Chandrapur Ashram School Controversy: आदिवासी विकास विभाग के अधीन राज्य की सैकड़ों सरकारी व अनुदानित आश्रमशालाएं हैं। इनके अनुदान पर प्रतिवर्ष हजारों करोड़ रुपये का खर्च दिखाया जाता है लेकिन इन आश्रमशालाओं की दुर्दशा किसी से छिपी नहीं है। चंद्रपुर की जांभुलघाट आश्रमशाला में वहां के अधीक्षक ने 20 से 25 बच्चों का जबरदस्ती आधा सिर मूंड़ दिया। कारण यह बताया कि इनके सिर में जूएं हो गई थीं।
क्या जुएं मारने की दवा डालकर और बाद में शैम्पू से सिर धोकर यह से सिर धोकर यह समस्या दूर नहीं की जा सकती थी? क्या बेढंगे तरीके से आधे सिर का मुंडन करने से जुएं का इलाज हो गया? ऐसा आचरण तो आदिवासी विकास के दावों तथा सामाजिक न्याय पर उस्तरा चलाने के समान हो गया। ग्रामीण व आदिवासी क्षेत्र के बच्चों के साथ ऐसा बर्ताव क्रूर मानसिकता को दर्शाता है। पिछड़े क्षेत्रों के गरीब परिवारों के बच्चों को पढ़ा लिखाकर मुख्य प्रवाह में लाने के उद्देश्य से आश्रमशालाएं स्थापित की गई हैं, लेकिन उनमें भारी अव्यवस्था व्याप्त है।
पिछले दिनों गड़चिरोली जिले की धानोरा तहसील के जपतलाई गांव की आश्रमशाला में खाट या पलंग नहीं होने से जमीन पर सोई 3 बालिकाओं की सांप काटने से मौत हो गई थी। कहीं बालिकाओं के विनयभंग, शारीरिक शोषण की शिकायतें आती हैं। ठंड में कंबल व गर्म कपड़े नहीं होने से बच्चों की मौत होती है। वहां का खाना निकृष्ट होने से विषबाधा की घटनाएं भी हुई हैं। आश्रमशाला में टॉयलेट का अभाव, रात में चौकीदार की व्यवस्था नहीं होना जैसी समस्याएं देखी जाती हैं।
आखिर यह सारा सरकारी पैसा कहां जाता है? निश्चित रूप से उसकी बंदरबाट हो जाती होगी। आश्रमशाला अधीक्षक की नियुक्ति किस योग्यता के आधार पर होती है? जांभुलघाट के अधीक्षक के बारे में शिकायत है कि वह नशे की हालत में आश्रमशाला आता है। इन शालाओं में स्थायी शिक्षक नहीं रहते। शिक्षा का दर्जा भी कामचलाऊ बना हुआ है।
अनेक आश्रमशालाओं का परीक्षा फल 20 से 30 प्रतिशत तक सीमित रहता है। जब भी आश्रमशालाओं की अव्यवस्था का मुद्दा सामने आता है, सरकार जांच समिति नियुक्त कर देती है लेकिन समस्या दूर नहीं होती। वहां के अधीक्षक व शिक्षक पदों पर चरित्रवान व्यक्ति नियुक्त किए जाने चाहिए। नशेड़ी या अपराधी प्रवृत्ति के लोगों को दूर रखना होगा।
आश्रमशालाओं का औचक निरीक्षण कर वहां देखना होगा कि क्या बच्चों को पोषक आहार व शुद्ध पेयजल दिया जा रहा है? वहां टॉयलेट की क्या हालत है? शिक्षक व कर्मचारी उपस्थित हैं भी या नहीं? आश्रमशालाओं में सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएं और उनका कनेक्शन मुख्यालय से होना चाहिए, अनुदानित आश्रमशालाओं के संचालकों के व्यवहार पर भी कड़ी नजर रखनी होगी। वहां सुरक्षा व शिकायत समिति रखकर किसी भी समस्या का समाधान तत्परता से करना होगा। व्यवस्था में सुधार कागज पर नहीं, प्रत्यक्ष दिखाई देने चाहिए।
लेख- चंद्रमोहन द्विवेदी के द्वारा