भगवान बलराम (सौ.AI)
धर्म

Hal Shashthi: हलषष्ठी पर क्यों नहीं पीते गाय का दूध और नहीं खाते हल से उगा अनाज? जानें व्रत के जरूरी नियम

Hal Shashthi Puja Vidhi: क्या आप जानते है कि, हलषष्ठी के दिन व्रत रखने के अलावा, कुछ नियमों का पालन करना भी जरूरी माना जाता है? हलषष्ठी के दिन क्या नही करना चाहिए? यहां जानिए।

सीमा कुमारी

Hal ShashthiRules: संतान की लंबी उम्र, सुख और समृद्धि की कामना के लिए रखा जाने वाला हरछठ यानी हलषष्ठी का व्रत कल 2 सितंबर बुधवार को मनाई जाएगी। सनातन हिन्दू परंपरा में इस व्रत का बड़ा महत्व बताया गया है। क्या आप जानते है कि, इस दिन व्रत रखने के अलावा, कुछ नियमों का पालन करना भी जरूरी माना जाता है? हलषष्ठी के दिन क्या नही करना चाहिए? यहां जानिए

हलषष्ठी के दिन क्या नही करना चाहिए?

मोटे अनाज, तामसिक भोजन से परहेज

धर्म ग्रथों के अनुसार, हलषष्ठी के दिन हल से जोती गई मोटे अनाज के साथ तामसिक भोजन से भी पूरी तरह दूरी बनाए रखना चाहिए। आप इस दिन ऐसी चीजों का ही सेवन करें जिसकी खेती न होती हो। आप ऐसे में फलाहार को भोजन में शामिल कर सकती हैं जो पानी में उगते हों।

हलषष्ठी पर क्यों नहीं पीते गाय का दूध ?

इस दिन गाय दूध से परहेज इसलिए बताया गया है कि क्योंकि भगवान बलराम को गाएं अत्यंत प्रिय थीं। इस दिन गाय का पूरा दूध उसके बछड़े के लिए ही होना चाहिए, इसलिए गाय के दूध की बनी कोई भी चीज खाने की मनाही होती है। आप भूलकर भी भोजन में या किसी अन्य काम में गाय के दूध का इस्तेमाल न करें।

पेड़-पौधों को भी काटने की मनाही

हलषष्ठी के दिन पेड़-पौधों को भी काटने की मनाही होती है। हलषष्ठी का पर्व भगवान बलराम के जन्मोत्सव के रूप मनाया जाता है। उन्हें जानवरों, पेड़-पौधों से भी काफी लगाव था।इस दिन सुई-धागे से लेकर बाल-नाखून काटने से भी बचना चाहिए।

मान्यता है कि इस दिन प्रकृति और वनस्पतियों का सम्मान करना चाहिए। इसलिए व्रत रखने वाले लोगों को पेड़-पौधों की कटाई या उन्हें किसी भी तरह का नुकसान पहुंचाने से बचना चाहिए। धार्मिक दृष्टि से यह नियम प्रकृति के प्रति सम्मान और संरक्षण का संदेश भी देता है।

हलषष्ठी त्यौहार क्यों मनाया जाता है?

हलषष्ठी उत्तर भारत में मनाया जाने वाला मुख्य पर्व है। जो हर साल भगवान बलराम के जन्मोत्सव के रूप मनाया जाता है। इस दिन भगवान बललाम के विशेष अस्त्र हल और मूसल की पूजा करने का विधान होता है।

इसके अलावा,संतान की रक्षा और दीर्घायु के लिए माताएं व्रत रखती है। अगर आप हल छठ व्रत से जुड़े यहां बताए गए नियमों का पालन करते हैं, तो मान्यता के अनुसार संतान को दीर्घायु और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है।

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