली में फिलहाल लगभग 2.3 करोड़ (23 मिलियन) लोग रहते हैं, जबकि इसकी बुनियादी ढांचे के हिसाब से आदर्श धारण क्षमता लगभग 2.2 करोड़ आंकी गई थी, जिसे यह पार कर चुका है।

दिल्ली में कैसे कम होगी इमारत गिरने की घटनाएं?

दिल्ली में इमारत गिरने की घटनाओं को रोकने के लिए अवैध निर्माण, बेसमेंट की खतरनाक खुदाई और पुरानी इमारतों की सख्त निगरानी बेहद जरूरी है। मुख्य कदम जो उठाए जाने चाहिए:

  • अवैध निर्माण पर रोक: बिना अनुमति के बन रही इमारतों और नियमों का उल्लंघन करके बनाई जा रही अतिरिक्त मंजिलों पर तुरंत कार्रवाई हो।

  • बेसमेंट खुदाई की निगरानी: पुरानी या कमजोर नींव वाली इमारतों के पास बेसमेंट खोदने के कामों पर पूर्ण प्रतिबंध और तकनीकी जांच अनिवार्य की जाए (जैसा कि सत्य निकेतन हादसे में सामने आया है)।

  • जर्जर इमारतों का ऑडिट: ऐसी इमारतों की पहचान करके उन्हें समय रहते खाली कराया जाए या उनकी मरम्मत कराई जाए।

  • जिम्मेदारी तय करना: नियमों की अनदेखी करने वाले भवन मालिकों और अवैध निर्माण में संलिप्त अधिकारियों पर सख्त कानूनी कार्रवाई हो।

दिल्ली यूनिवर्सिटी ने दिया मदद का आश्वासन

दिल्ली यूनिवर्सिटी ने इस घटना पर दुख जताया है और हर संभव मदद का आश्वसन किया है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट में डीयू ने लिखा कि दिल्ली के सत्य निकेतन में इमारत गिरने की घटना से हमें गहरा दुख और अफसोस है। हमारी संवेदनाएं प्रभावित छात्रों और उनके परिवारों के साथ हैं। हम मलबे में फंसे सभी लोगों के सुरक्षित बाहर निकलने की प्रार्थना करते हैं और अपने छात्रों की हर संभव मदद के लिए तैयार हैं।

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