नवभारत विशेष: सचिन को आउट देने की गलती बकनर ने मानी

Sachin Wrong Decision: ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ टेस्ट मैच में सचिन तेंदुलकर को स्टीव बकनर ने विवादित LBW आउट दिया था। टीवी रिप्ले में गेंद स्टंप के ऊपर जाती दिखी, जिसके बाद फैसले की कड़ी आलोचना हुई।
Navbharat Special: Bucknor admits his mistake of giving Sachin out
Steve Bucknor LBW Controversy ( सोर्स: सोशल मीडिया)
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Steve Bucknor LBW Controversy: गौरतलब है कि 4 मैचों की सीरीज के पहले टेस्ट मैच में सचिन तेंदुलकर जब 3 रनों पर बल्लेबाजी कर रहे थे, तब ऑस्ट्रेलियाई तेज गेंदबाज जेसन गिलेस्पी की गेंद को उन्होंने छोड़ने की कोशिश की, तो गेंद उनके पैड से टकरा गई। गिलेस्पी ने जोरदार अपील की, जिसके बाद स्टीव बकनर ने बिना कुछ सोचे-समझे अपनी उंगली ऊपर उठा दी और सचिन को आउट दे दिया। लेकिन जब टीवी रिप्ले में साफ-साफ देखा गया कि गेंद स्टंप के ऊपर से जा रही थी।

इस पर दुनिया के बड़े-बड़े दिग्गज क्रिकेटरों ने स्टीव बकनर के निर्णय की जबर्दस्त आलोचना की। इस मैच में कमेंट्री कर रहे टोनी ग्रेग ने इस फैसले को भयानक करार दिया था। दूसरे क्रिकेटरों ने भी इसे बहुत घटिया फैसला बताया था। ऐसा फैसला देने वाले स्टीव बकनर कोई नौसिखिया अम्पायर नहीं थे, वह अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के उस समय भी जाने-माने अम्पायर थे। बकनर ने अपने अम्पायरिंग करिअर में टेस्ट मैचों में 128 मैचों में फील्ड अम्पायरिंग तथा दो मैचों में टीवी अम्पायर की भूमिका निभाई है।

यह टेस्ट मैच ड्रॉ हो गया था, लेकिन अगर सचिन को इस तरीके से आउट न दिया गया होता, तो शायद भारत मैच अच्छे खासे मार्जिन से जीत जाता। क्योंकि भारत ने इस मैच की पहली पारी में 409 रन बनाए थे, जिसमें जेसन गिलेस्पी के 4 विकेट थे।

अगर सचिन को गलत तरीके से आउट न दिया जाता, तो हो सकता है भारत 550 या 600 रन बनाकर पहली पारी के आधार पर ही यह टेस्ट मैच जीत लेता, क्योंकि ऑस्ट्रेलिया ने पहली पारी में मात्र 323 रन ही बना सका था जबकि स्टीव बकनर द्वारा सचिन को गलत आउट देने के बाद भी भारत ने 409 रन बनाए थे।

आज 22 वर्षों बाद स्टीव बकनर वेस्ट इंडीज क्रिकेट अम्पायर्स एसोसिएशन को दिए गए अपने इंटरव्यू में मानते हैं कि उनसे सचिन तेंदुलकर को गलत आउट देने की गलती हुई थी।

वह कहते हैं, 'सचिन तेंदुलकर को एलबीडब्ल्यू देना मेरी गलती थी, जिसके लिए लोग मुझे आज तक कोसते हैं कि मैंने उन्हें आउट क्यों दिया ? जिंदगी में गलतियां होती हैं, मैंने इसे स्वीकार कर लिया है।'

पर सवाल है अब इस गलती को स्वीकार कर लेने से क्या होगा? क्या सचिन तेंदुलकर के उस मैच को मात्र 3 रनों पर आउट होने का परिणाम बदल जाएगा? क्या ऑस्ट्रेलिया द्वारा उस मैच को ड्रॉ करा लेने का नतीजा अब बदल जाएगा? अगर निर्णय या तथ्य नहीं बदले जा सकते, तो फिर स्टीव बकनर के गलती मान लेने का अब फायदा क्या है? अगर इस तरह की गलतियां स्वीकार कर लेने के बाद भी इतिहास का सत्य नहीं बदलता, तो गलती स्वीकार करने का कोई मतलब नहीं है और यह कोई अकेले स्टीव बकनर के संबंध में ही बात नहीं है, इन दिनों पाकिस्तान के एक पूर्व स्पिनर सकलेन मुश्ताक भी सोशल मीडिया में प्रसारित कई अपने शॉर्ट वीडियोज में हंसते हुए बताते हैं कि उन्होंने अपने करिअर में जितने विकेट लिए हैं, उनमें बहुत सारे विकेट तो शोर मचाकर और अम्पायर पर प्रेशर डालकर खिलाड़ी को बिना आउट किए ही लिए हैं।

मजे की बात यह है कि सकलेन मुश्ताक यह बात इतनी सहजता से बताते हैं, मानो यह कोई अपराध ही न हो बल्कि एक किस्म का मनोरंजन हो। मान लीजिए यह मामला खेल की दुनिया का न होकर किसी दूसरे क्षेत्र का हो तो क्या होगा? उदाहरण के लिए यदि 20-25 साल बाद सुप्रीम कोर्ट का कोई न्यायाधीश हंसते-मुस्कुराते हुए कहे कि मुझसे इस निर्णय में गलती हुई थी, मैंने वास्तव में जिसे सजा दी थी, उसे नहीं दिया जाना चाहिए था, तो क्या महज सिर्फ साल गुजर जाने भर से वह गलती कम हो जाती है? अगर सचिन के विरुद्ध किया गया, बकनर का आपराधिक फैसला, जस का तस बना रहता है तो फिर यह स्वीकारोक्ति एक और मजाक नहीं तो और क्या है?

क्रिकेट का मजाक है यह स्वीकारोक्ति

क्रिकेट को 'जेंटलमैन्स गेम' कहा जाता है, क्योंकि यह नैतिकता, ईमानदारी और निष्पक्षता की सार्वजनिक कसौटी भी है लेकिन जब इस खेल के ही कुछ दिग्गज हंसते-मुस्कुराते हुए अतीत की अपनी गलतियों को सहज स्वीकारोक्ति में बदलने लगें, तो ये खेल का फूहड़ मजाक है।

22 साल बाद वेस्ट इंडीज के पूर्व अम्पायर स्टीव बकनर ने स्वीकार किया है कि उन्होंने 2003-04 में भारत के ऑस्ट्रेलिया दौरे के दौरान ब्रिस्बेन के गाबा मैदान पर सचिन तेंदुलकर को एलबीडब्ल्यू आउट दिया था, वह वास्तव में गलत था।

–लेख लोकमित्र गौतम के द्वारा

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