How MCD Works In Delhi Explained: दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में रविवार, 6 सितंबर को अचानक एक पांच मंजिला इमारत गिरने से 7 छात्रों की मौत हो गई। वहीं, 8 छात्र गंभीर रूप से घायल बताए जा रहे हैं। इस घटना के बाद से ही दिल्ली में तेजी से हो रहे अवैध निर्माण के खिलाफ लोग आवाज उठा रहे हैं।
दिल्ली नगर निगम (MCD) के अधिकारियों के खिलाफ भी लोगों में गुस्सा है। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के कार्यकर्ता एमसीडी ऑफिस के बाहर प्रदर्शन करते हुए एमसीडी कमीश्नर के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं।
आपने अक्सर देखा होगा कि जब भी दिल्ली में कोई भी बड़ी आगजनी की घटना होती है या जलभराव के कारण लोगों को जान-माल का नुकसान होता है या किसी भी तरह की इमारत को गिरने से आम लोगों को खतरा पहुंचता है। इन सभी घटनाओं के बाद हमेशा ही एमसीडी और उनके अधिकारियों के काम करने की तरीके पर सवाल उठते हैं। लेकिन ऐसा क्यों? आइए इस एक्सप्लेनर में इन सभी सवालों का जवाब जानते हैं।
दिल्ली नगर निगम (MCD) क्या है?
कैसे होता है MCD का चुनाव?
किन कामों के लिए MCD जिम्मेदार?
दिल्ली पर MCD का कितना कंट्रोल?
दिल्ली म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन (MCD) एक नगर निगम है, जो केंद्रशासित प्रदेश दिल्ली के ज्यादातर हिस्से पर राज करता है। एमसीडी दुनिया की सबसे बड़ी म्युनिसिपल बॉडी में से एक है। यह राजधानी नई दिल्ली और दिल्ली कैंटोनमेंट के अलावा दिल्ली में लगभग दो करोड़ (20 मिलियन) लोगों को नागरिक सेवा देती है।
MCD का प्रमुख कौन होता है?
दिल्ली नगर निगम का प्रमुख मेयर होते हैं, जो 250 वार्ड के चुने हुए काउंसलर की अध्यक्षता में काम करते हैं। एमसीडी कुल 1,397.3 km2 (539.5 mi2) के एरिया में फैला है। वित्त वर्ष 2025-26 के लिए निगम का सालान बजट ₹17,000 करोड़ (लगभग 2 बिलियन अमेरिकी डॉलर) से ज्यादा है।
दिल्ली के तीनों नगर पालिकाएं
एमसीडी नेशनल कैपिटल टेरिटरी ऑफ दिल्ली की तीन नगर पालिकाओं में से एक है, बाकी के दो- नई दिल्ली म्युनिसिपैलिटी काउंसिल (NDMC), जो नई दिल्ली म्युनिसिपैलिटी को चलाती है, और दिल्ली कैंटोनमेंट बोर्ड, जो दिल्ली कैंटोनमेंट को चलाती है। यह दिल्ली की सबसे बड़ी और एकमात्र नगर पालिका है जिसे सीधे लोग चुनते हैं।
दिल्ली नगर निगम का इतिहास
7 अप्रैल, 1958 को पार्लियामेंट के एक एक्ट के तहत दिल्ली नगर निगम का गठन हुआ था। इससे पहले, DMC (दिल्ली म्युनिसिपल कमेटी) दिल्ली की मुख्य नागरिक निकाय थी। त्रिलोक चंद शर्मा ने दिल्ली के पहले चुने हुए मेयर बने थे।
उसके बाद, म्युनिसिपल बॉडी हमेशा नागरिकों की बढ़ती जरूरतों के हिसाब से काम करती रही। एक्ट में 1993 के संशोधन से कॉर्पोरेशन की बनावट, काम, गवर्नेंस और प्रशासन में बड़े बदलाव आए।
MCD का तीन हिस्सों में बंटवारा
13 जनवरी 2012 को, दिल्ली नगर निगम को तीन छोटे नगर निगमों में बांट दिया गया। नॉर्थ दिल्ली नगर निगम और साउथ दिल्ली नगर निगम, दोनों में 104 म्युनिसिपल वार्ड को शामिल किया गया, जबकि, छोटे ईस्ट दिल्ली नगर निगम में 64 वार्ड शामिल किए गए। हालांकि, मार्च 2022 में संसद में पास एक कानून के तहत इन तीनों निगमों के फिर से एक ही में वापस शामिल कर लिया गया।
दिल्ली नगर निगम (MCD) का चुनाव प्रक्रिया
दिल्ली नगर निगम का चुनाव सीधे वोटिंग के जरिए आम जनता द्वारा चुने गए पार्षदों के माध्यम से होता है। फिर चुने गए पार्षदों के जरिए महापौर का चुनाव होता है। दिल्ली को कुल 250 अलग-अलग वार्डों में बांटा गया है। हर वार्ड से एक पार्षद को लोग चुनते हैं। एमसीडी चुनाव में 18 वर्ष की आयु का कोई भी शख्स अपने-अपने वार्ड के पार्षद को चुनने के लिए वोट कर सकते हैं। पार्षदों का कार्यकाल 5 वर्ष के लिए होता है।
कैसे होता है MCD मेयर का चुनाव?
पार्षदों के चुनाव के बाद निगम के सदन की पहली बैठक में मेयर का चुनाव होता है। मेयर के चुनाव के लिए आम जनता वोट नहीं कर सकता है। इसके लिए 250 वार्डों से चुने गए पार्षद, दिल्ली के 7 लोकसभा सांसद, 3 राज्यसभा सांसद और दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष द्वारा मनोनीत 14 विधायक (जो बारी-बारी से बदलते हैं) मतदान करते हैं।
MCD मेयर का कार्यकाल
एमसीडी एक्ट के तहत मेयर का कार्यकाल 1 वर्ष के लिए होता है। जहां पहला वर्ष महिला उम्मीदवार के लिए आरक्षित है। वहीं, तीसरा वर्ष अनुसूचित जाति (SC) कैटेगरी के लिए आरक्षित होता है। जबकि अन्य वर्ष सामान्य वर्ग के लिए होता है।
किन कामों के लिए MCD जिम्मेदार?
दिल्ली नगर निगम (MCD) राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में स्थानीय नागरिक सुविधाओं और बुनियादी ढांचे के रखरखाव के लिए जिम्मेदार है। घरों से कचरा उठाना, सड़कों की सफाई और कचरे का निस्तारण करना एमसीडी के कार्य क्षेत्र में आते हैं। कॉलोनी के अंदर सड़कों (60 फीट से कम चौड़ाई वाली) की मरम्मत, निर्माण और स्थानीय नालियों का रखरखाव की जिम्मेदारी इसी के पास होता है। MCD के पास इन कामों की जिम्मेदारी-
हेल्थ सर्विस: प्राथमिक स्वास्थय केंद्र, छोटे अस्पताल और डिस्पेंसरियों का संचालन तथा बीमारियों की रोकथाम के लिए कदम उठाना।
एजुकेशन सिस्टम: दिल्ली नगर निगम क्षेत्र में प्राथमिक स्कूलों का मैनेजमेंट और संचालन करने की जिम्मेदारी।
पार्क और सार्वजनिक स्थल: नगर निगम के क्षेत्र में आने वाले सभी पार्कों और सार्वजनिक स्थलों का निर्माण और रखरखाव की जिम्मेदारी।
भवन निर्माण की अनुमति: दिल्ली के अंदर नई इमारत बनाने के लिए नक्शा पास करना और अवैध निर्माण पर सख्त कार्रवाई करना एमसीडी के कार्य क्षेत्र में आता है।
लाइसेंस और प्रमाण पत्र: जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करना, मैरिज रजिस्ट्रेशन, बिजनेस, फैक्ट्री और रेहड़ी-पटरी का लाइसेंस देना। इसके अलावा स्ट्रीट लाइटों की व्यवस्था, लावारिस पशुओं का प्रबंधन और प्रॉपर्टी टैक्स की कलेक्ट करना।
दिल्ली पर MCD का कितना कंट्रोल?
दिल्ली पर नगर निगम (MCD) का बहुत बड़ा कंट्रोल है, क्योंकि यह दिल्ली के लगभग 94 प्रतिशत भौगोलिक क्षेत्र में बुनियादी नागरिक सुविधाएं संभालती है। हालांकि, दिल्ली की अनोखी प्रशासनिक व्यवस्था के कारण एमसीडी का कंट्रोल पूरी तरह स्वायत्त नहीं है। दिल्ली की सत्ता मुख्य रूप से तीन स्तरों में बंटी है। केंद्र सरकार (उपराज्यपाल के माध्यम से), दिल्ली राज्य सरकार और दिल्ली नगर निगम।
MCD की स्वतंत्रता पर सवाल
एमसीडी खुद भी पूरी तरह स्वतंत्र नहीं है। एमसीडी सीधे तौर पर केंद्रीय गृह मंत्रालय के प्रति जवाबदेह होती है। दिल्ली नगर निगम का सबसे बड़ा प्रशासनिक अधिकारी एमसीडी कमिश्नर होता है, जिसे केंद्र सरकार नियुक्त करती है। दिल्ली के उपराज्यपाल के पास एमसीडी में 10 एल्डरमैन (मनोनीत पार्षद) नियुक्त करने का विशेष अधिकार है, जिससे केंद्र का नियंत्रण इस पर और मजबूत रहता है।
इन मामलों में MCD का नहीं कंट्रोल
लुटियंस दिल्ली में एमडीसी का कंट्रोल नहीं है। यहां की जिम्मेदारी NDMC संभालती है। इसके अलावा दिल्ली कैंट क्षेत्र, जो कि सैन्य इलाका होने के कारण इसका प्रशासन दिल्ली कैंटोमेंट बोर्ड के पास है। इसके साथ ही, दिल्ली में जमीन (DDA), कानून व्यवस्था व पुलिस पर भी MCD या दिल्ली सरकार का कोई कंट्रोल नहीं है, यह सीधे केंद्र सरकार के अधीन आती है।