महाकुंभ का दूसरा अमृत स्नान(सौ.सोशल मीडिया)  
धर्म

मौनी अमावस्या की पूजा में देवस्वामी ब्राह्मण की कथा पढ़ने की है अपार महिमा, जानिए क्या है यह कथा

सनातन धर्म में मौनी अमावस्या का विशेष महत्व है। इस दिन भगवान विष्णु की विधि पूर्वक पूजा और कथा पढ़ने से पुण्यफल की प्राप्ति होती है। साथ ही पितरों की आत्मा का शांति मिलती है। इसलिए इस दिन कथा जरूर सुननी चाहिए।

सीमा कुमारी

Mauni Amavasya 2025: सनातन धर्म में मौनी अमावस्या का विशेष महत्व है। आज 29 जनवरी को मौनी अमावस्या के दिन महाकुंभ का दूसरा अमृत स्नान भी किया जाएगा। ऐसे में इस दिन का महत्व सनातन धर्म में और भी बढ़ जाता है। इस दिन मौन रखकर उपवास और स्नान व दान करने से पुण्य मिलता है।

धार्मिक मान्यता है कि ऐसे करने से श्रीहरि प्रसन्न होते हैं और आशीर्वाद देते हैं। साथ ही, कहा गया कि इस दिन पितर धरती पर आते हैं, तो उनकी आत्मा की शांति के लिए तर्पण, पिंडदान और श्राद्ध करना चाहिए। मौनी अमावस्या के दिन गृहस्थ लोग और साधु-संन्यासी व्रत और पूजन करते हैं। साथ ही कथा भी कहते व सुनते हैं। माना जाता है कि मौनी अमावस्या की कथा सुनने से व्रत की पूर्णता और पुण्य की प्राप्ति होती है। ऐसे में आइए जानते है मौनी अमावस्या की कथा की महिमा -

क्या है मौनी अमावस्या की कथा

पौराणिक कथा के मुताबिक, कांचीपुरी में देवस्वामी नाम का एक ब्राह्मण था। देवस्वामी की एक पत्नी का नाम धनवती था। उनके 7 बेटे और एक गुणवती नाम की बेटी थी। एक बार एक स्वामी जी ने गुणवती के भाग्य की भविष्यवाणी की कि गुणवती के विवाह के बाद उसका पति मृत्यु गति को प्राप्त हो जाएगा।

इस भविष्यवाणी से परेशान देवस्वामी ने एक महात्मा की सलाह ली। महात्मा ने बताया कि सिंहल द्वीप में रहने वाली पतिव्रता महिला सोमा धाबिन अगर अपने पुण्य दान कर दें तो यह दोष खत्म हो जाएगा। इसके बाद देवस्वामी ने अपनी बेटी गुणवती को उसके छोटे भाई के साथ सोमा धाबिन के पास भेजा।

यात्रा के दौरान दोनों भाई-बहन समंदर किनारे एक पीपल के पेड़ के नीचे विश्राम के लिए रुके। फिर यहां से एक गिद्ध कुनबे की मदद से वे समंदर पार कर सोमा धोबिन के घर पहुंचे। पहुंचने के बाद गुणवती ने उनके घर के कामों में हाथ भी बंटाया। इसके बाद सोमा को अपनी परेशानी बताई।

यह सब सुनने के बाद सोमा का दिल पसीज गया और फिर उन्होंने गुणवती को साथ लिया और उसके घर गई। यहां पहुंच कर उसकी शादी के दिन पूजा-पाठ कर सोमा ने अपने पुण्य गुणवती को दान कर दिए, जिससे गुणवती के पति का जीवन बच गया।

इसके बाद सोमा ने भगवान विष्णु की पूजा और 108 परिक्रमा की, जिससे उनके पति और बेटे की आकाल मृत्यु टल गई। इसके बाद से ही माना गया कि कथा के मुताबिक, मौनी अमावस्या के दिन व्रत दान और श्रीहरि की पूजा से जीवन में सुख-समृद्धि और मोक्ष की प्राप्ति होती है।इसलिए इस दिन व्रत, दान और कथा का महत्व है।

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