Mandatory Voting Supreme Court ( सोर्स: सोशल मीडिया) 
नवभारत विशेष

नवभारत संपादकीय: मतदान अनिवार्य करने के पक्ष में सुप्रीम कोर्ट

Voting Rights Debate: भारत में मतदान अधिकार माना जाता है, कर्तव्य नहीं। अनिवार्य मतदान को लेकर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के बाद लोकतंत्र और मतदाता जिम्मेदारी पर नई बहस शुरू हुई है।

अंकिता पटेल

Mandatory Voting Supreme Court: भारत में चुनावी मतदान हमेशा से नागरिकों का अधिकार रहा है। यह कोई कर्तव्य या दायित्व नहीं है। यद्यपि लोगों से अनुरोध किया जाता है कि वह मतदान करें लेकिन वोट डालना या नहीं डालना उनकी मर्जी पर निर्भर है।

संविधान में कहा गया है कि ऐसा हर व्यक्ति जो भारत का नागरिक है, उसे हक, अधिकार या पात्रता (एनटाइटलमेंट) है कि वह चुनाव में मतदान के लिए खुद को वोटर के रूप में पंजीकृत कराए, संविधान में अनिवार्य मतदान का उल्लेख नहीं है।

यदि मतदान किसी नागरिक की इच्छा की अभिव्यक्ति है तो उसे अभिव्यक्ति की आजादी से संरक्षित रखा जाना चाहिए, इसमें मतदान नहीं करने की इच्छा का भी समावेश है। वैसे हर सजग नागरिक से उम्मीद की जाती है कि वह लोकतंत्र के हित में अपने मताधिकार का उपयोग करे, कभी भी शत-प्रतिशत मतदान नहीं हो पाता।

ज्यादा से ज्यादा 60-65 प्रतिशत मतदान होता देखा गया है। यह मुद्दा इसलिए संदर्भ रखता है, क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि कुछ ऐसी प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए जिससे मतदान अनिवार्य हो जाए। ऐसा करने से अधिक योग्य व्यक्ति चुनाव लड़ने के लिए आकर्षित होंगे जिससे लोकतंत्र को मजबूती मिलेगी और 'नोटा' का प्रावधान अनावश्यक हो जाएगा।

वास्तव में नोटा का प्रावधान इसलिए किया गया था ताकि बेहतर उम्मीदवार चुनाव लड़ने के लिए मन बनाएं तथा मतदाताओं को वोटिंग के लिए प्रोत्साहन मिले। एक दशक के दौरान पाया गया कि बहुत कम मतदाताओं ने नोटा का इस्तेमाल किया।

सुप्रीम कोर्ट विधि सेंटर फॉर लीगल पॉलिसी द्वारा दायर जनहित याचिका की सुनवाई कर रहा था, जिसमें मांग की गई थी कि जिस चुनाव क्षेत्र में केवल एक उम्मीदवार खड़ा हो, वहां नोटा को उम्मीदवार माना जाए, इससे पता चलेगा कि उस अकेले प्रत्याशी को जनता का कितना विश्वास प्राप्त है। सुप्रीम कोर्ट ने मत व्यक्त किया कि नोटा को उम्मीदवार बनाने के लिए संसद को जनप्रतिनिधित्व कानून में संशोधन करना होगा।

यदि विश्व के देशों की स्थिति पर गौर करें तो अर्जेंटीना, ऑस्ट्रेलिया, बेल्जियम, बोलिविया व ब्राजील में 18 से 70 वर्ष की आयु के नागरिकों के लिए मतदान अनिवार्य है। इसी तरह साइप्रस, मिस्र, ग्रीस, मेक्सिको, पेरू, उत्तर कोरिया, सिंगापुर, समोआ, युराग्वे व तुर्किए में भी नागरिकों के लिए वोटिंग करना कंपलसरी है।

सिंगापुर में किसी नागरिक ने मतदान नहीं किया तो उसका नाम मतदाता सूची से काट दिया जाता है। ब्राजील में यदि मतदान नहीं कर पाने की समुचित वजह नहीं बताई गई जैसे कि बीमार होना, प्रसूति होना, चलने-फिरने में असमर्थ होना आदि तो ऐसे नागरिक को सार्वजनिक सुविधाओं से वंचित किया जा सकता है।

ऑस्ट्रेलिया में मतदान न करने वाले नागरिक पर 20 डॉलर जुर्माना लगाया जाता है। भारत में अनेक धनवान व्यक्ति प्रायः वोट डालने नहीं जाते। 2014 के चुनाव में अपने घरों से दूर काम करने वाले 28 करोड़ प्रवासी मजदूर वोट नहीं डाल पाए थे। घर बैठे दस्तावेज दिखाकर ऑनलाइन वोटिंग शुरू की जाए तो मतदान प्रतिशत बढ़ सकता है।

लेख- चंद्रमोहन द्विवेदी के द्वारा

नेहा बोरा की याचिका दिल्ली हाई कोर्ट ने की खारिज, भरना पड़ेगा पीस बॉन्ड

बिहार के सीवान में पटाखा फैक्टरी में भीषण विस्फोट, आठ लोगों की मौत; कई घायल

LAC पर भारत-चीन के बीच क्या बातचीत चल रही है? विदेश मंत्रालय के बयान का पूरा मतलब समझिए

MLC Election 2026 LIVE: चार राज्यों की 28 सीटों पर मतदान खत्म, कब आएंगे नतीजे?

रुला रहा अलनीनो: दलहन-गुड़-शक्कर के भाव आसमान पर, एथनॉल उत्पादन पर लग सकती है रोक!