Hartalika Teej 16 Patte : 14 सितंबर को हरतालिका तीज का व्रत रखा जा रहा है। धर्म शास्त्रों के अनुसार, इस दिन सुहागिन महिलाएं अखंड सौभाग्य की कामना के साथ देवों के देव महादेव और मां पार्वती की पूजा-अर्चना करती हैं। वही, इस दिन पूजा के दौरान महादेव को 16 तरह की पत्तियां अर्पित करने की विशेष परंपरा भी है।
ऐसा माना जाता है कि इस उपाय को करने से महादेव प्रसन्न होकर साधक की सभी मुरादें पूरी करते हैं। साथ ही शुभ फल की प्राप्ति होती है।
धर्म शास्त्रों के अनुसार, हरतालिका तीज पर 16 तरह की पत्तियों को चढ़ाने की विशेष परंपरा है। जिसका अपना अपना महत्व है। बताया जाता है कि, इस दिन सुहागिन महिलाएं और कुंवारी लड़कियां पूजा के दौरान भगवान शिव जी को 16 तरह की पत्तियों को अर्पित कर मनचाहे वर की प्राप्ति और वैवाहिक जीवन में खुशियों के आगमन के लिए के लिए कामना करती हैं।
आम के पत्ते, बिल्वपत्र, शमी के पत्ते, कनेर के पत्ते, नीम, अशोक के पत्ते, भृंगराज , जातीपत्र, बांस के पत्ते, केले के पत्ते, अगस्त्य, सेवंतिका, देवदार पत्र, पान के पत्ते, धतूरा और चंपा।
हरतालिका तीज पर भगवान शिव और माता पार्वती को मुख्य रूप से पांच प्रकार के फल चढ़ाए जाते हैं, जैसे केला, सेब, नाशपती, पपीता, अनार, अमरूद या कोई भी मौसमी फल।
यह महादेव को अत्यंत प्रिय है। इसे चढ़ाने से भय और कष्ट दूर होते हैं।
सफेद या नीले रंग का आक का फूल शिव जी को बहुत पसंद है।
इन्हें अर्पित करने से घर में सुख-शांति आती है।
इसे चढ़ाने से शनि के अशुभ प्रभाव कम होते हैं और मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
माता पार्वती को श्रृंगार की वस्तुएं और लाल गुड़हल या गुलाब के फूल चढ़ाएं। वहीं, शिव जी की पूजा में केतकी, चंपा और लाल रंग के सामान्य फूलों का प्रयोग न करें।