छठ पूजा में खरना  फोटो.सोशल मीडिया
धर्म

Chhath Puja Kharna:छठ पूजा में खरना क्यों किया जाता है? जानें गुड़ की खीर और रोटी के प्रसाद का महत्व

Kharna Prasad: छठ पूजा में खरना क्यों किया जाता है और इस दिन गुड़ की खीर व रोटी का प्रसाद क्यों बनता है? जानें खरना की पूजा विधि, धार्मिक महत्व और इससे जुड़ी पारंपरिक मान्यताएं।

सीमा कुमारी

Highlights:

  • खरना छठ महापर्व का दूसरा दिन होता है, जिसे लोहंडा भी कहा जाता है।

  • इस दिन व्रती सुबह से शाम तक उपवास रखते हैं।

  • खरना में गुड़ की खीर और गेहूं के आटे की रोटी का प्रसाद बनाया जाता है।

  • शाम को पूजा के बाद व्रती सबसे पहले खरना का प्रसाद ग्रहण करते हैं।

  • खरना के बाद छठ पूजा का निर्जला व्रत शुरू होता है।

Chhath Puja Second Day: छठ पूजा भारत के प्रमुख लोकपर्वों में से एक है, जिसे विशेष रूप से बिहार, झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश में श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। चार दिनों तक चलने वाले इस महापर्व में हर दिन की अपनी अलग परंपरा और धार्मिक मान्यता होती है।

इन्हीं में से एक है खरना, जो छठ पूजा का दूसरा दिन होता है। इस दिन व्रती पूरे दिन उपवास रखते हैं और शाम को पूजा करने के बाद गुड़ की खीर और रोटी का प्रसाद ग्रहण करते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि छठ पूजा में खरना क्यों किया जाता है और इस दिन इसी प्रसाद को बनाने की परंपरा क्यों है? आइए जानते हैं।

छठ पूजा में खरना क्यों किया जाता है?

छठ महापर्व के दूसरे दिन को खरना कहा जाता है। कई क्षेत्रों में इसे लोहंडा के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन व्रती सुबह से शाम तक उपवास रखते हैं। सूर्यास्त के समय स्नान करके स्वच्छता के साथ पूजा की तैयारी की जाती है। इसके बाद छठी मैया और सूर्य देव का स्मरण कर उन्हें प्रसाद अर्पित किया जाता है। खरना के बाद व्रती अगले दिन के निर्जला व्रत का संकल्प लेते हैं। इस तरह खरना छठ पूजा के मुख्य अनुष्ठानों की शुरुआत का महत्वपूर्ण पड़ाव माना जाता है।

खरना में गुड़ की खीर और रोटी ही क्यों बनाई जाती है?

खरना के प्रसाद में गुड़ से बनी खीर और गेहूं के आटे की रोटी प्रमुख होती है। खीर बनाने के लिए दूध, चावल और गुड़ का इस्तेमाल किया जाता है। गुड़ को पारंपरिक और सात्विक खाद्य सामग्री माना जाता है। वहीं, गेहूं की रोटी सादगी और पारंपरिक भोजन का हिस्सा है। कई परिवारों में इस प्रसाद को मिट्टी के चूल्हे पर आम की लकड़ी से तैयार करने की परंपरा भी है।

क्या है खरना का प्रसाद बनाने की परंपरा?

खरना का प्रसाद बनाते समय साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखा जाता है। इसे तैयार करने के लिए स्वच्छ बर्तनों और शुद्ध सामग्री का इस्तेमाल किया जाता है। कई घरों में प्रसाद बनाने के लिए अलग बर्तनों का उपयोग किया जाता है। पूजा की तैयारी में परिवार के सदस्य भी सहयोग करते हैं। हालांकि, अलग-अलग क्षेत्रों में प्रसाद बनाने के तरीके में थोड़ा अंतर हो सकता है।

खरना का प्रसाद कैसे ग्रहण किया जाता है?

शाम को पूजा के बाद व्रती सबसे पहले खरना का प्रसाद ग्रहण करते हैं। इसके बाद परिवार के अन्य सदस्यों और परिचितों में भी प्रसाद बांटा जाता है। इस परंपरा को श्रद्धा और सामूहिक सहभागिता से जोड़कर देखा जाता है। खरना के बाद व्रती छठ पूजा के अगले अनुष्ठानों की तैयारी करते हैं।

खरना का धार्मिक महत्व क्या है?

खरना को संयम, पवित्रता और भक्ति का प्रतीक माना जाता है। यह दिन व्रती को छठ पूजा के मुख्य निर्जला व्रत के लिए मानसिक और धार्मिक रूप से तैयार करने से जुड़ा है। गुड़ की खीर और रोटी का प्रसाद इस पर्व की पारंपरिक पहचान भी है।

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