छठ पूजा में ठेकुआ प्रमुख पारंपरिक प्रसाद है।
इसे गेहूं के आटे, गुड़ या चीनी से बनाया जाता है।
बिहार, झारखंड और पूर्वी यूपी में इसकी परंपरा प्रचलित है।
ठेकुआ सूर्य देव को अर्घ्य देते समय अर्पित किया जाता है।
यह छठ पूजा की लोकसंस्कृति और आस्था का प्रतीक है।
Why Thekua Is Made During Chhath Puja: छठ पूजा में सूर्य देव और छठी मैया की आराधना के साथ पारंपरिक प्रसाद का भी विशेष महत्व होता है। इस पर्व पर बनने वाले अलग-अलग पकवानों में ठेकुआ सबसे खास माना जाता है। बिहार, झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश में छठ पूजा के दौरान घरों में इसे विशेष रूप से तैयार किया जाता है।
गेहूं के आटे, गुड़ या चीनी और घी से बनने वाला ठेकुआ न केवल स्वाद के लिए पसंद किया जाता है, बल्कि यह लोकपरंपरा और धार्मिक आस्था से भी जुड़ा है। ऐसे में आइए जानते हैं कि छठ पूजा में ठेकुआ बनाने की परंपरा क्यों है और इसका क्या महत्व माना जाता है।
छठ पूजा में ठेकुआ को प्रमुख पारंपरिक प्रसाद माना जाता है। इसे घर में शुद्धता और विशेष सावधानी के साथ तैयार किया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, पूजा में बनाया गया प्रसाद सूर्य देव और छठी मैया को अर्पित किया जाता है। ठेकुआ लंबे समय तक सुरक्षित रहने वाला पकवान भी है, इसलिए इसे प्रसाद के रूप में बांटना और व्रतियों के बीच वितरित करना आसान होता है।
छठ पूजा की परंपराएं पीढ़ियों से परिवारों में चली आ रही हैं। ठेकुआ बनाना भी इन्हीं परंपराओं का हिस्सा है। कई घरों में महिलाएं और परिवार के अन्य सदस्य मिलकर इसे तैयार करते हैं। इस दौरान साफ-सफाई और प्रसाद की शुद्धता का विशेष ध्यान रखा जाता है। यह परंपरा परिवार के लोगों को एक साथ जोड़ने और अपनी सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाने का भी माध्यम है।
ठेकुआ बनाने के लिए मुख्य रूप से गेहूं का आटा, गुड़ या चीनी, घी और जरूरत के अनुसार पानी या दूध का इस्तेमाल किया जाता है। कुछ लोग इसमें सौंफ और इलायची भी मिलाते हैं। आटे को गूंथकर छोटी-छोटी लोइयां बनाई जाती हैं और पारंपरिक सांचे या हाथों से आकार दिया जाता है। इसके बाद इन्हें घी या तेल में सुनहरा होने तक तला जाता है। अलग-अलग परिवारों में इसकी विधि में थोड़ा अंतर हो सकता है।
छठ पूजा के दौरान ठेकुआ को विशेष रूप से प्रसाद के रूप में तैयार किया जाता है। इसे सूप में अन्य फल, नारियल और पूजा सामग्री के साथ सजाकर सूर्य देव को अर्घ्य देते समय अर्पित किया जाता है। शाम के संध्या अर्घ्य और अगली सुबह उषा अर्घ्य के अवसर पर भी ठेकुआ प्रसाद का हिस्सा होता है।
छठ पूजा में ठेकुआ का महत्व केवल एक पकवान तक सीमित नहीं है। यह लोकसंस्कृति, पारिवारिक एकता और श्रद्धा का प्रतीक बन चुका है। इसकी पारंपरिक खुशबू और स्वाद छठ पर्व की पहचान से जुड़ गए हैं। यही वजह है कि आधुनिक समय में भी लोग छठ पूजा के अवसर पर घरों में ठेकुआ बनाना और इसे प्रसाद के रूप में बांटना पसंद करते हैं।