Women Safety In Bihar Explained: बिहार के जमुई, समस्तीपुर और बांका जिलों में हाल ही में घटी दर्दनाक घटनाओं ने राज्य में महिलाओं की सुरक्षा और कानून-व्यवस्था की स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि प्रशासन और सरकार लगातार महिलाओं की सुरक्षा को लेकर कड़े कड़े दावों और महिला सशक्तिकरण की योजनाओं की बात करती है।
लेकिन धरातल पर लगातार हो रहे अपराध इन दावों की पोल खोल रहे हैं। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) और पुलिस आंकड़ों के अनुसार, राज्य में महिलाओं के खिलाफ अपराधों के मामलों में अपेक्षित कमी नहीं आई है। आइए इस एक्सप्लेनर के जरिए बिहार में महिलाओं की सुरक्षा का पड़ताल करते हैं।
19 सितंबर को कोचिंग पढ़कर लौट रहे दो नाबालिग छात्र-छात्राओं को मड़वा पहाड़ के पास रोककर दबंग युवकों के समूह ने 20 मिनट तक बंधक बनाए रखा, छेड़खानी की और मारपीट की। हैरान करने वाली बात यह रही कि पुलिस ने शुरुआत में कोई शिकायत न मिलने पर मामला दर्ज नहीं किया, लेकिन जब वीडियो वायरल हुआ तब जाकर एफआईआर दर्ज की गई और एनकाउंटर व छापेमारी के बाद आरोपियों की गिरफ्तारी हुई।
बिहार के समस्तीपुर में भी जमुई जैसी छेड़छाड़ की घटना हुई है। सड़क पर कुछ लड़कों ने एक नाबालिग लड़की के साथ बदसलूकी की, जिसका वीडियो 21 सितंबर से वायरल है। लड़की युवकों से बार-बार छोड़ने के लिए कहती है, लेकिन युवकों ने बीच सड़क उसका हाथ पकड़ा, विरोध करने पर पीटने की कोशिश की, बाल खींचे और दूसरी तरफ ले गए।
घटना 15 सितंबर की है। समस्तीपुर पुलिस को इसकी जानकारी 23 सितंबर की रात करीब साढ़े 10 बजे मिली। इसके बाद पुलिस ने कर्पूरी ग्राम थाना क्षेत्र में कई जगहों पर छापेमारी की। 4 लोगों को गिरफ्तार किया गया है।
बिहार के बांका के प्रसिद्ध पर्यटन स्थल मंदार पर्वत का एक वीडियो वायरल हुआ, जिसमें छह दबंग युवक एक महिला के साथ सरेआम अभद्रता और मारपीट करते दिखे। इस मामले में भी पुलिस ने वीडियो का संज्ञान लेते हुए मामला दर्ज किया। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे फुटेज पर एक टाइमस्टैम्प है जो बताता है कि इसे 3 सितंबर को रिकॉर्ड किया गया था।
वीडियो क्लिप में आरोपी को महिला के साथ बदतमीजी करते और उसे चप्पल से मारते हुए देखा जा सकता है। लोकल पुलिस स्टेशन इंचार्ज ने बताया कि पुलिस को यह वीडियो 22 सितंबर को उनके सोशल मीडिया सेल से मिला था।
राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) की ताजा रिपोर्ट 'क्राइम इन इंडिया 2024' के मुताबिक, बिहार में 2024 में महिलाओं के खिलाफ अपराध के 27,359 मामले दर्ज हुए, जो 2022 में 20,222 थे। यह सिर्फ दो साल में लगभग एक तिहाई और पिछले दस साल में लगभग 97 प्रतिशत की बढ़ोतरी है। NCRB के 2024 के जुवेनाइल क्राइम चार्ट में भी 5,037 मामलों के साथ बिहार टॉप पर रहा, यह एक ऐसी जानकारी है जो उन रिपोर्टों को और मजबूत करती है कि जमुई की घटना के कई आरोपी खुद नाबालिग थे।
राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS) के मुताबिक, बिहार में एक बड़ा वर्ग घरेलू या व्यक्तिगत स्तर पर हिंसा का सामना करता है, और बहुत कम महिलाएं मदद के लिए आगे आती हैं।
बिहार सरकार और पुलिस प्रशासन अक्सर राज्य में महिला सुरक्षा को लेकर बड़े-बड़े दावे करते आए हैं। हालांकि, ये घटनाएं दावों के विपरीत एक अलग तस्वीर बयां करती हैं-
आपातकालीन प्रतिक्रिया के लिए डायल 112 और महिला हेल्पडेस्क स्थापित किए गए हैं। जमुई और बांका जैसे प्रमुख स्थानों पर 20-20 मिनट तक वारदात होती रही, लेकिन कोई पुलिस पेट्रोलिंग मौजूद नहीं थी।
दावा है कि अपराधियों पर तुरंत कार्रवाई की जाती है। लेकिन, सामाजिक बदनामी और पुलिस के रवैये के डर से पीड़ित खुद थाने नहीं पहुंचे। पुलिस ने वीडियो वायरल होने के बाद ही संज्ञान लिया।
प्रमुख पर्यटक और धार्मिक स्थलों पर विशेष सुरक्षा बल की तैनाती का दावा। लेकिन, मंदार पर्वत जैसे प्रसिद्ध पर्यटक स्थल पर भी मनचले बिना किसी पुलिसिया डर के अपराध को अंजाम देकर खुद ही वीडियो रिकॉर्ड करते दिखे।
जमुई, समस्तीपुर और बांका की घटनाओं का विश्लेषण करने पर राज्य में महिलाओं की सुरक्षा से जुड़े तीन मुख्य ढांचागत कारण सामने आते हैं-
सोशल मीडिया ट्रेंड और डर का अभाव
अपराधियों में कानून का भय खत्म हो चुका है। वे न केवल अपराध करते हैं, बल्कि दबंगई साबित करने के लिए उसका वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर अपलोड करते हैं।
विक्टिम ब्लेमिंग और सामाजिक दबाव
समाज और कई बार स्थानीय प्रतिनिधियों द्वारा घटना के बाद पीड़ित लड़की के पहनावे, उसके बाहर निकलने और पुरुष मित्र के साथ होने पर ही सवाल खड़े किए जाते हैं। इस 'विक्टिम ब्लेमिंग' की वजह से पीड़ित परिवार पुलिस के पास जाने से बचते हैं।
कमजोर पुलिसिंग और लेट-लतीफी
ग्रामीण इलाकों, कोचिंग हब और टूरिस्ट स्पॉट्स के आसपास पुलिस की नियमित गश्त बेहद कम है, जिससे असामाजिक तत्वों को खुली छूट मिल जाती है।