

दिल्ली हाई कोर्ट ने AISA अध्यक्ष नेहा बोरा की याचिका खारिज कर दी।
SEM के नोटिस में 10,000 रुपये का पर्सनल बॉन्ड और एक जमानतदार देने को कहा गया था।
नेहा बोरा ने दलील दी थी कि राष्ट्रीय ध्वज फहराने के लिए नागरिकों को अनुमति की जरूरत नहीं है।
Delhi High Court on Neha Bora: दिल्ली हाई कोर्ट ने AISA अध्यक्ष नेहा बोरा की याचिका खारिज कर दी है। उन्होंने विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट (SEM) के उस नोटिस को चुनौती दी थी, जिसमें जांच के दौरान शांति बनाए रखने के लिए 10,000 रुपये का निजी मुचलका (पर्सनल बॉन्ड) भरने और एक जमानतदार (श्योरिटी) देने को कहा गया था। यह आदेश जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद ने सुनाया। इससे एक दिन पहले अदालत ने इस मामले में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।
SIR में कथित अनियमितताओं के खिलाफ प्रदर्शन में शामिल नेहा बोरा ने हाई कोर्ट में याचिका दायर कर SEM द्वारा जारी नोटिस को रद्द करने और पुलिस को उनके खिलाफ कोई जबरदस्ती कार्रवाई न करने का निर्देश देने की मांग की थी। लेकिन उच्च न्यायालय ने उनकी याचिका को खारिज करते हुए उनकी मांग स्वीकार करने से इनकार कर दिया।
सुनवाई के दौरान नेहा बोरा ने अदालत में दलील दी थी कि नागरिकों को राष्ट्रीय ध्वज फहराने के लिए किसी अनुमति की आवश्यकता नहीं है। गुरुवार को जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद की पीठ ने नेहा बोरा और दिल्ली पुलिस के वकीलों को करीब तीन घंटे तक सुना था। इसके बाद अदालत ने याचिका पर अपना आदेश सुरक्षित रख लिया था। पीठ ने कहा था कि वह शुक्रवार शाम को इस मामले में आदेश सुनाएगी। इसके बाद अदालत ने याचिका खारिज कर दी।
नेहा बोरा को 16 अक्टूबर को मंडी हाउस में एक सभा के दौरान हिरासत में लिया गया था। उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें अज्ञात स्थान पर ले जाकर आरके पुरम थाने में रातभर रखा गया और अगले दिन सुबह छह बजे रिहा कर दिया गया।
दिल्ली पुलिस के नोटिस में मंडी हाउस पर नारेबाजी, निषेधाज्ञा के बावजूद जंतर-मंतर के आसपास विरोध प्रदर्शन और कनॉट प्लेस में प्रदर्शन के लिए लोगों को उकसाने के आरोप लगाए गए हैं। नेहा बोरा ने याचिका में कहा है कि नोटिस में शांति भंग होने की आशंका के समर्थन में कोई ठोस कारण, विशिष्ट घटना या समयावधि का जिक्र नहीं किया गया है।