पितृ पक्ष में क्या नहीं खाना चाहिए? (सौ.सोशल मीडिया)
धर्म

पितरों के इन 16 दिनों में क्यों बदल जाता है खानपान? भूलकर भी न खाएं ये चीजें, इस दिन पितृपक्ष शुरू

Pitru Paksha 2026: पितृपक्ष के16 दिनों में खानपान को लेकर विशेष सावधानी बरतने की मान्यता है। जानें पितृपक्ष 2026 कब से शुरू हो रहा है और इस दौरान किन चीजों को खाने से बचना चाहिए।

सीमा कुमारी

Pitru Paksha Mein Kya Nahi Khana Chahiye: हर साल भाद्रपद माह की पूर्णिमा तिथि से पितृपक्ष की शुरुआत हो जाती है और यह अमावस्या तक चलता है। इस दौरान लोग अपने पितरों की आत्मा की शांति के लिए श्राद्ध, तर्पण आदि करते है। धर्म एवं लोक मान्यता के अनुसार, इन 16 दिनों की अवधि में पितरों की शांति और तृप्ति के लिए आहार से जुड़े कुछ खास नियमों का पालन करना जरूरी माना गया है। ऐसे में आज हम आपको बताते है पितृ पक्ष में आहार से जुड़े नियमों के बारे में।

पितृ पक्ष में क्या नहीं खाना चाहिए?

प्याज और लहसुन का सेवन न करें

धर्म एवं लोक मान्यता के अनुसार, पितृपक्ष के दौरान प्याज और लहसुन का सेवन करने की मनाही होती है। ये दोनों चीजें को हिन्दू धर्म में राजसिक या तामसिक प्रकृति वाला माना गया है। इसलिए पितृपक्ष के दौरान इन चीजों से परहेज करने की सलाह दी जाती है।

मांस, मछली, अंडे से करें परहेज

धर्म ग्रथों के अनुसार,पितृ पक्ष के दौरान खानपान में विशेष ध्यान रखना चाहिए। खासतौर पर इस दौरान तामसिक भोजन यानी मांस, मछली,अंडे का सेवन करने से बचना चाहिए।

शराब पीने से बचें

पितृपक्ष के दौरान तामसिक भोजन के अलावा, शराब और अन्य नशीले पदार्थों से भी दूर रहने को कहा जाता है। यह समय पूर्वजों के प्रति सम्मान और आत्मसंयम का होता है। इसलिए इन दिनों नशे से पूरी तरह दूरी बनाकर रखें।

बहुत मसालेदार भोजन खाने से बचें

पितृपक्ष के दौरान बहुत मसालेदार भोजन खाने से भी बचना चाहिए। इस दौरान सादा और सात्त्विक भोजन करने की परंपरा है। मान्यता है कि हल्का और सात्त्विक भोजन करने से मन शांत रहता है और श्रद्धा व संयम के साथ पितरों के लिए किए जाने वाले कर्मों पर ध्यान केंद्रित करने में सहायता मिलती है।

पितृ पक्ष में क्या करें?

तर्पण और पिंडदान करे

पितृपक्ष के दौरान अपने पूर्वजों की तिथि के दिन जल में काले तिल, कुशा और जौ मिलाकर दक्षिण दिशा की ओर मुख करके तर्पण करें।

दान-पुण्य करें

इस दौरान जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र, और अपनी क्षमतानुसार अन्य चीजों का दान करें।

जीव-जंतुओं को खाना खिलाए

गाय, कौवे, कुत्ते और चींटियों के लिए भोजन का एक हिस्सा जरूर निकालें। मान्यता है कि इससे पितृ तृप्त होते हैं।

दक्षिण दिशा में दीपक जलाएं

पितृपक्ष के दौरान हर रोज सुबह और शाम को पितरों के निमित्त दक्षिण दिशा की ओर मुंह करके दीपक जलाएं।

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