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नवभारत निशानेबाज: चुनाव आयोग के पास मौजूद शक्ति, CEC ज्ञानेश कुमार ने दिखाई सख्ती

Free Fair Elections: चुनाव आयुक्त के 'भय व प्रलोभन रहित चुनाव' के संकल्प पर व्यंग्य के जरिए लोकतंत्र की प्रक्रिया व चुनौतियों को उजागर किया गया है, जहां आदर्श व वास्तविकता के बीच का अंतर साफ दिखता है।

अंकिता पटेल

Navabharat Nishanebaaz: पड़ोसी ने हमसे कहा, 'निशानेबाज, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार अवश्य ही महाज्ञानी होंगे तभी तो एकसाथ 5 राज्यों में चुनाव का संज्ञान ले रहे हैं। चुनाव लोकतंत्र का ज्ञान यज्ञ होता है, जिसमें वोटों की आहुति डालने से नई सरकार जन्म लेती है। आपने महाभारत में पढ़ा होगा कि यज्ञकुंड से ही द्रौपदी का जन्म हुआ था।'

हमने कहा, 'आप सीधे चुनाव चर्चा कीजिए। ज्ञान चर्चा क्यों कर रहे हैं? ज्ञानेश कुमार ने कहा कि इस बार चुनाव भय रहित, हिंसा रहित, धमकी रहित, प्रलोभन रहित, छापा रहित के अलावा बूथ व सोर्स जामिंग रहित होकर ही रहेंगे। इस वक्तव्य में ज्ञानेश कुमार के ज्ञान के अलावा संकल्प भी नजर आता है।'

पड़ोसी ने कहा, 'निशानेबाज, ज्यादा ज्ञान होना भी खतरनाक होता है। ज्ञान के साथ विनम्रता, उदारता व सदाशयता रहनी चाहिए, फलों से लदे वृक्ष जिस तरह झुक जाते हैं, वैसा ही रवैया ज्ञानसंपन्न व्यक्ति का भी रहना चाहिए।'

हमने कहा, 'पावर के साथ गर्न आ ही जाता है। चुनाव के दौरान मुख्य चुनाव आयुक्त के अधीन सभी प्रशासनिक मशीनरी, बड़े-बड़े अधिकारी और सुरक्षा बल आ जाते हैं। उनके सामने कोई नेता या सांसद भी तीन-पांच नहीं कर सकते। वह जिसे चाहे घुड़की दे सकते हैं। ज्ञानेश कुमार ने भी यही किया। जब टीएमसी सांसद डेरेक ओ ब्रायन, पूर्व सांसद साकेत गोखले, सांसद व पूर्व पत्रकार सामरिका घोष और मेनका मुरुस्वामी मुख्य चुनाव आयुक्त से पूछने गए कि बंगाल की मतदाता सूची से 91,00,000 लोगों के नाम क्यों क्यों काटे गए तो ज्ञानेश कुमार ने कहा- गेट लॉस्ट अर्थात दफा हो जाओ। यहां से चलते बनो। इस संबंध में इलेक्शन कमीशन ने सफाई दी कि मुख्य चुनाव आयुक्त की ओर से ऐसा कुछ भी नहीं कहा गया। एक अन्य मामला कूचबिहार साउथ के जनरल आब्जर्वर अनुराग यादव का है जिन्हें डांटते हुए ज्ञानेश कुमार ने कहा कि अपने घर वापस जाओ। इससे अनुराग को बुरा लगा जो कि उत्तरप्रदेश की योगी सरकार में प्रधान सचिव रैंक के उच्चाधिकारी हैं। उन्होंने जवाब दिया कि आप हमसे इस तरह का अपमानजनक व्यवहार नहीं कर सकते। हमने सरकारी सेवा में 25 वर्ष दिए हैं। आप इस तरह नहीं बोल सकते। इस पर सीईसी ने उन्हें पद से हटा दिया।'

लेख- चंद्रमोहन द्विवेदी के द्वारा

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